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रातों रात लखपति हुए गरीब, जनधन खातों में पहुंचे लाखों
ब्यूराे/अमर उजाला मुरादाबाद
Updated Tue, 15 Nov 2016 01:13 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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दो साल से चवन्नी को तरस रहे जनधन योजना के बैंक खातों में अचानक 2.5-2.5 लाख रुपये जमा होने लगे हैं। दिनरात हाड़ धुनकर बमुश्किल परिवार का पेट पालने वाले मजदूर रातोंरात अचानक लखपति बन गए हैं। बैंकों में तेजी से जनधन खातों में आ रहे लाखों रुपयों से सरकार भी अंजान नहीं है। आईबी ने इन अकाउंट्स पर नजरें गड़ा दी हैं। छानबीन में उजागर हो रहा है कि फैक्ट्री - कारखाना मालिक अपनी फैक्ट्रियों में काम कर रहे मजदूरों के बैंक खातों का इस्तेमाल कर अपनी ब्लैक मनी को व्हाइट कर रहे हैं।
केंद्र में मोदी सरकार बनने के बाद जनधन योजना के तहत देश भर में 21 करोड़ से ज्यादा खाते खोले गए थे। जबकि उत्तर प्रदेश में मुरादाबाद पहला जिला बना जहां इस योजना में सबसे ज्यादा 4 लाख से अधिक एकाउंट खुले थे। देश में मुरादाबाद दूसरे नाम पर रहा। आजमगढ़ इन आकंड़े में तीसरे नंबर पर है। इन खातों को खुलवाने के बाद धाताधारक भी भूल गए कि उनका अकाउंट भी किसी बैंक में खुला है। अधिकांश अकाउंट ऐसे हैं। जिनमें पिछले एक साल से एक पैसा तक जमा नहीं किया गया। लेकिन नोट बंदी के बाद इन बैंक खातों में पैसे बरसने लगे हैं।
गरीबों के खातों में लाखों रुपये पहुंचने शुरू हुए तो वित्त मंत्रालय का बजर बजना लाजिमी था। बात पीएमओ तक पहुंची और सरकार ने अपनी एजेंसियों के जरिए जनधन योजना के खातों पर नजरें गड़ा दी हैं। दिल्ली में आईबी की हाई लेवल मीटिंग में सभी यूनिट्स को निर्देश दिए गए हैं कि जनधन योजना के खातों में डाले और निकाले जा रहे लाखों रुपये पर खास नजर रखें। शुरुआती पड़ताल में इतना साफ हो चुका है कि जनधन योजना के तहत खाते खुलवाने वालों में ज्यादातर मजदूर तबके के लोग थे, जो फैक्ट्री - कारखानों में मजदूरी करते हैं। फैक्ट्री - कारखाना मालिक ही इन खातों का इस्तेमाल करके अब अपने काले धन को सफेद कर रहे हैं। मजदूर के खाते में रकम डलवाने से पहले ही चेक पर उसका साइन या अंगूठा ले लिया जा रहा है।
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खाता धारकों से भी की जा सकती है पूछताछ
मुरादाबाद। जनधन योजना में एकाउंट खुलवाते समय धाता धारकों ने अपनी मासिक और वार्षिक आय की जानकारी भी दी थी। अगर इन अकाउंटों में रकम आई तो आईबी के अलावा दूसरी खुफिया एजेसिंयां भी खाताधारकों से पूछताछ कर सकती हैं। सबसे ज्यादा अकाउंट मुरादाबाद में खोले गए थे। लिहाजा आईबी की नजर मुरादाबाद पर सबसे ज्यादा है। स्थानीय टीम को सक्रिय करने के साथ ही दिल्ली की टीम भी मुरादाबाद में लग दी गई है।
केंद्र में मोदी सरकार बनने के बाद जनधन योजना के तहत देश भर में 21 करोड़ से ज्यादा खाते खोले गए थे। जबकि उत्तर प्रदेश में मुरादाबाद पहला जिला बना जहां इस योजना में सबसे ज्यादा 4 लाख से अधिक एकाउंट खुले थे। देश में मुरादाबाद दूसरे नाम पर रहा। आजमगढ़ इन आकंड़े में तीसरे नंबर पर है। इन खातों को खुलवाने के बाद धाताधारक भी भूल गए कि उनका अकाउंट भी किसी बैंक में खुला है। अधिकांश अकाउंट ऐसे हैं। जिनमें पिछले एक साल से एक पैसा तक जमा नहीं किया गया। लेकिन नोट बंदी के बाद इन बैंक खातों में पैसे बरसने लगे हैं।
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गरीबों के खातों में लाखों रुपये पहुंचने शुरू हुए तो वित्त मंत्रालय का बजर बजना लाजिमी था। बात पीएमओ तक पहुंची और सरकार ने अपनी एजेंसियों के जरिए जनधन योजना के खातों पर नजरें गड़ा दी हैं। दिल्ली में आईबी की हाई लेवल मीटिंग में सभी यूनिट्स को निर्देश दिए गए हैं कि जनधन योजना के खातों में डाले और निकाले जा रहे लाखों रुपये पर खास नजर रखें। शुरुआती पड़ताल में इतना साफ हो चुका है कि जनधन योजना के तहत खाते खुलवाने वालों में ज्यादातर मजदूर तबके के लोग थे, जो फैक्ट्री - कारखानों में मजदूरी करते हैं। फैक्ट्री - कारखाना मालिक ही इन खातों का इस्तेमाल करके अब अपने काले धन को सफेद कर रहे हैं। मजदूर के खाते में रकम डलवाने से पहले ही चेक पर उसका साइन या अंगूठा ले लिया जा रहा है।
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खाता धारकों से भी की जा सकती है पूछताछ
मुरादाबाद। जनधन योजना में एकाउंट खुलवाते समय धाता धारकों ने अपनी मासिक और वार्षिक आय की जानकारी भी दी थी। अगर इन अकाउंटों में रकम आई तो आईबी के अलावा दूसरी खुफिया एजेसिंयां भी खाताधारकों से पूछताछ कर सकती हैं। सबसे ज्यादा अकाउंट मुरादाबाद में खोले गए थे। लिहाजा आईबी की नजर मुरादाबाद पर सबसे ज्यादा है। स्थानीय टीम को सक्रिय करने के साथ ही दिल्ली की टीम भी मुरादाबाद में लग दी गई है।