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Moradabad News: बच्चों पर हमले के बाद जागी टीम... 36 घंटे में 96 बंदर पकड़े
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मुरादाबाद। मोरा की मिलक में बच्चों पर बंदरों के हमले के बाद आखिरकार नगर निगम द्वारा लगाई गई टीम की नींद टूटी। टीम ने मोरा की मिलक और आशियाना कॉलोनी में पिछले 36 घंटे में 96 से अधिक बंदर पकड़े हैं। नगर निगम ने बंदर पकड़ने के लिए जाल और पिंजरों की संख्या भी बढ़ा दी है। बंदरों के पुनर्वास के लिए वन विभाग को पत्र लिखा गया है।
शुक्रवार सुबह मोरा की मिलक और आशियाना पहुंची टीम के सदस्यों ने क्षेत्र में पिंजरे लगाए। इसमें बदरों के लिए गुड़ और केले रखे गए। भोजन के लिए बंदर पिंजरे के अंदर आ गए, इस तरह एक के बाद एक तीन पिंजरों में करीब 30 बंदर फंस गए। इस तरह अब तक टीम 96 बंदरों को पकड़ चुकी है। एक दिन पहले मोरा की मिलक में बंदरों ने दो बच्चों पर हमला कर दिया था। सात वर्षीय हर्षिता बंदरों से बचकर भागते समय फिसलकर गिर गई, जिससे उसके हाथ की हड्डी टूट गई। वहीं चार वर्षीय एक बच्चे की एड़ी में बंदर ने काट लिया। उसके घाव पर नौ टांके लगाने पड़े। घटना के बाद से इलाके के लोगों में दहशत और बढ़ गई है।
नगर आयुक्त दिव्यांशु पटेल का कहना है कि स्थायी व्यवस्था के लिए बंदर पकड़ने वाली एजेंसी के चयन की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है और टेंडर जारी किया गया है। टेंडर प्रक्रिया पूरी होने तक अस्थायी टीम के जरिए अभियान चलाया जा रहा है। बंदरों को पकड़ने के बाद उनके सुरक्षित प्रबंधन और पुनर्वास की व्यवस्था को लेकर वन विभाग से समन्वय किया जा रहा है।
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शुक्रवार सुबह मोरा की मिलक और आशियाना पहुंची टीम के सदस्यों ने क्षेत्र में पिंजरे लगाए। इसमें बदरों के लिए गुड़ और केले रखे गए। भोजन के लिए बंदर पिंजरे के अंदर आ गए, इस तरह एक के बाद एक तीन पिंजरों में करीब 30 बंदर फंस गए। इस तरह अब तक टीम 96 बंदरों को पकड़ चुकी है। एक दिन पहले मोरा की मिलक में बंदरों ने दो बच्चों पर हमला कर दिया था। सात वर्षीय हर्षिता बंदरों से बचकर भागते समय फिसलकर गिर गई, जिससे उसके हाथ की हड्डी टूट गई। वहीं चार वर्षीय एक बच्चे की एड़ी में बंदर ने काट लिया। उसके घाव पर नौ टांके लगाने पड़े। घटना के बाद से इलाके के लोगों में दहशत और बढ़ गई है।
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नगर आयुक्त दिव्यांशु पटेल का कहना है कि स्थायी व्यवस्था के लिए बंदर पकड़ने वाली एजेंसी के चयन की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है और टेंडर जारी किया गया है। टेंडर प्रक्रिया पूरी होने तक अस्थायी टीम के जरिए अभियान चलाया जा रहा है। बंदरों को पकड़ने के बाद उनके सुरक्षित प्रबंधन और पुनर्वास की व्यवस्था को लेकर वन विभाग से समन्वय किया जा रहा है।
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