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Moradabad News: भर्ती होने वाले हर पांचवें मरीज में खून की कमी
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मुरादाबाद। जिला अस्पताल की इमरजेंसी में हर दिन औसतन 100 मरीज पहुंचते हैं। इनमें से 20 मरीजों की प्राथमिक जांच में सीवियर एनीमिया लिखा जा रहा है। यानी हर पांचवां मरीज खून की कमी से जूझ रहा है। इनमें सिर्फ महिलाएं ही नहीं हैं। 30 साल के युवक और 50 साल के व्यक्ति तक एनीमिया से परेशान हैं।
जिला अस्पताल में पिछले एक माह में ऐसे 634 केस आए हैं, जिनमें सीवियर एनीमिया पाया गया। इनमें से 166 मरीजों को खून चढ़ाना पड़ा। इनमें कई ऐसे मामले हैं, जिन्हें एक महीने से बुखार आ रहा है। अचानक हालत बिगड़ने पर जिला अस्पताल पहुंचे तो पता चला कि इंफेक्शन काफी बढ़ चुका है। शरीर में खून की कमी हो गई है।
ऐसे में प्राथमिक तौर पर इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर इसे सीवियर एनीमिया के केस में लिखते हैं। विशेषज्ञ द्वारा मरीज का इलाज शुरू करने के बाद एनीमिया का कारण पता चलता है। डॉक्टरों के मुताबिक टीबी, लिवर व किडनी के इंफेक्शन वाले मरीजों में एनीमिया ही प्राथमिक जांच में पता चल पाता है। इसके आवा थैलेसीमिया और हीमोफीलिया के मरीजों की संख्या बढ़ना भी सीवियर एनीमिया का कारण है।
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जिला अस्पताल के चिकित्साधीक्षक डॉ. राजेंद्र कुमार ने बताया कि कई बीमारियों में लक्षणों से ज्यादा खून की कमी साफ दिखाई देती है। ऐसे में ईएमओ उन्हें एनीमिया पेशेंट के रूप में ही भर्ती करते हैं। इसलिए ऐसे मरीजों की संख्या ज्यादा है। बाद में विशेषज्ञ डॉक्टर जांच के आधार पर बीमारी का पता लगाते हैं और उपचार करते हैं।
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जिला अस्पताल में पिछले एक माह में ऐसे 634 केस आए हैं, जिनमें सीवियर एनीमिया पाया गया। इनमें से 166 मरीजों को खून चढ़ाना पड़ा। इनमें कई ऐसे मामले हैं, जिन्हें एक महीने से बुखार आ रहा है। अचानक हालत बिगड़ने पर जिला अस्पताल पहुंचे तो पता चला कि इंफेक्शन काफी बढ़ चुका है। शरीर में खून की कमी हो गई है।
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ऐसे में प्राथमिक तौर पर इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर इसे सीवियर एनीमिया के केस में लिखते हैं। विशेषज्ञ द्वारा मरीज का इलाज शुरू करने के बाद एनीमिया का कारण पता चलता है। डॉक्टरों के मुताबिक टीबी, लिवर व किडनी के इंफेक्शन वाले मरीजों में एनीमिया ही प्राथमिक जांच में पता चल पाता है। इसके आवा थैलेसीमिया और हीमोफीलिया के मरीजों की संख्या बढ़ना भी सीवियर एनीमिया का कारण है।
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जिला अस्पताल के चिकित्साधीक्षक डॉ. राजेंद्र कुमार ने बताया कि कई बीमारियों में लक्षणों से ज्यादा खून की कमी साफ दिखाई देती है। ऐसे में ईएमओ उन्हें एनीमिया पेशेंट के रूप में ही भर्ती करते हैं। इसलिए ऐसे मरीजों की संख्या ज्यादा है। बाद में विशेषज्ञ डॉक्टर जांच के आधार पर बीमारी का पता लगाते हैं और उपचार करते हैं।