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भूमि घोटाला: खुद को बचाने के लिए होटल संचालक को बचा रहे अफसर
अमर उजाला ब्यूरो, मुरादाबाद
Updated Sun, 14 Oct 2018 10:01 AM IST
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जेल भूमि घोटाले में कई मौजूदा और पूर्व अफसरों की गर्दनें फंसती नजर आ रही हैं। खुद को बचाने के लिए अफसरों ने जेल भूमि घोटाले के मुख्य आरोपियों को ही बचाने की कवायद शुरू कर दी है। विजिलेंस जांच में सुबूत सामने आने के बाद भी आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने में अफसर कतरा रहे हैं।
विजिलेंस जांच में उजागर हो चुका है कि शहर के एक होटल संचालक और जिले में तैनात एक पूर्व अफसर व कुछ अन्य अधिकारियों से मिलकर सरकारी खजाने को बड़ी चोट पहुंचाई। अफसरों ने होटल संचालक को सिरसखेड़ा में जेल भूमि प्रोजेक्ट के पास सस्ती दर पर भूमि खरीदवाई।
होटल संचालक के नाम जो भूमि खरीदी गई वह जेल प्रोजेक्ट से बाहर थी। इसलिए भूमि सस्ती दरों पर मिली। होटल संचालक द्वारा खरीदे जाने के चंद दिन बाद ही जिला प्रशासन ने इस भूमि को जेल प्रोजेक्ट के लिए राज्य सरकार के पक्ष में चार गुना दाम पर खरीद लिया। होटल संचालक से खरीदने के बाद जिला प्रशासन ने इस भूमि को जेल प्रोजेेक्ट के अंदर स्थित वक्फ की भूमि से एक्सचेंज कर दिया। जांच में खुलासा होने के बाद एडीएम प्रशासन लक्ष्मीशंकर सिंह ने आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने का दावा किया था।
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लेकिन दो महीनेे बाद भी आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं कराई गई है। एडीएम प्रशासन का कहना है कि जांच रिपोर्ट सौंपी जा चुकी है। मामले में आरोपियों पर कार्रवाई जरूर होगी। सूत्रों का कहना है कि जेल प्रोजेक्ट से बाहर होने के बावजूद होटल संचालक से भूमि खरीदने में कई अधिकारी फंसे हैं। यदि होटल संचालक पर कार्रवाई होती है तो एक्शन की तपिश अधिकारियों तक आना तय है। इसलिए अधिकारियों ने होटल संचालक पर कार्रवाई की फाइल ठंडे बस्ते में डाल दी है।
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विजिलेंस जांच में उजागर हो चुका है कि शहर के एक होटल संचालक और जिले में तैनात एक पूर्व अफसर व कुछ अन्य अधिकारियों से मिलकर सरकारी खजाने को बड़ी चोट पहुंचाई। अफसरों ने होटल संचालक को सिरसखेड़ा में जेल भूमि प्रोजेक्ट के पास सस्ती दर पर भूमि खरीदवाई।
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होटल संचालक के नाम जो भूमि खरीदी गई वह जेल प्रोजेक्ट से बाहर थी। इसलिए भूमि सस्ती दरों पर मिली। होटल संचालक द्वारा खरीदे जाने के चंद दिन बाद ही जिला प्रशासन ने इस भूमि को जेल प्रोजेक्ट के लिए राज्य सरकार के पक्ष में चार गुना दाम पर खरीद लिया। होटल संचालक से खरीदने के बाद जिला प्रशासन ने इस भूमि को जेल प्रोजेेक्ट के अंदर स्थित वक्फ की भूमि से एक्सचेंज कर दिया। जांच में खुलासा होने के बाद एडीएम प्रशासन लक्ष्मीशंकर सिंह ने आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने का दावा किया था।
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लेकिन दो महीनेे बाद भी आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं कराई गई है। एडीएम प्रशासन का कहना है कि जांच रिपोर्ट सौंपी जा चुकी है। मामले में आरोपियों पर कार्रवाई जरूर होगी। सूत्रों का कहना है कि जेल प्रोजेक्ट से बाहर होने के बावजूद होटल संचालक से भूमि खरीदने में कई अधिकारी फंसे हैं। यदि होटल संचालक पर कार्रवाई होती है तो एक्शन की तपिश अधिकारियों तक आना तय है। इसलिए अधिकारियों ने होटल संचालक पर कार्रवाई की फाइल ठंडे बस्ते में डाल दी है।