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त्योहार पर मां ने रुपये देने से इंकार किया तो युवक ने लगाई फांसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुरादाबाद
Updated Wed, 07 Nov 2018 01:41 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
धनतेरस पर कुछ खरीदने के लिए बीए उत्तीर्ण कर चुके बेटे ने मां से रुपये मांगे, लेकिन मां ने इनकार कर दिया। यह बात बेटे को नागवार गुजरी। क्षुब्ध बेटे ने रात को ही किसी समय अपने कमरे में रस्सी का फंदा बनाकर लटककर आत्महत्या कर ली। छोटी दिवाली की सुबह देखा गया तो घर में कोहराम मच गया। परिजनों ने बिना पुलिस को बताए ही उसका अंतिम संस्कार कर दिया। इसके साथ ही इस परिवार का इकलौता दीपक बुझ गया।
शहर से सटे गांव मौलागढ़ निवासी दिनेश कुमार ने बताया कि अमित कुमार उर्फ कल्लू ठाकुर (28) पुत्र स्वर्गीय पहलवान सिंह ने धनतेरस की शाम किसी काम के लिए अपनी मां से रुपये मांगे थे। मां के इनकार करने पर अमित चुप होकर लेट गया। रातभर किसी ने उस पर ध्यान नहीं दिया। छोटी दिवाली की सुबह उसकी विधवा मां कुसुमलता भैंस के लिए भूसा लेने घेर में गई तो पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई, उसके इकलौते पुत्र अमित का शव रस्से से बने फंदे पर लटका हुआ था।
चीख पुुकार सुनकर मोहल्ले के तमाम लोग इकट्ठे हो गए। अमित शादीशुदा था, उसकी पत्नी व दो बच्चे भी हैं। सभी का रोते रोते बुरा हाल हो गया। पत्नी रत्ना व मां बार बार बेहोश होने लगी। अपराह्न करीब तीन पुलिस को बिना सूचना दिए उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया। प्रभारी निरीक्षक रविंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि मामला उनके संज्ञान में नहीं है।
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शहर से सटे गांव मौलागढ़ निवासी दिनेश कुमार ने बताया कि अमित कुमार उर्फ कल्लू ठाकुर (28) पुत्र स्वर्गीय पहलवान सिंह ने धनतेरस की शाम किसी काम के लिए अपनी मां से रुपये मांगे थे। मां के इनकार करने पर अमित चुप होकर लेट गया। रातभर किसी ने उस पर ध्यान नहीं दिया। छोटी दिवाली की सुबह उसकी विधवा मां कुसुमलता भैंस के लिए भूसा लेने घेर में गई तो पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई, उसके इकलौते पुत्र अमित का शव रस्से से बने फंदे पर लटका हुआ था।
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चीख पुुकार सुनकर मोहल्ले के तमाम लोग इकट्ठे हो गए। अमित शादीशुदा था, उसकी पत्नी व दो बच्चे भी हैं। सभी का रोते रोते बुरा हाल हो गया। पत्नी रत्ना व मां बार बार बेहोश होने लगी। अपराह्न करीब तीन पुलिस को बिना सूचना दिए उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया। प्रभारी निरीक्षक रविंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि मामला उनके संज्ञान में नहीं है।
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छोटी दिवाली के दिन बुझ गया घर का चिराग
एक तरफ तो छोटी दिवाली को लोग अपने घरों में दीपक जलाने की तैयारी कर रहे थे वहीं दूसरी विधवा कुसुमलता के घर का दीपक हमेशा के लिए बुझ गया। मौलागढ़ निवासी कुसुमलता के पति की मृत्यु तो काफी पहले ही हो चुकी थी, उसने अपने इकलौते बेेटे अमित को पढ़ाया लिखा, अपनी दुनिया के सहारे रोशन करनी योजना बनाकर आगे बढ़ती रही।
अमित ने इसी साल बीए फाइनल की परीक्षा दी, लेकिन इकलौता होने के कारण अमित काफी जिद्दी स्वभाव हो गया था। घर में अकेलापन महसूस न हो तो बेटे की शादी कर दी, जिसके दो बच्चे भी हो गए। कुसुमलता का घर संसार अच्छा चलने लगा लेकिन छोटी सी बात पर उसके बेटे ने आत्महत्या करके उसके सपनों को उजाड़ दिया।
अमित ने इसी साल बीए फाइनल की परीक्षा दी, लेकिन इकलौता होने के कारण अमित काफी जिद्दी स्वभाव हो गया था। घर में अकेलापन महसूस न हो तो बेटे की शादी कर दी, जिसके दो बच्चे भी हो गए। कुसुमलता का घर संसार अच्छा चलने लगा लेकिन छोटी सी बात पर उसके बेटे ने आत्महत्या करके उसके सपनों को उजाड़ दिया।