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चीन का विरोध, देश भक्ति की लहर से आगे बढ़ी स्वदेशी
ब्यूरो/अमर उजाला/मुरादाबाद
Updated Mon, 24 Oct 2016 01:53 AM IST
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chinese goods
- फोटो : chinese goods
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देश भर में चाइनीज सामानों का विरोध बढ़ रहा है। चीनी सामान की खरीद को सीधे सीधे देश की अस्मिता से जोड़ा जा रहा है तो स्वदेशी की लहर मजबूत हो रही है। हर जरूरत का सामान चीन से आता है, लेकिन दिवाली जैसे त्योहार पर इसकी ब्रिकी जबरदस्त हो जाती है।
विरोध के चलते उसकी बिक्री गिरी है तो भारत में निर्मित सामानों की डिमांड बढ़ने लगी है। वहीं लाइटिंग के आइटम में लोग चाइनीज झालर का विकल्प तलाश रहे हैं। ऐसे में मिट्टी के दीपक बनाने वालों की चांदी होगी। उनके पास डिमांड बढ़ी है जिसके चलते वे दिन राम काम कर रहे हैं।
महानगर में मिट्टी के दीये व अन्य सामग्री बनाने वालों ने बताया कि अगर लोग चाइनीज दीये नहीं खरीदेंगे तो दीपावली पर उनका कारोबार अच्छा चलेगा। बल्कि विरोध के कारण अभी से ही कुम्हारों के सामान की डिमांड बढ़ने लगी है। पिछले पंद्रह दिनों में उनकी मांग पंद्रह से बीस प्रतिशत तक बढ़ गई है।
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लोग मिट्टी के दीये खरीद रहे हैं। दीपावली पर मिट्टी से बनी सामग्री बेचने वालों ने कुम्हारों से डिमांड पर दीये, पुरवे, चिराग, गमले, गुल्लक, सकोरे, चौमक, सैनक, चौकड़ा समेत कई आइटम बनवाने शुरू कर दिए हैं।
ऐसे में मिट्टी के दिये व अन्य चीजें बनाने वालों के चेहरे खिले हुए हैं। चाइनीज आइटमों ने उनका कारोबार समाप्त कर दिया था। लोग दीपावली पर परंपरा के लिए थोड़े से दिये खरीदते थे। लेकिन अब मिट्टी के दिए के कारोबारियों में नई उम्मीद जगी है।
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विरोध के चलते उसकी बिक्री गिरी है तो भारत में निर्मित सामानों की डिमांड बढ़ने लगी है। वहीं लाइटिंग के आइटम में लोग चाइनीज झालर का विकल्प तलाश रहे हैं। ऐसे में मिट्टी के दीपक बनाने वालों की चांदी होगी। उनके पास डिमांड बढ़ी है जिसके चलते वे दिन राम काम कर रहे हैं।
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महानगर में मिट्टी के दीये व अन्य सामग्री बनाने वालों ने बताया कि अगर लोग चाइनीज दीये नहीं खरीदेंगे तो दीपावली पर उनका कारोबार अच्छा चलेगा। बल्कि विरोध के कारण अभी से ही कुम्हारों के सामान की डिमांड बढ़ने लगी है। पिछले पंद्रह दिनों में उनकी मांग पंद्रह से बीस प्रतिशत तक बढ़ गई है।
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लोग मिट्टी के दीये खरीद रहे हैं। दीपावली पर मिट्टी से बनी सामग्री बेचने वालों ने कुम्हारों से डिमांड पर दीये, पुरवे, चिराग, गमले, गुल्लक, सकोरे, चौमक, सैनक, चौकड़ा समेत कई आइटम बनवाने शुरू कर दिए हैं।
ऐसे में मिट्टी के दिये व अन्य चीजें बनाने वालों के चेहरे खिले हुए हैं। चाइनीज आइटमों ने उनका कारोबार समाप्त कर दिया था। लोग दीपावली पर परंपरा के लिए थोड़े से दिये खरीदते थे। लेकिन अब मिट्टी के दिए के कारोबारियों में नई उम्मीद जगी है।