फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Moradabad News ›   कातिल मिला नहीं, पुलिस ने उसके पंजे के निशान भी मिटाए

कातिल मिला नहीं, पुलिस ने उसके पंजे के निशान भी मिटाए

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Sun, 24 Feb 2019 01:39 AM IST
विज्ञापन
कातिल मिला नहीं, पुलिस ने उसके पंजे के निशान भी मिटाए
मुरादाबाद(अभिषेक सिंह)।
विज्ञापन

‘सिंबा’ फिल्म में जिस तरह पुलिस रिकार्ड से दुष्कर्म केस की वीडियो गायब हो गई। ठीक उसी तरह का घटनाक्रम साढ़े चार साल पहले हुए डा. शैली चौहरा हत्याकांड में हुआ है। प्रदेश के चर्चित इस हत्या कांड में भी पुलिस रिकार्ड से घटनास्थल पर मिले संदिग्धों के फिंगर प्रिंट ही गायब हो गए हैं। ये जानबूझकर गायब किए गए हैं, या फिर वजह कोई और है ये तो जांच का विषय है लेकिन फिंगर प्रिंट गायब होने से डॉ शैली हत्याकांड की जांच पर सीधा असर पडे़गा और इसका फायदा कातिल को मिलना लाजिमी है।
डा. शैली की बेटी गुंजन अरोरा की याचिका पर इस मामले की सीबीआई जांच कराने के लिए सुनवाई हाईकोर्ट में चल रही है। जांच अधिकारी राजेश कुमार को हाईकोर्ट इलाहाबाद में तलब किया गया है। उनको छह मार्च को वहां पर खुद मौजूद रहना है, हाईकोर्ट में वह अब तक की गई जांच की रिपोर्ट के बारे में बताएंगे और रिपोर्ट सौपेंगे। जिसमें ये भी बताया जाएगा कि उन्होंने अब तक की गई जांच में क्या किया है और जांच कितनी आगे बढ़ी है। जांच अधिकारी राजेश कुमार ने बताया कि डॉ शैली हत्याकांड के मामले में घटनास्थल से जो फिंगर प्रिंट मिले थे। घर से लूटी गई कार के बरामद होने के बाद जो फिंगर प्रिंट लिए गए थे, वह भी जांच के लिए लखनऊ स्थित फिंगर प्रिंट ब्यूरो भेजे गए, वहां से जांच के बाद फिंगर प्रिंट की मूलप्रति को वापस मुरादाबाद एक पुलिसकर्मी के हाथों भेजा गया था लेकिन वह मुरादाबाद नहीं पहुंचे। इसका खुलासा उस वक्त हुआ जब पुलिस ने संदिग्धों के दोबारा फिंगर प्रिंट लिए। लेकिन जब उनको मिलाने के लिए घटनास्थल से लिए गए फिंगर प्रिंट की जरूरत पड़ी तो वह गायब मिले।
विज्ञापन



फिंगर प्रिंट लाने वाले पुलिसकर्मी की हो गई है मौत
मुरादाबाद। सीओ सिविल लाइंस राजेश कुमार सिंह ने बताया कि लखनऊ स्थित फिंगर प्रिंट ब्यूरो से जानकारी मांगी गई तो उन्होंने बताया कि सिपाही अशोक को वहां से फिंगर प्रिंट की मूल प्रति लेकर लखनऊ से मुरादाबाद भेजा गया था। ये उनके दस्तावेजों में अंकित है। लेकिन मुरादाबाद के सिविल लाइन थाने में फिंगर प्रिंट की मूल प्रति वापस आने का रिकॉर्ड नहीं है। ऐसे में जब लखनऊ से मुरादाबाद फिंगर प्रिंट की मूल प्रति वापस करने भेजे गए सिपाही के बारे में जानकारी का प्रयास किया गया तो पता चला कि सिपाही की मौत हो चुकी है।
विज्ञापन
विज्ञापन



संदिग्धों में करीबी से लेकर नौकर तक हैं शामिल
मुरादाबाद। सीओ सिविल लाइन रहे रईस अख्तर ने रिपोर्ट में कहा है कि जांच के दौरान उस वक्त फोरेंसिक टीम में शामिल रहे सदस्यों, जांच टीम में शामिल रहे पुलिस अधिकारियों से जानकारी ली गई। पुलिस की पहली विवेचना डॉ. शैली के करीबी पर केंद्रित थी। दोबारा जांच के दौरान डॉ. शैली की बेटी डॉ. गुंजन के बयान रुद्रपुर जाकर लिए गए। उन्होंने अंदेशा जताया है कि वारदात में नौकर शामिल हो सकते हैं। पुलिस ने पहली विवेचना के दौरान नौकरों से सख्ती से पूछताछ नहीं की, वरना यह मामला खुल सकता था। डॉ. गुंजन ने सीओ से मांग की है कि वह नौकरों के खिलाफ जांच करें, अंदेशा है कि वारदात में नौकर का हाथ है।
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें हर राज्य और शहर से जुड़ी क्राइम समाचार की
ब्रेकिंग अपडेट।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed