सपा सांसद आजम खां को बड़ा झटका, जौहर यूनिवर्सिटी की 104 बीघा जमीन पर प्रशासन का कब्जा
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सांसद आजम खां की मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी पर जिला प्रशासन ने बुधवार को दो बड़ी कार्रवाई की है। राजस्व परिषद के फैसले के अनुपालन में प्रशासन ने यूनिवर्सिटी की 104 बीघा जमीन अपने कब्जे में ले ली। श्रम विभाग का लगभग 1.37 करोड़ रुपये का सेस (अधिभार) बकाया होने के मामले में दो भवनों को सील कर दिया गया है। दोनों कार्रवाई एसडीएम सदर पीपी तिवारी के नेतृत्व में पहुंची टीम ने किया।
जौहर यूनिवर्सिटी के लिए जौहर ट्रस्ट के नाम पर सींगनखेड़ा के अनुसूचित जाति के लोगों की 104 बीघा जमीन बिना अनुमति के खरीदे जाने की शिकायत भाजपा लघु उद्योग प्रकोष्ठ के क्षेत्रीय संयोजक आकाश सक्सेना ने मुख्यमंत्री से की थी। मुख्यमंत्री ने मामले में जांच के आदेश दे दिए थे। तत्कालीन जिलाधिकारी ने 2018 में इसकी जांच की थी। जांच में यह सामने आया था कि अनुसूचित जाति के व्यक्ति के नाम पट्टा होने के कारण एक सामान्य श्रेणी के जौहर ट्रस्ट को भूमि का विक्रय नहीं किया जा सकता था। साथ ही भूमि विक्रय करने की अनुमति भी प्राप्त नहीं की गई थी।
इस प्रकरण में जांच के बाद तत्कालीन जिलाधिकारी ने राजस्व बोर्ड में छह मार्च 2018 को दस वाद दायर किए थे। जिसमें शिकायकर्ता आकाश सक्सेना को दसों वादों की पैरवी हेतु निगरानीकर्ता बनाया गया था। इस मामले में राजस्व परिषद की सदस्य (न्यायिक) भावना श्रीवास्तव ने 14 जनवरी 2020 को अपने निर्णय में विक्रय पत्र को पूर्णत: शून्य करार दिया। साथ ही आदेश दिया यह जमीन राज्य सरकार में निहित मानी जाएगी। राजस्व परिषद के आदेश के बाद बुधवार को दोपहर बाद एसडीएम सदर पीपी तिवारी के नेतृत्व में पहुंची राजस्व विभाग की टीम ने यूनिवर्सिटी में जमीन की पैमाइश करने के बाद 104 बीघा जमीन को अपने कब्जे में ले लिया।
भाजपा नेता आकाश सक्सेना ने की थी शिकायत
वहीं, जौहर यूनिवर्सिटी में भवन निर्माण के मामले में श्रम विभाग द्वारा निर्धारित एक फीसदी सेस अदा नहीं किए जाने की शिकायत भी भाजपा नेता आकाश सक्सेना ने की थी। उन्होंने कहा था कि यूनिवर्सिटी को कम से कम 20 करोड़ रुपये का सेस जमा करना चाहिए। इस संबंध में जांच के बाद श्रम विभाग के अधिकारियों ने 1.37 करोड़ रुपये का सेस निर्धारित किया था। सेस यूनिवर्सिटी की ओर से जमा नहीं कराया गया था। जिसके बाद आरसी (रिकवरी सर्टिफिकेट) जारी कर दी गई थी।
प्रशासन के पास यूनिवर्सिटी की प्रशासनिक बिल्डिंग को सील करने का आदेश था, लेकिन यूनिवर्सिटी के वीसी ने अनुरोध किया कि प्रशासनिक बिल्डिंग को सील करने से परीक्षा प्रभावित हो सकती है। इसके बाद प्रशासन साइंस ब्लाक की नव निर्मित दो बिल्डिंगों को सील कर दिया। इस दौरान यूनिवर्सिटी में अफरा-तफरी का माहौल रहा।
जिलाधिकारी आन्जनेय कुमार सिंह ने कहा कि राजस्व परिषद के आदेश के बाद जिला प्रशासन ने यूनिवर्सिटी की 104 बीघा जमीन पर अपना कब्जा ले लिया है। श्रम विभाग के सेस के मामले में प्रशासनिक भवन के बदले दो अनय बिल्डिंगों को सील कर दिया गया है। प्रशासन ने ऐसी कोई कार्रवाई नहीं की है, जिससे यूनिवर्सिटी के छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो या उनकी परीक्षा पर कोई असर पड़े।