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आजम खां ने लगातार तीसरी बार पूरा नहीं कर सके कार्यकाल-00
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रामपुर। सपा नेता आजम खां लगातार तीसरी बार विधायक/सांसद के रूप में अपना कार्यकाल पूरा नहीं सके। 2017 में वो रामपुर शहर सीट से सपा की टिकट पर विधायक निर्वाचित हुए थे। 2019 के लोकसभा चुनाव में उनको रामपुर संसदीय सीट से सपा-बसपा गठबंधन का प्रत्याशी बनाया गया। लोकसभा के चुनाव में उन्होंने भाजपा की प्रत्याशी जयाप्रदा को एक लाख से अधिक मतों से हराया। इसके बाद उन्होंने विधायक के पद से अपना इस्तीफा दे दिया।
2017 में आजम खां ने रामपुर शहर सीट से विधायक के रूप में जो चुनाव जीता था उसका कार्यकाल पूरा नहीं हो पाया आजम खां लगभग सवा दो साल तक विधायक रहे। इसके बाद हुए उप चुुनाव में उन्होंने अपनी पत्नी डॉ. तजीन फात्मा को सपा की टिकट पर चुनाव लड़वाया। उप चुनाव में डॉ. फात्मा ने जीत हासिल की। इसके बाद आजम खां ने 2022 में जेल में रहते हुए रामपुर शहर विधानसभा सीट से सपा की टिकट पर चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। विधायक बनने के बाद उनको लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा से दिया। सांसद के रूप में भी उनका कार्यकाल लगभग पौने तीन साल का रहा। इसमें से भी 27 महीने तक वो सीतापुर की जेल में रहे। आजम खां के इस्तीफे के बाद रामपुर संसदीय सीट पर हुए उप चुनाव में भाजपा ने जीत हासिल कर ली।
विधायक बनने के बाद वो सभी मुकदमों में जमानत होने के बाद जेल से बाहर गए। विधायक के रूप में उन्होंने शपथ बाद में ग्रहण किया था। नफरती भाषण देने के आरोप में दर्ज मुकदमे की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने 27 अक्तूबर को उनको तीन साल की कैद और छह हजार रुपये जुर्माना अदा करने की सजा सुना दी। 28 अक्तूबर को उनकी विधानसभा की सदस्यता समाप्त करने का आदेश जारी हो गया । इस तरह से आजम खां लगातार तीसरी बार अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए हैं। 10 वीं बार विधायक के रूप के रूप में तो उनका कार्यकाल महज 154 दिनों का रहा, जो उनके राजनीतिक कॅरिअर की सबसे छोटी पारी है।
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2017 में आजम खां ने रामपुर शहर सीट से विधायक के रूप में जो चुनाव जीता था उसका कार्यकाल पूरा नहीं हो पाया आजम खां लगभग सवा दो साल तक विधायक रहे। इसके बाद हुए उप चुुनाव में उन्होंने अपनी पत्नी डॉ. तजीन फात्मा को सपा की टिकट पर चुनाव लड़वाया। उप चुनाव में डॉ. फात्मा ने जीत हासिल की। इसके बाद आजम खां ने 2022 में जेल में रहते हुए रामपुर शहर विधानसभा सीट से सपा की टिकट पर चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। विधायक बनने के बाद उनको लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा से दिया। सांसद के रूप में भी उनका कार्यकाल लगभग पौने तीन साल का रहा। इसमें से भी 27 महीने तक वो सीतापुर की जेल में रहे। आजम खां के इस्तीफे के बाद रामपुर संसदीय सीट पर हुए उप चुनाव में भाजपा ने जीत हासिल कर ली।
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विधायक बनने के बाद वो सभी मुकदमों में जमानत होने के बाद जेल से बाहर गए। विधायक के रूप में उन्होंने शपथ बाद में ग्रहण किया था। नफरती भाषण देने के आरोप में दर्ज मुकदमे की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने 27 अक्तूबर को उनको तीन साल की कैद और छह हजार रुपये जुर्माना अदा करने की सजा सुना दी। 28 अक्तूबर को उनकी विधानसभा की सदस्यता समाप्त करने का आदेश जारी हो गया । इस तरह से आजम खां लगातार तीसरी बार अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए हैं। 10 वीं बार विधायक के रूप के रूप में तो उनका कार्यकाल महज 154 दिनों का रहा, जो उनके राजनीतिक कॅरिअर की सबसे छोटी पारी है।
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