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गरीबों के घरों में कट रही बिल्डरों की चांदी
मुरादाबाद/ अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 19 Mar 2016 03:30 AM IST
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समाजवादी आवास
- फोटो : demo
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ये योजना या तो बिल्डरों को मुनाफा पहुंचाने की मंशा से लांच हुई या फिर इसे बनाते वक्त इस पहलू पर नीति नियंताओं ने गौर ही नहीं किया। जी हां, गरीबों के घर छोटे शहरों में बिल्डरों की मोटी कमाई का जरिया बन गए हैं। योजना का टैग लगाकर बिल्डर करोड़ों रुपये की सब्सिडी तो डकार ही रहे हैं।
समाजवादी आवास योजना को हथियार बनाकर ग्रीन बेल्ट को कंकरीट में तब्दील करने का खेल भी धड़ल्ले से चल रहा है। हैरत ये है कि सरकारी खजाने से तमाम छूट लेने के बावजूद बिल्डरों द्वारा गरीबों के लिए तैयार किए गए फ्लैट़्स की कीमत मार्केट रेट से दोगुना तक है। ऐसे में इस योजना की उपयोगिता और सरकार की नीयत पर सवाल उठना लाजिमी है।
मोटे तौर पर देखें तो मुरादाबाद विकास प्राधिकरण द्वारा 60- 75 वर्ग मीटर में तैयार किए जा रहे समाजवादी फ्लैट्स की कास्ट फ्लोर के हिसाब से 10.5 लाख रुपये लेकर 15.5 लाख रुपये तक है। चीफ इंजीनियर इंदुशेखर सिंह का कहना है कि इतने एरिया में एक फ्लैट की कंस्ट्रक्शन कास्ट अधिकतम छह लाख रुपये बैठती है।
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एरिया वाइज लैंड कास्ट और दूसरी मद जोड़कर एमडीए ने इनकी कीमत 10.5 - 15.5 लाख रुपये रखी है। लेकिन स्थिति यह है कि इतनी कीमत पर भी एमडीए समाजवादी फ्लैट्स नहीं बेच पा रहा है। 1500 फ्लैट्स में से बमुश्किल 89 फ्लैट्स ही एमडीए बेच पाया है।
वहीं समाजवादी आवास के तहत बिल्डर को इसी एरिया के फ्लैट्स 21 लाख रुपये तक की दर से बेचने की छूट है। मतलब करोड़ों की सब्सिडी के बावजूद प्राइवेट बिल्डर द्वारा बनाए गए समाजवादी फ्लैट का रेट कम नहीं हुआ।
खास बात यह भी है कि एमडीए चार मंजिला फ्लैट्स बना रहा है जबकि बिल्डर आठ से 12 मंजिला के टावर खड़े कर रहे हैं। ऐसे में लैंड कास्ट डिवाइड होने पर बिल्डर के फ्लैट की कीमत और भी कम होनी चाहिए।
दरअसल अपने फ्लैट्स को 10 से 15 लाख रुपये में बेचने में नाकाम बिल्डरों की नजरें अब समाजवादी योजना का टैग लगाकर सरकार की ओर से मिलने वाली करोड़ों रुपये की सब्सिडी पर है। सब्सिडी लेने के बावजूद बिल्डर अपने फ्लैट को 21 लाख रुपये तक में बेच सकेंगे।
एमडीए की 22 मार्च को होने जा रही बोर्ड बैठक में 72 हजार वर्ग मीटर जमीन का लैंड यूज ग्रीन बेल्ट (पार्क, प्ले ग्राउंड) से बदलकर आवासीय करने का प्रस्ताव रखा गया है। यह प्रपोजल गुलमोहर ग्रीन- 1, गुलमोहर ग्रीन - 2 और सैफायर ग्रीन्स के नाम से समाजवादी आवास योजना के फ्लैट बनाने के लिए मैसर्स आर एंड ए रियलटेक एलएलपी नई दिल्ली की ओर से रखा गया है।
यदि बोर्ड इस प्रस्ताव को मंजूर कर लेता है तो बिल्डर को एकमुश्त करीब 25 करोड़ रुपये का प्राथमिक मुनाफा होगा। स्टांप शुल्क और दूसरी छूट रहीं अलग। विकास शुल्क के 5.04 करोड़ रुपये और लैंड यूज चेंज फीस + इंपैक्ट शुल्क के करीब 20 करोड़ रुपये सरकार माफ कर देगी। सीटीपी नितिन मित्तल के मुताबिक लैंड यूज चेंज फीस लैंड कास्ट का 50 प्रतिशत होती है। लेकिन समाजवादी आवास योजना बनाने पर यह शुल्क माफ कर दिए जाते हैं।
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समाजवादी आवास योजना को हथियार बनाकर ग्रीन बेल्ट को कंकरीट में तब्दील करने का खेल भी धड़ल्ले से चल रहा है। हैरत ये है कि सरकारी खजाने से तमाम छूट लेने के बावजूद बिल्डरों द्वारा गरीबों के लिए तैयार किए गए फ्लैट़्स की कीमत मार्केट रेट से दोगुना तक है। ऐसे में इस योजना की उपयोगिता और सरकार की नीयत पर सवाल उठना लाजिमी है।
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मोटे तौर पर देखें तो मुरादाबाद विकास प्राधिकरण द्वारा 60- 75 वर्ग मीटर में तैयार किए जा रहे समाजवादी फ्लैट्स की कास्ट फ्लोर के हिसाब से 10.5 लाख रुपये लेकर 15.5 लाख रुपये तक है। चीफ इंजीनियर इंदुशेखर सिंह का कहना है कि इतने एरिया में एक फ्लैट की कंस्ट्रक्शन कास्ट अधिकतम छह लाख रुपये बैठती है।
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एरिया वाइज लैंड कास्ट और दूसरी मद जोड़कर एमडीए ने इनकी कीमत 10.5 - 15.5 लाख रुपये रखी है। लेकिन स्थिति यह है कि इतनी कीमत पर भी एमडीए समाजवादी फ्लैट्स नहीं बेच पा रहा है। 1500 फ्लैट्स में से बमुश्किल 89 फ्लैट्स ही एमडीए बेच पाया है।
वहीं समाजवादी आवास के तहत बिल्डर को इसी एरिया के फ्लैट्स 21 लाख रुपये तक की दर से बेचने की छूट है। मतलब करोड़ों की सब्सिडी के बावजूद प्राइवेट बिल्डर द्वारा बनाए गए समाजवादी फ्लैट का रेट कम नहीं हुआ।
सीधे बिक नहीं रहे लिहाजा नजर सब्सिडी पर
शहर में बगैर समाजवादी योजना के टैग के प्राइवेट बिल्डर्स द्वारा विकास शुल्क चुकाकर 75 वर्ग मीटर एरिया के बनाए गए फ्लैट्स की कीमत भी बाजार में 10- 15 लाख रुपये के बीच में है। ऐसे में करोड़ों रुपये की सब्सिडी पाकर बनाए गए फ्लैट्स की कीमत 21 लाख रुपये तक होना समझ से परे हैं।खास बात यह भी है कि एमडीए चार मंजिला फ्लैट्स बना रहा है जबकि बिल्डर आठ से 12 मंजिला के टावर खड़े कर रहे हैं। ऐसे में लैंड कास्ट डिवाइड होने पर बिल्डर के फ्लैट की कीमत और भी कम होनी चाहिए।
दरअसल अपने फ्लैट्स को 10 से 15 लाख रुपये में बेचने में नाकाम बिल्डरों की नजरें अब समाजवादी योजना का टैग लगाकर सरकार की ओर से मिलने वाली करोड़ों रुपये की सब्सिडी पर है। सब्सिडी लेने के बावजूद बिल्डर अपने फ्लैट को 21 लाख रुपये तक में बेच सकेंगे।
बोर्ड से हरी झंडी मिलते की 25 करोड़ का मुनाफा
एमडीए की 22 मार्च को होने जा रही बोर्ड बैठक में 72 हजार वर्ग मीटर जमीन का लैंड यूज ग्रीन बेल्ट (पार्क, प्ले ग्राउंड) से बदलकर आवासीय करने का प्रस्ताव रखा गया है। यह प्रपोजल गुलमोहर ग्रीन- 1, गुलमोहर ग्रीन - 2 और सैफायर ग्रीन्स के नाम से समाजवादी आवास योजना के फ्लैट बनाने के लिए मैसर्स आर एंड ए रियलटेक एलएलपी नई दिल्ली की ओर से रखा गया है।
यदि बोर्ड इस प्रस्ताव को मंजूर कर लेता है तो बिल्डर को एकमुश्त करीब 25 करोड़ रुपये का प्राथमिक मुनाफा होगा। स्टांप शुल्क और दूसरी छूट रहीं अलग। विकास शुल्क के 5.04 करोड़ रुपये और लैंड यूज चेंज फीस + इंपैक्ट शुल्क के करीब 20 करोड़ रुपये सरकार माफ कर देगी। सीटीपी नितिन मित्तल के मुताबिक लैंड यूज चेंज फीस लैंड कास्ट का 50 प्रतिशत होती है। लेकिन समाजवादी आवास योजना बनाने पर यह शुल्क माफ कर दिए जाते हैं।