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खामियां मिली और 40 फाइलें सील
Updated Mon, 25 Jun 2018 02:04 AM IST
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मुरादाबाद।
बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षकों की नियुक्ति एवं पदोन्नति मामले में मुरादाबाद में भी कई अधिकारियों पर गाज गिरनी तय है। प्रारंभिक जांच में कई गंभीर अनियमितताएं उजागर हुई हैं। जांच अधिकारी एसडीएम ठाकुरद्वारा ने नियुक्ति एवं पदोन्नति से संबंधित 40 से अधिक फाइलें सील कर दी हैं। इससे विभाग में खलबली मची है।
वर्ष 2015 और 2016 में उत्तर प्रदेश में बेसिक शिक्षा विभाग में 15 हजार शिक्षकों की नियुक्तियां हुई थी। मथुरा और मुरादाबाद समेत कई जिलों में शिक्षकों की नियुक्तियों में गड़बड़ी के आरोप लगे थे। मथुरा में भर्ती मामले में बड़ी कार्रवाई की गई है। तत्कालीन बीएसए के निलंबन के साथ कई शिक्षकों के खिलाफ मुकदमे दर्ज हुए हैं। मुरादाबाद जिले में हुई नियुक्तियों में भी गड़बड़ी के आरोप में तत्कालीन बीएसए मुन्ने अली निलंबित हैं और मुख्यालय से अटैच है। मथुरा की कार्रवाई के बाद शासन ने सभी जिलों में 2015-2016 के दौरान हुई शिक्षक भर्ती की जांच के आदेश दिए हैं।
मुरादाबाद में इसकी जांच ठाकुरद्वारा के एसडीएम शैलेंद्र कुमार को सौंपी गई है। शैलेंद्र कुमार ने शनिवार को बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय पहुंचकर शिक्षकों की नियुक्ति एवं पदोन्नति से संबंधित रिकार्ड तलब किया। सूत्रों के मुताबिक दो सालों में 350 शिक्षकों की नियुक्तियां हुई हैं। कई अपात्र शिक्षकों का भी चयन हुआ है। मसलन, 50 साल से अधिक उम्र के लोगों की भी नियुक्ति दी गई हैं। ये नियुक्तियां तत्कालीन मुन्ने अली और कांता प्रसाद के कार्यकाल में हुई हैं। सूत्रों के मुताबिक मुन्ने अली के अलावा कांता प्रसाद का कार्यकाल भी विवादित रहा। तत्कालीन एडी बेसिक ने कई विवादित मामलों की जांच कर रिपोर्ट शासन को भेजी थी। लेकिन इसमें आगे कोई कार्रवाई नहीं हो सकी।
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एसडीएम ने शनिवार रात साढ़े दस बजे तक शिक्षकों के नियुक्त संबंधी दस्तावेजों जांच की और तत्कालीन बीएसए कार्यालय में तैनात कर्मचारियों से पूछताछ की। जांच में 40 से अधिक फाइलों में अनियमितताएं मिलने पर उन्हें सील कर दिया गया। सील दस्तावेजों को सुरक्षित रखा गया है। एसडीएम की ओर से जांच रिपोर्ट डीएम के माध्यम से शासन को भेजी जाएगी। सूत्रों के मुताबिक भर्ती मामले में घोटाले की पुष्टि होने पर शिक्षकों की बर्खास्तगी के साथ रिकवरी हो सकती है। इसमें कई शिक्षा अधिकारियों पर गाज गिर सकती है।
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बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षकों की नियुक्ति एवं पदोन्नति मामले में मुरादाबाद में भी कई अधिकारियों पर गाज गिरनी तय है। प्रारंभिक जांच में कई गंभीर अनियमितताएं उजागर हुई हैं। जांच अधिकारी एसडीएम ठाकुरद्वारा ने नियुक्ति एवं पदोन्नति से संबंधित 40 से अधिक फाइलें सील कर दी हैं। इससे विभाग में खलबली मची है।
वर्ष 2015 और 2016 में उत्तर प्रदेश में बेसिक शिक्षा विभाग में 15 हजार शिक्षकों की नियुक्तियां हुई थी। मथुरा और मुरादाबाद समेत कई जिलों में शिक्षकों की नियुक्तियों में गड़बड़ी के आरोप लगे थे। मथुरा में भर्ती मामले में बड़ी कार्रवाई की गई है। तत्कालीन बीएसए के निलंबन के साथ कई शिक्षकों के खिलाफ मुकदमे दर्ज हुए हैं। मुरादाबाद जिले में हुई नियुक्तियों में भी गड़बड़ी के आरोप में तत्कालीन बीएसए मुन्ने अली निलंबित हैं और मुख्यालय से अटैच है। मथुरा की कार्रवाई के बाद शासन ने सभी जिलों में 2015-2016 के दौरान हुई शिक्षक भर्ती की जांच के आदेश दिए हैं।
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मुरादाबाद में इसकी जांच ठाकुरद्वारा के एसडीएम शैलेंद्र कुमार को सौंपी गई है। शैलेंद्र कुमार ने शनिवार को बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय पहुंचकर शिक्षकों की नियुक्ति एवं पदोन्नति से संबंधित रिकार्ड तलब किया। सूत्रों के मुताबिक दो सालों में 350 शिक्षकों की नियुक्तियां हुई हैं। कई अपात्र शिक्षकों का भी चयन हुआ है। मसलन, 50 साल से अधिक उम्र के लोगों की भी नियुक्ति दी गई हैं। ये नियुक्तियां तत्कालीन मुन्ने अली और कांता प्रसाद के कार्यकाल में हुई हैं। सूत्रों के मुताबिक मुन्ने अली के अलावा कांता प्रसाद का कार्यकाल भी विवादित रहा। तत्कालीन एडी बेसिक ने कई विवादित मामलों की जांच कर रिपोर्ट शासन को भेजी थी। लेकिन इसमें आगे कोई कार्रवाई नहीं हो सकी।
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एसडीएम ने शनिवार रात साढ़े दस बजे तक शिक्षकों के नियुक्त संबंधी दस्तावेजों जांच की और तत्कालीन बीएसए कार्यालय में तैनात कर्मचारियों से पूछताछ की। जांच में 40 से अधिक फाइलों में अनियमितताएं मिलने पर उन्हें सील कर दिया गया। सील दस्तावेजों को सुरक्षित रखा गया है। एसडीएम की ओर से जांच रिपोर्ट डीएम के माध्यम से शासन को भेजी जाएगी। सूत्रों के मुताबिक भर्ती मामले में घोटाले की पुष्टि होने पर शिक्षकों की बर्खास्तगी के साथ रिकवरी हो सकती है। इसमें कई शिक्षा अधिकारियों पर गाज गिर सकती है।