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जीत का अंतर कम होने के बाद भी बढ़ा भाजपा का वोट बैंक
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मुरादाबाद। मुरादाबाद शहर सीट पर भाजपा का जनाधार लगातार बढ़ रहा है। वर्ष 2022 के चुनाव में उसकी जीत का अंतर भले ही कम हुआ हो, लेकिन वोट बैंक में 1.38 फीसदी का इजाफा हुआ है। हालांकि इस सपा ने भी अपने वोट प्रतिशत में 1.29 फीसदी का इजाफा किया है, लेकिन इसके बाद भी उसे यहां पराजय का सामना करना पड़ा है। बसपा का 3.57 फीसदी वोट कम हुआ है।
वर्ष 2017 के चुनाव में सपा को 43.59 प्रतिशत मत मिले थे। तब सपा और कांग्रेस ने एक साथ मिल कर चुनाव लड़ा था। वर्ष 2022 में सपा के वोट बैंक में भी 1.29 फीसदी का इजाफा हुआ और सपा प्रत्याशी को कुल पड़े मतों का 45.88 फीसदी मत भी प्राप्त हुआ लेकिन इसके बाद भी उसे हार का सामना करना पड़ा।
बीते दो दशक में भाजपा को 2017 में सर्वाधिक 44.74 फीसदी मत प्राप्त हुए थे। इस बार भाजपा प्रत्याशी के वोट बैंक में 1.38 फीसदी वोटों का इजाफा हुआ। इस तरह भाजपा के वोट बैंक में 1.38 फीसदी का इजाफा तो जरूर हुआ लेकिन इसके बाद भी उसकी जीत का अंतर घट गया।
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वर्ष 2002 में मात्र 1.01 फीसदी मत प्राप्त करने वाली बसपा ने आगे के दो चुनावों में अपना वोट प्रतिशत बढ़ाया। वर्ष 2007 में 2.06 फीसदी तथा 2012 में 15.63 फीसदी मत प्राप्त किया। लेकिन वर्ष 2017 में उसका वोट प्रतिशत घट कर मात्र 8.93 फीसदी रह गया। वर्ष 2022 में बसपा को कुल 4.36 फीसदी मत ही प्राप्त हो सके हैं। इस तरह बसपा के वोट बैंक में 3.57 फीसदी की गिरावट हुई है। इससे कहीं खराब स्थिति कांग्रेस की रही। वर्ष 2002 में 27.46 फीसदी मत प्राप्त करने वाली इस पार्टी का वोट प्रतिशत 2007 में घट कर मात्र 4.87 फीसदी रह गया। 2012 में आंशिक सुधार के साथ कांग्रेस प्रत्याशी को कुल 6.17 फीसदी मत ही प्राप्त हो सके थे। वर्ष 2017 में कांग्रेस, सपा गठबंधन के कारण कांग्रेस का प्रत्याशी इस सीट पर चुनाव नहीं लड़ा। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी को कुल 1.66 फीसदी मत ही प्राप्त हो सके हैं। कांग्रेस का यह हाल तब है जब मुरादाबाद को प्रियंका गांधी की ससुराल के रूप में देखा जाता है तथा उन्होंने यहां कांग्रेस में जान फूंकने के लिए काफी मेहनत भी की थी।
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वर्ष 2017 के चुनाव में सपा को 43.59 प्रतिशत मत मिले थे। तब सपा और कांग्रेस ने एक साथ मिल कर चुनाव लड़ा था। वर्ष 2022 में सपा के वोट बैंक में भी 1.29 फीसदी का इजाफा हुआ और सपा प्रत्याशी को कुल पड़े मतों का 45.88 फीसदी मत भी प्राप्त हुआ लेकिन इसके बाद भी उसे हार का सामना करना पड़ा।
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बीते दो दशक में भाजपा को 2017 में सर्वाधिक 44.74 फीसदी मत प्राप्त हुए थे। इस बार भाजपा प्रत्याशी के वोट बैंक में 1.38 फीसदी वोटों का इजाफा हुआ। इस तरह भाजपा के वोट बैंक में 1.38 फीसदी का इजाफा तो जरूर हुआ लेकिन इसके बाद भी उसकी जीत का अंतर घट गया।
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वर्ष 2002 में मात्र 1.01 फीसदी मत प्राप्त करने वाली बसपा ने आगे के दो चुनावों में अपना वोट प्रतिशत बढ़ाया। वर्ष 2007 में 2.06 फीसदी तथा 2012 में 15.63 फीसदी मत प्राप्त किया। लेकिन वर्ष 2017 में उसका वोट प्रतिशत घट कर मात्र 8.93 फीसदी रह गया। वर्ष 2022 में बसपा को कुल 4.36 फीसदी मत ही प्राप्त हो सके हैं। इस तरह बसपा के वोट बैंक में 3.57 फीसदी की गिरावट हुई है। इससे कहीं खराब स्थिति कांग्रेस की रही। वर्ष 2002 में 27.46 फीसदी मत प्राप्त करने वाली इस पार्टी का वोट प्रतिशत 2007 में घट कर मात्र 4.87 फीसदी रह गया। 2012 में आंशिक सुधार के साथ कांग्रेस प्रत्याशी को कुल 6.17 फीसदी मत ही प्राप्त हो सके थे। वर्ष 2017 में कांग्रेस, सपा गठबंधन के कारण कांग्रेस का प्रत्याशी इस सीट पर चुनाव नहीं लड़ा। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी को कुल 1.66 फीसदी मत ही प्राप्त हो सके हैं। कांग्रेस का यह हाल तब है जब मुरादाबाद को प्रियंका गांधी की ससुराल के रूप में देखा जाता है तथा उन्होंने यहां कांग्रेस में जान फूंकने के लिए काफी मेहनत भी की थी।