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Moradabad News: श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता का प्रसंग सुन भाव-विभोर हुए श्रद्धालु
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बिलारी। नगलिया जट गांव के शिव मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के सातवें दिन कथा व्यास आरती शास्त्री ने श्रीकृष्ण और भक्त सुदामा की मित्रता का प्रसंग सुनाया। मित्रता का प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर गए गए। कथाव्यास ने कहा कि आज के समय मित्रता के दौरान अधिकतर लोग अपना स्वार्थ साधने से नहीं चूकते और गद्दारी के कारण संबंधों में बिगाड़ हो जाता है।
कथाव्यास ने कहा कि गुरु से कपट और मित्र से चोरी कभी नहीं करनी चाहिए। इसका भयंकर परिणाम भोगना पड़ता है। परंतु एक राजा और दूसरा रंक। ऐसे में राजा ने पूरी दुनिया के समक्ष एक ऐसा उदाहरण प्रस्तुत किया कि मित्रता में कोई बड़ा या छोटा, ऊंचा या नीचा नहीं होता, बस समर्पण और भावना पवित्र होनी चाहिए। कथाव्यास ने प्रसंग सुनाते हुए आगे कहा कि मांगने से कभी किसी को कुछ नहीं मिलता, सुदामा निर्धन अवश्य थे परंतु दरिद्र नहीं थे। वह ब्रह्मज्ञानी और स्वाभिमानी थे। उनके इस भाव को देखकर श्री कृष्ण ने अपने राजमहल में उन्हें सर्वोच्च सम्मान देने के साथ ही उनकी दरिद्रता को सदैव के लिए दूर करके दो लोक समर्पित कर दिए। उनके साथ उनकी बस्ती की निर्धनता भी दूर कर दी।
इस दौरान कृष्ण सुदामा की सुंदर झांकी का भी प्रदर्शन किया गया। आरती के बाद भक्तों में जयकारों के साथ प्रसाद वितरण हुआ। दोपहर बाद शिव मंदिर परिसर में भंडारे का आयोजन हुआ। जिसमें संत-महात्मा और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। इस अवसर पर ग्राम प्रधान संजीव चौधरी, डॉ. यशवीर सिंह, काशीराम, सन्नू सिंह, महेंद्र सिंह व अरविंद शर्मा आदि रहे।
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कथाव्यास ने कहा कि गुरु से कपट और मित्र से चोरी कभी नहीं करनी चाहिए। इसका भयंकर परिणाम भोगना पड़ता है। परंतु एक राजा और दूसरा रंक। ऐसे में राजा ने पूरी दुनिया के समक्ष एक ऐसा उदाहरण प्रस्तुत किया कि मित्रता में कोई बड़ा या छोटा, ऊंचा या नीचा नहीं होता, बस समर्पण और भावना पवित्र होनी चाहिए। कथाव्यास ने प्रसंग सुनाते हुए आगे कहा कि मांगने से कभी किसी को कुछ नहीं मिलता, सुदामा निर्धन अवश्य थे परंतु दरिद्र नहीं थे। वह ब्रह्मज्ञानी और स्वाभिमानी थे। उनके इस भाव को देखकर श्री कृष्ण ने अपने राजमहल में उन्हें सर्वोच्च सम्मान देने के साथ ही उनकी दरिद्रता को सदैव के लिए दूर करके दो लोक समर्पित कर दिए। उनके साथ उनकी बस्ती की निर्धनता भी दूर कर दी।
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इस दौरान कृष्ण सुदामा की सुंदर झांकी का भी प्रदर्शन किया गया। आरती के बाद भक्तों में जयकारों के साथ प्रसाद वितरण हुआ। दोपहर बाद शिव मंदिर परिसर में भंडारे का आयोजन हुआ। जिसमें संत-महात्मा और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। इस अवसर पर ग्राम प्रधान संजीव चौधरी, डॉ. यशवीर सिंह, काशीराम, सन्नू सिंह, महेंद्र सिंह व अरविंद शर्मा आदि रहे।
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