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पंजाब से लाया युवक मुरादाबाद का गुलाम निकला 

Tue, 05 Apr 2016 03:06 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मुरादाबाद
ब्यूरो/अमर उजाला, मुरादाबाद Updated Tue, 05 Apr 2016 03:06 AM IST
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The young man was a slave brought from Punjab is basicaly to Moradabad
लाया गया लापता युवक गुलाम - फोटो : अमर उजाला
एक माह पहले जिस युवक को कुंदरकी से लापता कमरे आलम मानकर पंजाब से लाया गया था वह मुरादाबाद का गुलाम मोहम्मद निकला जो सात साल पहलेे गायब हुआ था। अमर उजाला में छपी खबर ने सोमवार की शाम तो गुलाम को उसके असली मां-बाप के पास पहुंचा दिया।
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पुलिस ने पूरी पड़ताल के बाद गुलाम को उसके असली मां-बाप को सौंप दिया है। कुंदरकी केेे निकटवर्ती ग्राम चकफाजलपुर निवसी समीर तीन साल से लापता बेटा कमरे आलम मानकर पंजाब से गुलाम को लेकर कुंदरकी थाने आया तथा लेकिन बाद मेेें अपना बेटा माननेे से ही इंकार कर दिया।
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पुलिस गुलाम को ही समीर का लापता बेटा कमरे आलम बता रही थी। पुलिस ने इस मामले को सुलझाने के लिए डीएनए जांच का भी सहारा लिया है। फिलहाल उसकी रिपोर्ट नहीं आई है। 
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अमर उजाला अखबार को लेकर कुंदरकी थाने पहुंचे मुरादाबाद केे थाना नागफनी के मोहल्ला दौलत बाग गली नंबर-एक निवासी अब्दुल्ला औेर उसकी पत्नी रुखसाना अन्य परिजनाें के साथ पहुंची। थानाध्यक्ष सुनील शर्मा कोे बताया कि गुलाम उनका बेटा है।

वह बीती 21 दिसंबर-2009 को गायब होे गया था जिसकेे अपहरण की आशंका में उसके ही साथ टेलरिंग का काम करनेे वालेे साथी आसिफ केे खिलाफ मुकदमा भी नागफनी थाने मेेें लिखाया गया था। पुलिस ने गुलाम को उसकी मां रुखसाना से मिलवाया तो वह लिपट कर भावुक हो गया। अन्य परिजनाेें से मिलकर बेहद खुश हो गया।

गुलाम मुरादाबाद से सात साल पहलेे गायब हुआ था। इस संबंध मेें नागफनी थानेे में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। गुलाम के पिता अब्दुल्ला साथी टेलर आसिफ पुत्र फारूक निवासी नया गांव पुराना आरटीओेे ऑफिस थाना सिविल लाइन मुरादाबाद को अपहरण के आरोप में नामजद कराया गया था। कोर्ट से आसिफ कोे उम्रकैद की सजा भी हो गई। आसिफ इस वक्त बरेली की सेंट्रल जेल में सजा काट रहा हैे।

 

 

तो जिंदगी भर गुलामी के  जाल मेें फंसा रहता गुलाम.....

अगर समीर लापता बेटे कमरे आलम की तलाश में पंजाब नहीं जाता तो शायद गुलाम अपने परिजनों से शायद नहीं मिल पाता क्योेंकि पंजाब में गुलाम सेे पशुआेें की देखभाल कराई जाती थी। बाहर की दुनिया सेे उसका कोई मतलब नहीं था।

समीर ने पहलेे तो गुलाम को देखकर उसे अपना बेटा मान लिया और पंजाब से कुंदरकी ले आया। लेकिन परिजनाेें गुलाम को कमरे आलम मानने से इंकार कर दिया जिसको लेकर पुलिस पसोेेपेश में थी।

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