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ईडी के घेरे में आजम: ठेकों की रकम से सरकारी निर्माण, बदला स्वामित्व; खूब बरसी विधायक निधि; जल निगम था मेहरबान
Thu, 15 Oct 2026 04:03 PM IST
Sharukh Khan
मोहित सक्सेना, अमर उजाला, रामपुर
मोहित सक्सेना, अमर उजाला, रामपुर
Published by: Sharukh Khan
Updated Thu, 15 Oct 2026 04:03 PM IST
सार
आजम खान ईडी के घेरे में है। ठेकों की रकम से सरकारी निर्माण किया गया। ईडी ने सरकारी धन से हुए निर्माण का स्वामित्व विवि को सौंपने पर सवाल उठाए हैं। चार साल की ईडी की जांच के बाद आखिर अब एफआईआर तक मामला पहुंचा है।
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जाैहर विवि रामपुर
- फोटो : संवाद
विस्तार
सरकारी ठेकों की रकम से लेकर जल निगम और विधायक निधि के बजट तक, जौहर विश्वविद्यालय के निर्माण में सरकारी धन के कथित इस्तेमाल के मामले में शिकंजा कस दिया है। ईडी की रिपोर्ट में सरकारी ठेके हासिल करने वाली एक कंपनी के जरिये 55.8 करोड़ रुपये के कथित इस्तेमाल, जल निगम के 23.41 करोड़ रुपये के निर्माण कार्यों और विधायक निधि से खर्च हुए 6.60 करोड़ रुपये का जिक्र किया गया है।
सरकारी धन से बने पंडाल का स्वामित्व विश्वविद्यालय को सौंपे जाने पर भी सवाल उठाए गए हैं। ईडी की करीब चार साल की जांच के बाद एफआईआर दर्ज होने के बाद अब सरकारी धन के इस्तेमाल से लेकर निर्माण कार्यों और संपत्तियों के स्वामित्व तक की परतें जांच के दायरे में हैं।
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सरकारी धन से बने पंडाल का स्वामित्व विश्वविद्यालय को सौंपे जाने पर भी सवाल उठाए गए हैं। ईडी की करीब चार साल की जांच के बाद एफआईआर दर्ज होने के बाद अब सरकारी धन के इस्तेमाल से लेकर निर्माण कार्यों और संपत्तियों के स्वामित्व तक की परतें जांच के दायरे में हैं।
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सरकारी ठेकों की रकम का 30 फीसदी यूनिवर्सिटी के निर्माण में लगा
ईडी का आरोप है कि सरकारी विभागों से ठेके हासिल करने वाले ठेकेदारों के माध्यम से जौहर विश्वविद्यालय परिसर में निर्माण सामग्री पहुंचाई गई। रिपोर्ट में एक कंपनी के प्रबंध निदेशक के बयान का हवाला देते हुए बताया गया है कि संबंधित कंपनी को वित्तीय वर्ष 2013-14 से 2016-17 के बीच करीब 186 करोड़ रुपये के सरकारी ठेके मिले थे।
ईडी का आरोप है कि सरकारी विभागों से ठेके हासिल करने वाले ठेकेदारों के माध्यम से जौहर विश्वविद्यालय परिसर में निर्माण सामग्री पहुंचाई गई। रिपोर्ट में एक कंपनी के प्रबंध निदेशक के बयान का हवाला देते हुए बताया गया है कि संबंधित कंपनी को वित्तीय वर्ष 2013-14 से 2016-17 के बीच करीब 186 करोड़ रुपये के सरकारी ठेके मिले थे।
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ईडी के अनुसार, इन ठेकों से प्राप्त रकम का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा विश्वविद्यालय के निर्माण कार्यों में लगाए जाने की बात सामने आई। इस गणना के आधार पर अकेले उक्त कंपनी के माध्यम से करीब 55.8 करोड़ की सरकारी धनराशि के कथित इस्तेमाल का आरोप है।
जांच एजेंसी ने ठेकों से प्राप्त रकम, निर्माण सामग्री की आपूर्ति और विश्वविद्यालय परिसर में कराए गए कार्यों के बीच संबंधों की जांच की है। रिपोर्ट में इस बात की पड़ताल की गई है कि सरकारी कार्यों के लिए जारी धनराशि का इस्तेमाल निर्धारित उद्देश्य के बजाय यूनिवर्सिटी के निर्माण में तो नहीं किया गया। इस मामले में संबंधित वित्तीय रिकॉर्ड, ठेकेदारों के बयानों और निर्माण कार्यों से जुड़े दस्तावेज को महत्वपूर्ण माना गया है।
खूब बरसी विधायक निधि, कराए 6.60 करोड़ के कार्य
ईडी के अनुसार, विधायक निधि से यूनिवर्सिटी परिसर में 6.60 करोड़ के विकास कार्य कराए जाने का भी उल्लेख किया गया है। ईडी ने इन कार्यों के लिए जारी धनराशि, उनके उद्देश्य, वास्तविक उपयोग और संबंधित वित्तीय अभिलेखों की पड़ताल की है।
ईडी के अनुसार, विधायक निधि से यूनिवर्सिटी परिसर में 6.60 करोड़ के विकास कार्य कराए जाने का भी उल्लेख किया गया है। ईडी ने इन कार्यों के लिए जारी धनराशि, उनके उद्देश्य, वास्तविक उपयोग और संबंधित वित्तीय अभिलेखों की पड़ताल की है।
जांच एजेंसी ने अलग-अलग सरकारी मदों से खर्च की गई रकम को विश्वविद्यालय के निर्माण और विकास कार्यों से जोड़ते हुए वित्तीय लेनदेन की जांच का आधार बनाया है। रिपोर्ट में सरकारी ठेकों, जल निगम और विधानसभा क्षेत्र विकास निधि से जुड़े मामलों का उल्लेख करते हुए यह सवाल उठाया गया है कि सरकारी धनराशि का इस्तेमाल किस उद्देश्य से हुआ और उससे तैयार संपत्तियों का स्वामित्व किसके पास रहा।
जल निगम भी था मेहरबान, 23.41 करोड़ के कराए निर्माण कार्य
एफआईआर में उत्तर प्रदेश जल निगम की इकाई के माध्यम से विश्वविद्यालय परिसर में कराए गए निर्माण कार्यों का भी उल्लेख है। उस वक्त सपा नेता आजम खां नगर विकास मंत्री के साथ ही जल निगम के अध्यक्ष भी थे। उनके कार्यकाल में जल निगम भी यूनिवर्सिटी पर मेहरबान दिखा। रिपोर्ट के मुताबिक, परिसर में पंडाल, अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) बालक छात्रावास और अस्पताल के निर्माण पर कुल 23.41 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे।
एफआईआर में उत्तर प्रदेश जल निगम की इकाई के माध्यम से विश्वविद्यालय परिसर में कराए गए निर्माण कार्यों का भी उल्लेख है। उस वक्त सपा नेता आजम खां नगर विकास मंत्री के साथ ही जल निगम के अध्यक्ष भी थे। उनके कार्यकाल में जल निगम भी यूनिवर्सिटी पर मेहरबान दिखा। रिपोर्ट के मुताबिक, परिसर में पंडाल, अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) बालक छात्रावास और अस्पताल के निर्माण पर कुल 23.41 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे।
ईडी ने सरकारी धन से तैयार इन संपत्तियों के स्वामित्व और उनके हस्तांतरण से जुड़े फैसलों पर सवाल उठाए हैं। आरोप है कि यह सब बाद में ट्रस्ट के नाम पर हो गए थे। रिपोर्ट के अनुसार, पंडाल के निर्माण के लिए जारी शुरुआती शासनादेश में उसके स्वामित्व की जिम्मेदारी संस्कृति विभाग के पास रखने और उसे सरकारी उपयोग के लिए उपलब्ध कराने की शर्त रखी गई थी।
बाद में शासनादेश में बदलाव कर पंडाल का स्वामित्व विश्वविद्यालय को हस्तांतरित कर दिया गया। ईडी ने इस बदलाव को अपनी रिपोर्ट में शामिल करते हुए सरकारी धन से तैयार संपत्ति के स्वामित्व में हुए परिवर्तन और उसके इस्तेमाल की परिस्थितियों की जांच की आवश्यकता जताई है। जांच एजेंसी ने इस पहलू को भी सरकारी धन के उपयोग से जुड़े मामले का हिस्सा बनाया है।
काला धन जमा कर आजम खां ने अपना साम्राज्य खड़ा किया है। आजम ने देश के इतिहास में भ्रष्टाचार का नया इतिहास रचा है। उनको किए की सजा कानून के हिसाब से मिलेगी। कानून अपना काम कर रहा है। -आकाश सक्सेना, शहर विधायक, रामपुर
आजम खां जेल में बंद हैं। उनको अपने खिलाफ मामला दर्ज होने की जानकारी मीडिया से ही मिली है। उनके खिलाफ सियासी रंजिश के तहत मामला दर्ज कराया गया है। न्याय व्यवस्था पर पूरा भरोसा है। -अजय सागर, जिलाध्यक्ष, सपा