{"_id":"5bca4764bdec2269695d8e2e","slug":"201539983204-moradabad-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"नहीं जला रावण का पुतला","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
नहीं जला रावण का पुतला
Updated Sat, 20 Oct 2018 02:40 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मुरादाबाद।
बुराई के प्रतीक रावण का पुतला लाइनपार रामलीला मैदान में नहीं जल पाया। पुतला बनाने वाले कारीगर ने उसको अंदर से खोखला छोड़ दिया था, जिससे आग ऊपर की ओर नहीं बढ़ पाई। कमिश्नर, डीएम - एसएसपी और महापौर की मौजूदगी में पुतले को जलाने का आधा घंटे तक प्रयास किया जाता रहा, लेकिन नहीं जलाया जा सका। अंत में रावण के पुतले को यों ही जमीन पर गिरा दिया गया।
महानगर की सबसे बड़ी रामलीला का मंचन लाइनपार मैदान में किया जा रहा था। विजयदशमी पर रात सवा नौ बजे राम-रावण के भीषण युद्ध के बाद पुतला दहन किया जा रहा था। सीआरपीएफ और पुलिस ने पुतला वाले क्षेत्र को सुरक्षा घेरे में लिया और आग लगा दी। कारीगर ने पुतले को अंदर से खोखला छोड़ दिया था। पैरों के पास थोड़ी पुआल डाली गई थी। उससे रावण के पुतले का नीचे का आधा हिस्सा जल गया। टांगों से ऊपर की ओर आग बढ़ ही नहीं पाई। कमिश्नर अनिल राज कुमार, डीएम राकेश कुमार सिंह, एसएसपी जे. रविंद्र गौड़ और महापौर विनोद अग्रवाल ने रामलीला कमेटी के सदस्यों के साथ 10 मिनट पर इंतजार किया। उसके बाद कारीगरों ने पेट्रोल फेंक कर आग लगाने का प्रयास किया गया। उसके बाद पुतले के नीचे की ओर गोले छोड़े गए, उससे भी आग नहीं लगी। बाद में एक लंबे बास पर पुआल बांधकर पुतले को आग लगाने का प्रयास किया, लेकिन बांस बीच से टूट गया।
इस दौरान भीड़ ने हंगामा शुरू कर दिया। जमकर शोर होने लगा। मौके की नजाकत को देख अधिकारियों के निर्देश पर अधजले पुतले को रस्सी खोलकर जमीन पर गिरा दिया गया। उसमें काफी आतिशबाजी लगी हुई थी। उसके चलते फायर ब्रिगेड की गाड़ी से पुतले पर पानी डाला जाने लगा, इसी दौरान बेकाबू भीड़ टूट पड़ी और पुतले के बच हुए हिस्सों को नोंच-नोंचकर ले गई।
विज्ञापन
..
कई बच्चे हो गए घायल
रावण के जमीन पर गिरते ही अवशेष लेने को भगदड़ मच गई। एक साथ कई हजार लोगों के मैदान की ओर दौड़ने से कई बच्चे गिर गए। जिसकी वजह से आधा दर्जन बच्चे घायल हो गए। पुलिस की मदद से उनको निकाला गया। हालांकि किसी को अस्पताल ले जाने की जरूरत नहीं पड़ी।
...
ढाई लाख लोग रहे मौजूद
रामलीला का मंचन देखने के लिए दोपहर से ही भीड़ आनी शुरू हो गई थी। रात में करीब ढाई लाख लोग लाइनपार रामलीला मैदान में जमा थे। पुलिस ने बेरीकेडिंग कर व्यवस्था को बनाया गया था। भारी संख्या में पुलिस बल और सीआरपीएफ को मैदान में लगाया गया था।
...
आतिशबाजी से रोशन रहा मैदान
रामलीला मैदान में चारों ओर आतिशबाजी लगाई गई थी। मैदान पर मंचन के दौरान लगातार दो घंटे तक आतिशबाजी होती रही। लोगों ने तरह-तरह की आतिशबाजी का आनंद लिया। रावण वध होने ही मैदान पर लगाए गए बड़े-बड़े गोले छोड़े गए।
...
झांकियों ने मन मोहा
रामलीला मंचन के दौरान रामलीला पथ पर झांकियों का प्रदर्शन किया जाता रहा। भगवान राम के बाल्यकाल से लेकर राज्याभिषेक तक और श्री कृष्ण के जीवन से जुड़े प्रसंगों को झांकियों में दर्शाया गया था।
...
बैंड बाजों ने जीता मैदान
रामलीला मंचन के दौरान पांच बैंडबाजे मैदान पर थे। देशभक्ति और धार्मिक गीत - भजनों की धुन पर बैंड बाजे वालों ने लोगों का मन मोहा। बैंडों की धुन सुनने के लिए मैदान पर भीड़ खड़ी हो जाती थी।
...
मर्यादा पुरुषोत्तम ने नाभि पर वार कर किया धराशायी
रावण ने लक्ष्मण को किया धर्म और नीति का उपदेश
अमर उजाला ब्यूरो
मुरादाबाद। विजयादशमी पर रामलीला मंचन देखने के लिए दोपहर से ही लोगों की भीड़ लग गई। लाइनपार मैदान में साढ़े चार बजे से लोग दर्शक दीर्घा में अपनी जगह पर बैठ गए। पांच बजे से रामलीला का मंचन शुरू हुआ। लीला मंचन के दौरान मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम और रावण का भीषण युद्ध हुआ। अंत में विभीषण के कहने पर राम ने रावण की नाभि पर बाण से वार किया। उसके साथ ही दसकंधर धरा पर गिर गया। इस दौरान लोगों ने जय श्रीराम के नारे लगाए।
लाइनपार रामलीला मैदान में महानगर का सबसे बड़ा मंचन होता है। विजय दशमी पर सुबह से ही रामलीला मंचन की तैयारी शुरू हो गई थीं। लोगों ने दोपहर साढ़े चार बजे से ही दर्शक दीर्घा में अपनी जगह घेर ली थी। पांच बजे से राम-रावण युद्ध की लीला का मंचन हुआ। राम-रावण के बीच भीषण युद्ध हुआ। राम ने रावण के सभी दस सिर काट दिए, लेकिन वह दोबारा से निकल आए। इसी बीच विभीषण ने रावण की नाभि में अमृत होने की राज श्रीराम को बताया। इसकी जानकारी होते ही प्रभु श्री राम ने रावण के शीश काटने के साथ ही उसकी नाभि पर बाण से वार किया। उसी के साथ रावण का किरदार निभा रहा कलाकार जय श्रीराम के उदघोष के साथ जमीन पर गिर गया। इससे उत्साहित भीड़ ने जय श्रीराम के जोरदार नारे लगाए।
..
विज्ञापन
बुराई के प्रतीक रावण का पुतला लाइनपार रामलीला मैदान में नहीं जल पाया। पुतला बनाने वाले कारीगर ने उसको अंदर से खोखला छोड़ दिया था, जिससे आग ऊपर की ओर नहीं बढ़ पाई। कमिश्नर, डीएम - एसएसपी और महापौर की मौजूदगी में पुतले को जलाने का आधा घंटे तक प्रयास किया जाता रहा, लेकिन नहीं जलाया जा सका। अंत में रावण के पुतले को यों ही जमीन पर गिरा दिया गया।
महानगर की सबसे बड़ी रामलीला का मंचन लाइनपार मैदान में किया जा रहा था। विजयदशमी पर रात सवा नौ बजे राम-रावण के भीषण युद्ध के बाद पुतला दहन किया जा रहा था। सीआरपीएफ और पुलिस ने पुतला वाले क्षेत्र को सुरक्षा घेरे में लिया और आग लगा दी। कारीगर ने पुतले को अंदर से खोखला छोड़ दिया था। पैरों के पास थोड़ी पुआल डाली गई थी। उससे रावण के पुतले का नीचे का आधा हिस्सा जल गया। टांगों से ऊपर की ओर आग बढ़ ही नहीं पाई। कमिश्नर अनिल राज कुमार, डीएम राकेश कुमार सिंह, एसएसपी जे. रविंद्र गौड़ और महापौर विनोद अग्रवाल ने रामलीला कमेटी के सदस्यों के साथ 10 मिनट पर इंतजार किया। उसके बाद कारीगरों ने पेट्रोल फेंक कर आग लगाने का प्रयास किया गया। उसके बाद पुतले के नीचे की ओर गोले छोड़े गए, उससे भी आग नहीं लगी। बाद में एक लंबे बास पर पुआल बांधकर पुतले को आग लगाने का प्रयास किया, लेकिन बांस बीच से टूट गया।
विज्ञापन
इस दौरान भीड़ ने हंगामा शुरू कर दिया। जमकर शोर होने लगा। मौके की नजाकत को देख अधिकारियों के निर्देश पर अधजले पुतले को रस्सी खोलकर जमीन पर गिरा दिया गया। उसमें काफी आतिशबाजी लगी हुई थी। उसके चलते फायर ब्रिगेड की गाड़ी से पुतले पर पानी डाला जाने लगा, इसी दौरान बेकाबू भीड़ टूट पड़ी और पुतले के बच हुए हिस्सों को नोंच-नोंचकर ले गई।
विज्ञापन
..
कई बच्चे हो गए घायल
रावण के जमीन पर गिरते ही अवशेष लेने को भगदड़ मच गई। एक साथ कई हजार लोगों के मैदान की ओर दौड़ने से कई बच्चे गिर गए। जिसकी वजह से आधा दर्जन बच्चे घायल हो गए। पुलिस की मदद से उनको निकाला गया। हालांकि किसी को अस्पताल ले जाने की जरूरत नहीं पड़ी।
...
ढाई लाख लोग रहे मौजूद
रामलीला का मंचन देखने के लिए दोपहर से ही भीड़ आनी शुरू हो गई थी। रात में करीब ढाई लाख लोग लाइनपार रामलीला मैदान में जमा थे। पुलिस ने बेरीकेडिंग कर व्यवस्था को बनाया गया था। भारी संख्या में पुलिस बल और सीआरपीएफ को मैदान में लगाया गया था।
...
आतिशबाजी से रोशन रहा मैदान
रामलीला मैदान में चारों ओर आतिशबाजी लगाई गई थी। मैदान पर मंचन के दौरान लगातार दो घंटे तक आतिशबाजी होती रही। लोगों ने तरह-तरह की आतिशबाजी का आनंद लिया। रावण वध होने ही मैदान पर लगाए गए बड़े-बड़े गोले छोड़े गए।
...
झांकियों ने मन मोहा
रामलीला मंचन के दौरान रामलीला पथ पर झांकियों का प्रदर्शन किया जाता रहा। भगवान राम के बाल्यकाल से लेकर राज्याभिषेक तक और श्री कृष्ण के जीवन से जुड़े प्रसंगों को झांकियों में दर्शाया गया था।
...
बैंड बाजों ने जीता मैदान
रामलीला मंचन के दौरान पांच बैंडबाजे मैदान पर थे। देशभक्ति और धार्मिक गीत - भजनों की धुन पर बैंड बाजे वालों ने लोगों का मन मोहा। बैंडों की धुन सुनने के लिए मैदान पर भीड़ खड़ी हो जाती थी।
...
मर्यादा पुरुषोत्तम ने नाभि पर वार कर किया धराशायी
रावण ने लक्ष्मण को किया धर्म और नीति का उपदेश
अमर उजाला ब्यूरो
मुरादाबाद। विजयादशमी पर रामलीला मंचन देखने के लिए दोपहर से ही लोगों की भीड़ लग गई। लाइनपार मैदान में साढ़े चार बजे से लोग दर्शक दीर्घा में अपनी जगह पर बैठ गए। पांच बजे से रामलीला का मंचन शुरू हुआ। लीला मंचन के दौरान मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम और रावण का भीषण युद्ध हुआ। अंत में विभीषण के कहने पर राम ने रावण की नाभि पर बाण से वार किया। उसके साथ ही दसकंधर धरा पर गिर गया। इस दौरान लोगों ने जय श्रीराम के नारे लगाए।
लाइनपार रामलीला मैदान में महानगर का सबसे बड़ा मंचन होता है। विजय दशमी पर सुबह से ही रामलीला मंचन की तैयारी शुरू हो गई थीं। लोगों ने दोपहर साढ़े चार बजे से ही दर्शक दीर्घा में अपनी जगह घेर ली थी। पांच बजे से राम-रावण युद्ध की लीला का मंचन हुआ। राम-रावण के बीच भीषण युद्ध हुआ। राम ने रावण के सभी दस सिर काट दिए, लेकिन वह दोबारा से निकल आए। इसी बीच विभीषण ने रावण की नाभि में अमृत होने की राज श्रीराम को बताया। इसकी जानकारी होते ही प्रभु श्री राम ने रावण के शीश काटने के साथ ही उसकी नाभि पर बाण से वार किया। उसी के साथ रावण का किरदार निभा रहा कलाकार जय श्रीराम के उदघोष के साथ जमीन पर गिर गया। इससे उत्साहित भीड़ ने जय श्रीराम के जोरदार नारे लगाए।
..