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26 साल बाद आया फैसला - टाडा के चार दोषियों को कोर्ट ने दी उम्रकैद
ब्यूरो/अमर उजाला/मुरादाबाद
Updated Thu, 23 Mar 2017 03:21 AM IST
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मुरादाबाद में टाडा के दोषियों को ले जाती पुलिस।
- फोटो : अमर उजाला
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खालिस्तानी आतंकवाद के दौर में मंडी धनौरा में सब इंस्पेक्टर समेत पांच लोगों की हत्या के मामले में नौ में से चार आरोपियों को अदालत ने टाडा के तहत के दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। जबकि पांच लोगों को साक्ष्यों के अभाव में दोषमुक्त कर दिया है।
सभी दोषियों को जेल भेज दिया गया है। दोषियों के परिजनों का कहना है कि उन्हेें पुलिस ने झूठे मामले में फंसाया है। इस मामले में वह सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल करेंगे। 8 अक्टूबर 1991 की रात 12.30 बजे अमरोहा जिले के मंडी धनौरा थाना क्षेत्र के अंतर्गत धनौरा-कमीलपुर मार्ग पर आजपुर और झडपुरा के बीच एक आतंकी घटना को अंजाम दिया गया था।
एक ट्राली पर जा रहे कुछ लोगों ने पेट्रोलिंग कर रही पुलिस टीम पर फायरिंग कर उन्हें मौत के घाट उतार दिया। सूचना पाकर उनका पीछा करने गए एक एसआई और कांस्टेबल की भी हत्या कर दी गई। रात में तीन शव बरामद किए गए थे। जबकि सुबह एसआई और कांस्टेबल का शव मिला था।
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एसआई की बाइक, एक रिवाल्वर और एक रायफल भी लूट ली गई थी। बाइक और रिवाल्वर की रिकवरी पकड़े गए आरोपियों से की गई। इस मामले को पुलिस ने हत्या, लूट के साथ ही टेरेरिस्ट एंड डिस्रपटिक एक्टिविटिी (प्रिवेंशन) एक्ट यानि टाडा के तहत दर्ज किया था।
मुरादाबाद जिला जज की अदालत में यह मुकदमा चला। अभियोजन की ओर से जेडी प्रोसीक्यूशन योगेंद्र कुमार जैन व मुकेश चतुर्वेदी ने पक्ष रखा। करीब 19 गवाहों की गवाही कराई गई। जिसमें पुलिस और पब्लिक के लोगों के बयान हुए। करीब ढाई दशक लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने बुधवार को इस मामले में फैसला सुनाया।
जिला एवं सत्र न्यायाधीश आरके गौतम की अदालत ने नौ अभियुक्तों में से चार अभियुक्त सुच्चा सिंह, सतनाम सिंह, दयाल सिंह और सुरेंद्र सिंह को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास और 40-40 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। बाकी पांच अभियुक्तों को अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में आरोपों से बरी कर दिया है।
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सभी दोषियों को जेल भेज दिया गया है। दोषियों के परिजनों का कहना है कि उन्हेें पुलिस ने झूठे मामले में फंसाया है। इस मामले में वह सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल करेंगे। 8 अक्टूबर 1991 की रात 12.30 बजे अमरोहा जिले के मंडी धनौरा थाना क्षेत्र के अंतर्गत धनौरा-कमीलपुर मार्ग पर आजपुर और झडपुरा के बीच एक आतंकी घटना को अंजाम दिया गया था।
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एक ट्राली पर जा रहे कुछ लोगों ने पेट्रोलिंग कर रही पुलिस टीम पर फायरिंग कर उन्हें मौत के घाट उतार दिया। सूचना पाकर उनका पीछा करने गए एक एसआई और कांस्टेबल की भी हत्या कर दी गई। रात में तीन शव बरामद किए गए थे। जबकि सुबह एसआई और कांस्टेबल का शव मिला था।
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एसआई की बाइक, एक रिवाल्वर और एक रायफल भी लूट ली गई थी। बाइक और रिवाल्वर की रिकवरी पकड़े गए आरोपियों से की गई। इस मामले को पुलिस ने हत्या, लूट के साथ ही टेरेरिस्ट एंड डिस्रपटिक एक्टिविटिी (प्रिवेंशन) एक्ट यानि टाडा के तहत दर्ज किया था।
मुरादाबाद जिला जज की अदालत में यह मुकदमा चला। अभियोजन की ओर से जेडी प्रोसीक्यूशन योगेंद्र कुमार जैन व मुकेश चतुर्वेदी ने पक्ष रखा। करीब 19 गवाहों की गवाही कराई गई। जिसमें पुलिस और पब्लिक के लोगों के बयान हुए। करीब ढाई दशक लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने बुधवार को इस मामले में फैसला सुनाया।
जिला एवं सत्र न्यायाधीश आरके गौतम की अदालत ने नौ अभियुक्तों में से चार अभियुक्त सुच्चा सिंह, सतनाम सिंह, दयाल सिंह और सुरेंद्र सिंह को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास और 40-40 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। बाकी पांच अभियुक्तों को अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में आरोपों से बरी कर दिया है।