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सोनकपुर ओवरब्रिज निर्माण को क्रेन का झटका, दो माह और लगेंगे
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मुरादाबाद। सोनकपुर ओवरब्रिज निर्माण को लेकर जनता की उम्मीदों को एक बार फिर झटका लगा है। मुरादाबाद-सहारनपुर रेल लाइन वाली साइट पर रास्ता संकरा होने के कारण क्रेन नहीं पहुंच पा रही है। इसके कारण गर्डर लांचिग में परेशानी आ रही है। जो निर्माण कार्य 10 दिन में होना था, उसमें अब दो माह लगेंगे।
पांच वर्षों से निर्माणाधीन सोनकपुर ओवरब्रिज को तैयार करने को लेकर रेलवे कई बार खोखले दावे कर चुका है। वर्ष 2018 में इस पुल का निर्माण शुरू हुआ था। नवंबर 2019 तक निर्माण पूरा करने का दावा किया गया था। इसके बाद यह दावा जून 2020, नवंबर 2020, अप्रैल 2021, दिसंबर 2021, फरवरी 2022 और 31 मार्च 2022 तक तिथिवार बढ़ता चला गया। लेकिन धरातल पर आज तक पूरा नहीं हो सका। पहले काम के प्रति रेलवे की लापरवाही इसकी वजह बनी थी। वहीं अब रेलवे के ही इंजीनियरिंग विभाग की अदूरदर्शिता के कारण पुल निर्माण में देरी हो रही है। मुरादाबाद-सहारनपुर रेल लाइन की साइट पर पिछले पांच वर्षों में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है। ऐसे में रेलवे को पहले ही क्रेन लाने व ले जाने के विषय में सोचना चाहिए था। उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक आशुतोष गंगल भी तीन बार इस पुल का निरीक्षण कर जल्द काम पूरा करने के निर्देश दे चुके हैं। इसके बावजूद काम में देरी हो रही है। ज्ञात हो कि इस पुल के बनने के बाद दिल्ली से मुरादाबाद होकर देहरादून, बिजनौर जाने वाली बसों, भारी वाहनों का शहर में प्रवेश बंद हो जाएगा। इससे शहर में जाम की समस्या से काफी हद तक राहत मिलेगी। रेलवे के सीनियर डीसीएम सुधीर सिंह ने बताया कि गर्डर लांचिंग में अब अतिरिक्त मेहनत और कर्मचारी लगेंगे। इसके लिए अगले माह ट्रैफिक ब्लॉक लिया जा सकता है।
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पांच वर्षों से निर्माणाधीन सोनकपुर ओवरब्रिज को तैयार करने को लेकर रेलवे कई बार खोखले दावे कर चुका है। वर्ष 2018 में इस पुल का निर्माण शुरू हुआ था। नवंबर 2019 तक निर्माण पूरा करने का दावा किया गया था। इसके बाद यह दावा जून 2020, नवंबर 2020, अप्रैल 2021, दिसंबर 2021, फरवरी 2022 और 31 मार्च 2022 तक तिथिवार बढ़ता चला गया। लेकिन धरातल पर आज तक पूरा नहीं हो सका। पहले काम के प्रति रेलवे की लापरवाही इसकी वजह बनी थी। वहीं अब रेलवे के ही इंजीनियरिंग विभाग की अदूरदर्शिता के कारण पुल निर्माण में देरी हो रही है। मुरादाबाद-सहारनपुर रेल लाइन की साइट पर पिछले पांच वर्षों में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है। ऐसे में रेलवे को पहले ही क्रेन लाने व ले जाने के विषय में सोचना चाहिए था। उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक आशुतोष गंगल भी तीन बार इस पुल का निरीक्षण कर जल्द काम पूरा करने के निर्देश दे चुके हैं। इसके बावजूद काम में देरी हो रही है। ज्ञात हो कि इस पुल के बनने के बाद दिल्ली से मुरादाबाद होकर देहरादून, बिजनौर जाने वाली बसों, भारी वाहनों का शहर में प्रवेश बंद हो जाएगा। इससे शहर में जाम की समस्या से काफी हद तक राहत मिलेगी। रेलवे के सीनियर डीसीएम सुधीर सिंह ने बताया कि गर्डर लांचिंग में अब अतिरिक्त मेहनत और कर्मचारी लगेंगे। इसके लिए अगले माह ट्रैफिक ब्लॉक लिया जा सकता है।
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