{"_id":"57bbf54a4f1c1b2926d4f627","slug":"case-of-bus-stand-land","type":"story","status":"publish","title_hn":"बस अड्डे की जमीन को लेकर डीएम - वीसी आमने - सामने","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बस अड्डे की जमीन को लेकर डीएम - वीसी आमने - सामने
ब्यूरो/अमर उजाला/मुरादाबाद
Updated Tue, 23 Aug 2016 12:33 PM IST
विज्ञापन
विवाद
- फोटो : demo
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
प्राधिकरण की ट्रांसपोर्ट नगर योजना में स्थित बस अड्डे की जमीन को लेकर डीएम और वीसी एमडीए खुलकर आमने - सामने आ गए हैं। कोर्ट के आदेश के हवाले से डीएम का दावा है कि जमीन प्राधिकरण की नहीं बल्कि किसान की है। कोर्ट के आदेश हैं, लिहाजा किसान जमीन पर कब्जा कर रहा है। उधर, वीसी ने दो टूक कहना है कि जमीन एमडीए की है, जो बाउंड्री बनाई जा रही है उसे तुड़वा दिया जाएगा।
एमडीए की ट्रांसपोर्ट योजना में बस टर्मिनल के लिए करीब 1540 वर्ग मीटर जमीन आरक्षित है। एमडीए अधिकारियों का कहना है कि इस जमीन का अधिग्रहण एमडीए ने दो दशक पहले धीमरी निवासी किसान असगर अली से किया था। उसे पूरी रकम भी चुका दी गई थी। लेकिन असगर अली की मौत के बाद उसकी बेटियों गुलशन और चांदनी ने जमीन पर मालिकाना हक जताते हुए कोर्ट में मुकदमेबाजी शुरू कर दी।
कहने को तो मुकदमा दोनों बहनों के नाम से चलता रहा लेकिन जमीन करोड़ों रुपये की थी लिहाजा पर्दे के पीछे से ‘नेता गैंग’ हरकत में आ गया। कई बार इस जमीन पर कब्जे की कोशिशें हुईं लेकिन एमडीए हर बार निर्माण रुकवाता रहा। लेकिन पिछले सप्ताह ‘नेता गैंग’ ने जमीन पर कब्जा कर बाउंड्री बनानी शुरू कर दी। जिस पर एमडीए ने ऐतराज जताया। हालांकि प्राधिकरण के एतराज के बाद डीएम ने सिटी मजिस्ट्रेट और सीओ को जांच सौंपते हुए फिलहाल काम रोकने के आदेश कर दिए हैं। लेकिन इस जमीन को लेकर डीएम और वीसी की राय एक - दूसरे के ठीक विपरीत है। डीएम कोर्ट के आदेश का हवाला देकर जमीन को किसान की बेटियों का बता रहे हैं तो वीसी का कहना है कि जमीन प्राधिकरण की है और कब्जा भी इतने सालों से एमडीए का ही है। एमडीए ने इस मामले में हाईकोर्ट में रिट भी दाखिल कर दी है।
विज्ञापन
ट्रांसपोर्ट नगर में जिस जमीन पर प्राधिकरण द्वारा बस टर्मिनल प्रस्तावित है, उसे लेकर गुलशन और चांदनी नाम की दो बहनों ने कोर्ट में केस किया था। पहले लोअर और फिर स्पेशल कोर्ट से दोनों बहनें केस जीत गई हैं और प्राधिकरण हार चुका है। कोर्ट ने दोनों बहनों को कब्जा दिलाने के स्पष्ट आदेश दिए हैं। कोर्ट के आदेश से स्पष्ट है कि जमीन एमडीए की नहीं बल्कि दोनों बहनों की है। फिर भी हमने जांच बैठा दी है। अवैध कब्जे कहीं नहीं होने दिए जाएंगे, कोर्ट के आदेश और साक्ष्यों के आधार पर ही कार्रवाई होगी। - जुहैर बिन सगीर, डीएम।
ट्रांसपोर्ट नगर में बस टर्मिनल की जमीन एमडीए की है। किसी के बाउंड्री बना लेने से जमीन उसकी नहीं हो जाएगी। इस बाउंड्री को तुड़वा दिया जाएगा। एमडीए की एक इंच जमीन पर भी कब्जा नहीं होने देंगे, चाहें जिस भी लेवल तक जाना पड़े। सीलिंग की व एमडीए द्वारा अधिग्रहीत की गई जिन जमीनों पर फिलहाल कब्जे हो रहे हैं, उनके खिलाफ हाईकोर्ट में रिट कर दी गई हैं। एमडीए की जमीन पर किसी अन्य को कब्जा देने संबंधी सभी आदेशों को हम फाइलें निकलवाकर रिजेक्ट कर देंगे। - राजेश यादव, वीसी, एमडीए।
शासन तक पहुंची दो आईएएस अफसरों की तकरार
मुरादाबाद (ब्यूरो)। जमीन के मामलों को लेकर डीएम और वीसी के बीच पनपी तल्खी शासन तक पहुंच चुकी है। शासन ने अपने स्तर से प्रकरण की मानीटरिंग शुरू कर दी है। बस अड्डे की जमीन पर अपने ही दो आला अफसरों के विरोधाभासी स्टैंड से लखनऊ में बैठे आला अफसर भी सकते में हैं। सूत्रों का कहना है कि इस मामले में जल्द शासन स्तर से कोई कदम उठाया जा सकता है।
तहसीलदार को भरी मीटिंग पड़ी फटकार
ट्रांसपोर्ट नगर में प्राधिकरण के स्वामित्व वाली बस अड्डे की जमीन को लेकर उठे विवाद के बाद कमिश्नर एल वेंक्टेश्वर लू ने भी एक दिन पहले एक बैठक बुलाई। इसमें प्रशासनिक अफसरों के साथ ही प्राधिकरण के अफसरों को भी बुलाया गया था। मीटिंग में तहसीलदार को जमकर फटकार पड़ी। एमडीए की जमीन पर कब्जे के दौरान तहसीलदार मौके पर मौजूद थे। कमिश्नर ने तहसीलदार को हिदायत दी कि सरकारी जमीनों पर कब्जे कराने के बजाए गांव - गांव जाकर लोगों की समस्याएं सुनें और उनका निराकरण कराएं। प्राधिकरण अफसरों ने भी आला अफसरों से शिकायत की है कि तहसीलदार ने एमडीए की जमीन पर खड़े होकर कब्जा कराया।
विज्ञापन
एमडीए की ट्रांसपोर्ट योजना में बस टर्मिनल के लिए करीब 1540 वर्ग मीटर जमीन आरक्षित है। एमडीए अधिकारियों का कहना है कि इस जमीन का अधिग्रहण एमडीए ने दो दशक पहले धीमरी निवासी किसान असगर अली से किया था। उसे पूरी रकम भी चुका दी गई थी। लेकिन असगर अली की मौत के बाद उसकी बेटियों गुलशन और चांदनी ने जमीन पर मालिकाना हक जताते हुए कोर्ट में मुकदमेबाजी शुरू कर दी।
विज्ञापन
कहने को तो मुकदमा दोनों बहनों के नाम से चलता रहा लेकिन जमीन करोड़ों रुपये की थी लिहाजा पर्दे के पीछे से ‘नेता गैंग’ हरकत में आ गया। कई बार इस जमीन पर कब्जे की कोशिशें हुईं लेकिन एमडीए हर बार निर्माण रुकवाता रहा। लेकिन पिछले सप्ताह ‘नेता गैंग’ ने जमीन पर कब्जा कर बाउंड्री बनानी शुरू कर दी। जिस पर एमडीए ने ऐतराज जताया। हालांकि प्राधिकरण के एतराज के बाद डीएम ने सिटी मजिस्ट्रेट और सीओ को जांच सौंपते हुए फिलहाल काम रोकने के आदेश कर दिए हैं। लेकिन इस जमीन को लेकर डीएम और वीसी की राय एक - दूसरे के ठीक विपरीत है। डीएम कोर्ट के आदेश का हवाला देकर जमीन को किसान की बेटियों का बता रहे हैं तो वीसी का कहना है कि जमीन प्राधिकरण की है और कब्जा भी इतने सालों से एमडीए का ही है। एमडीए ने इस मामले में हाईकोर्ट में रिट भी दाखिल कर दी है।
विज्ञापन
ट्रांसपोर्ट नगर में जिस जमीन पर प्राधिकरण द्वारा बस टर्मिनल प्रस्तावित है, उसे लेकर गुलशन और चांदनी नाम की दो बहनों ने कोर्ट में केस किया था। पहले लोअर और फिर स्पेशल कोर्ट से दोनों बहनें केस जीत गई हैं और प्राधिकरण हार चुका है। कोर्ट ने दोनों बहनों को कब्जा दिलाने के स्पष्ट आदेश दिए हैं। कोर्ट के आदेश से स्पष्ट है कि जमीन एमडीए की नहीं बल्कि दोनों बहनों की है। फिर भी हमने जांच बैठा दी है। अवैध कब्जे कहीं नहीं होने दिए जाएंगे, कोर्ट के आदेश और साक्ष्यों के आधार पर ही कार्रवाई होगी। - जुहैर बिन सगीर, डीएम।
ट्रांसपोर्ट नगर में बस टर्मिनल की जमीन एमडीए की है। किसी के बाउंड्री बना लेने से जमीन उसकी नहीं हो जाएगी। इस बाउंड्री को तुड़वा दिया जाएगा। एमडीए की एक इंच जमीन पर भी कब्जा नहीं होने देंगे, चाहें जिस भी लेवल तक जाना पड़े। सीलिंग की व एमडीए द्वारा अधिग्रहीत की गई जिन जमीनों पर फिलहाल कब्जे हो रहे हैं, उनके खिलाफ हाईकोर्ट में रिट कर दी गई हैं। एमडीए की जमीन पर किसी अन्य को कब्जा देने संबंधी सभी आदेशों को हम फाइलें निकलवाकर रिजेक्ट कर देंगे। - राजेश यादव, वीसी, एमडीए।
शासन तक पहुंची दो आईएएस अफसरों की तकरार
मुरादाबाद (ब्यूरो)। जमीन के मामलों को लेकर डीएम और वीसी के बीच पनपी तल्खी शासन तक पहुंच चुकी है। शासन ने अपने स्तर से प्रकरण की मानीटरिंग शुरू कर दी है। बस अड्डे की जमीन पर अपने ही दो आला अफसरों के विरोधाभासी स्टैंड से लखनऊ में बैठे आला अफसर भी सकते में हैं। सूत्रों का कहना है कि इस मामले में जल्द शासन स्तर से कोई कदम उठाया जा सकता है।
तहसीलदार को भरी मीटिंग पड़ी फटकार
ट्रांसपोर्ट नगर में प्राधिकरण के स्वामित्व वाली बस अड्डे की जमीन को लेकर उठे विवाद के बाद कमिश्नर एल वेंक्टेश्वर लू ने भी एक दिन पहले एक बैठक बुलाई। इसमें प्रशासनिक अफसरों के साथ ही प्राधिकरण के अफसरों को भी बुलाया गया था। मीटिंग में तहसीलदार को जमकर फटकार पड़ी। एमडीए की जमीन पर कब्जे के दौरान तहसीलदार मौके पर मौजूद थे। कमिश्नर ने तहसीलदार को हिदायत दी कि सरकारी जमीनों पर कब्जे कराने के बजाए गांव - गांव जाकर लोगों की समस्याएं सुनें और उनका निराकरण कराएं। प्राधिकरण अफसरों ने भी आला अफसरों से शिकायत की है कि तहसीलदार ने एमडीए की जमीन पर खड़े होकर कब्जा कराया।