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औरत को जीते जी मार डालता है हलाला
ब्यूरो/अमर उजाला/मुरादाबाद
Updated Fri, 28 Oct 2016 02:01 AM IST
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एमएच कालेज में समान नागरिक संहिता बनाम तीन तलाक विषय पर सेमिनार को बोलते डा. विशेष गुप्ता
- फोटो : अमर उजाला
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यूं तो ये मुद्दा बेहद संवेदनशील था। लेकिन कुछ बुद्धिजीवियों ने साहसिक पहल की। समान नागरिक संहिता और तीन तलाक पर देश में छिड़ी बहस के बीच गुरुवार को शहर से एक सधी आवाज उठी है। मुमकिन है कि इस तर्ज पर अब आगे भी बहसों का सिलसिला बने।
मौका एमएच पीजी कालेज के हॉल में ‘समान नागरिक संहिता’ पर आयोजित सेमिनार का था। प्रोग्राम में डा. जोहरजबीं ने कहा कि तीन तलाक कुप्रथा है। इससे औरत जीते जी मर जाती है। यहां यूं तो वक्ताओं के विचारों में बड़ा फासला भी दिखा, लेकिन एक बात कॉमन थी। वो थी बहस की जरूरत पर एकराय।
मुस्लिम महिलाओं से लेकर मुस्लिम बुद्धिजीवियों तक ने तीन तलाक के मौजूदा ट्रेंड पर नाइत्तफाकी जताते हुए पुरजोर ढंग से कहा कि मुस्लिम समाज समान नागरिक संहिता और तीन तलाक पर बहस से भागने के बजाए उसमें हिस्सा ले।
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सेमिनार में कुछ मुस्लिम महिलाओं ने खुलकर अपनी पीड़ा रखी तो कुछ स्टूडेंट्स ने भी सवाल जवाब किए। एमएचपीजी कालेज के प्रिंसिपल और सेमिनार के आयोजक डा. विशेष गुप्ता ने शुरू में ही कहा कि सेमिनार का मकसद किसी के धार्मिक कानूनों में दखल देना नहीं बल्कि चर्चा के जरिए सही दृष्टिकोण विकसित करना और महिलाओं की स्थित में सुधार लाने की कोशिश है।
सेेमिनार में लायबा, हिना परवीन, निशा परवीन और मोहम्मद अनस ने कहा कि तीन तलाक में बदलाव की जरूरत है लेकिन परंपराओं में परिवर्तन सहमति से होना चाहिए। यहां डा. मीना कौल, डा. आनंद कुमार सिंह, डा. नरेंद्र सिंह, डा. अनुपम गुप्ता, डा. मीना गुप्ता, डा. आसमा अजीज, डा. कामिनी शर्मा, गोपाल टंडन थे।
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मौका एमएच पीजी कालेज के हॉल में ‘समान नागरिक संहिता’ पर आयोजित सेमिनार का था। प्रोग्राम में डा. जोहरजबीं ने कहा कि तीन तलाक कुप्रथा है। इससे औरत जीते जी मर जाती है। यहां यूं तो वक्ताओं के विचारों में बड़ा फासला भी दिखा, लेकिन एक बात कॉमन थी। वो थी बहस की जरूरत पर एकराय।
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मुस्लिम महिलाओं से लेकर मुस्लिम बुद्धिजीवियों तक ने तीन तलाक के मौजूदा ट्रेंड पर नाइत्तफाकी जताते हुए पुरजोर ढंग से कहा कि मुस्लिम समाज समान नागरिक संहिता और तीन तलाक पर बहस से भागने के बजाए उसमें हिस्सा ले।
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सेमिनार में कुछ मुस्लिम महिलाओं ने खुलकर अपनी पीड़ा रखी तो कुछ स्टूडेंट्स ने भी सवाल जवाब किए। एमएचपीजी कालेज के प्रिंसिपल और सेमिनार के आयोजक डा. विशेष गुप्ता ने शुरू में ही कहा कि सेमिनार का मकसद किसी के धार्मिक कानूनों में दखल देना नहीं बल्कि चर्चा के जरिए सही दृष्टिकोण विकसित करना और महिलाओं की स्थित में सुधार लाने की कोशिश है।
सेेमिनार में लायबा, हिना परवीन, निशा परवीन और मोहम्मद अनस ने कहा कि तीन तलाक में बदलाव की जरूरत है लेकिन परंपराओं में परिवर्तन सहमति से होना चाहिए। यहां डा. मीना कौल, डा. आनंद कुमार सिंह, डा. नरेंद्र सिंह, डा. अनुपम गुप्ता, डा. मीना गुप्ता, डा. आसमा अजीज, डा. कामिनी शर्मा, गोपाल टंडन थे।