Moradabad: एक देश- एक चुनाव से समय- धन और श्रम की बचत, भाजपा महामंत्री बोले- दल नहीं, देश के लिए बेहद जरूरी
मुरादाबाद में हुए कार्यक्रम में भाजपा राष्ट्रीय महासचिव सुनील बंसल ने एक देश, एक चुनाव को समय, धन और श्रम की बचत के लिए आवश्यक बताया। विधि विशेषज्ञ प्रो. हरबंश दीक्षित ने ऐतिहासिक और संवैधानिक पक्ष रखते हुए इसकी उपयोगिता समझाई, जबकि कमिश्नर आंजनेय कुमार सिंह ने प्रशासनिक दृष्टिकोण से इसे स्मार्ट प्रशासन के लिए जरूरी बताया।
विस्तार
वर्ष 1995 से आज तक एक साल भी ऐसा नहीं गुजरा जब देश में कोई न कोई चुनाव न हुआ हो। बार-बार चुनाव से इसकी निष्पक्षता चुनौती बन जाती है। समय, पैसा, श्रम बार-बार खर्च होता है, जो देश के विकास में बाधक है। एक वोट पर 1400 रुपये खर्च होते हैं, जो जनता के ही हैं। इसलिए एक देश-एक चुनाव किसी दल से ज्यादा देश के लिए जरूरी है।
यह बातें भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री सुनील बंसल ने एक देश-एक चुनाव विषय पर आयोजित संवाद के दौरान कहीं। वह योमीना फाउंडेशन द्वारा टिमिट सभागार में आयोजित कार्यक्रम द पांचाल डायलाॅग में बतौर मुख्य वक्ता बोल रहे थे। एक देश-एक चुनाव की जरूरत क्यों है, विषय पर उन्होंने अपने विचार रखे।
बंसल ने कहा कि बार-बार चुनाव होने से देश में राजनीतिक वैमनस्यता रहती है। विकास कम और राजनीति ज्यादा होती है। इससे मतदान प्रतिशत कम होता है। उन्होंने आंकड़ा रखा कि कुल मतदाताओं में से सिर्फ 60 फीसदी ही वोट करते हैं। इनमें से जिसे ज्यादा वोट मिलें, वह विजयी हो जाता है।
जब 40 प्रतिशत लोग अपनी सरकार ही नहीं चुन रहे तो क्या यह वास्तव में जनादेश है। संवाद में विधि विशेषज्ञ के रूप में प्रो. हरबंश दीक्षित शामिल हुए। उन्हें इस विषय पर संवैधानिक पक्ष रखा। प्रो. दीक्षित ने कहा कि 1952 से 1967 तक देश में लोकसभा व विधानसभा के चुनाव साथ हुए हैं।
इस विषय के मुताबिक भी लोकसभा व विधानसभा का चुनाव एक साथ होगा। एक साथ से मतलब एक दिन या एक चरण में नहीं है। उन्होंने कहा कि संशोधन के मुताबिक यदि किसी राज्य में विधानसभा चुनाव की परिस्थितियां नहीं हैं तो चुनाव आयोग की संस्तुति पर उसे टाला जा सकता है।
उन्होंने अमेरिका व ब्रिटेन के चुनाव का उदाहरण देकर इसकी उपयोगिता समझाई। अंत में कमिश्नर आंजनेय कुमार सिंह ने प्रशासनिक दृष्टिकोण से अपनी बात रखी। कमिश्नर ने कहा कि अधिकारियों को सबसे ज्यादा मुश्किल बार-बार मतदाता सूची तैयार करने में होती है। यदि एक ही बार मतदाता सूची तैयार होगी तो समय व श्रम की बचत होगी।
बार-बार चुनाव के दबाव में अधिकारी जनता की समस्याओं को समय नहीं दे पाते। दूसरे प्रदेशों के चुनाव में यहां के अधिकारी ऑब्जर्वर के रूप में जाते हैं, तब भी कार्य प्रभावित होते हैं। बार-बार आचार संहिता लगने से विकास में बाधा आती है। उन्होंने स्मार्ट प्रशासन के लिए एक देश-एक चुनाव को जरूरी बताया।
इस माैके पर प्रो. हरबंश दीक्षित की पुस्तक हम भारत के लोग के कवर पृष्ठ का विमोचन भी किया गया। कार्यक्रम के सूत्रधार अभिनव अभिन्न रहे। योमीना फाउंडेशन की निदेशक अंजलि चौहान, प्रत्यूष कुमार, डॉ. राहुल अवस्थी, संचित कुमार आदि का सहयोग रहा।
लोगों के सवालों के भी दिए जवाब
जनता के बीच से प्रश्न उठा कि भारत के कई राज्यों में साक्षरता दर कम है। ऐसे में आम आदमी को कैसे समझाएंगे कि सांसद को चुनना है या विधायक को चुनना है। इस पर सुनील बंसल ने जवाब दिया कि उड़ीसा में पिछले कई साल से लोकसभा व विधानसभा चुनाव एक साथ हो रहा है। वहां लोग विधानसभा में अलग व लोकसभा में अलग पार्टी को वोट करते हैं। पूरे देश में लागू होने के बाद भी यह समस्या नहीं रहेगी।
यह रहे माैजूद
कार्यक्रम में मेयर विनोद अग्रवाल, नगर विधायक रितेश गुप्ता, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी, कुंदरकी विधायक रामवीर सिंह, एमएलसी गोपाल अंजान, सत्यपाल सिंह सैनी, परमेश्वर लाल सैनी, भाजपा जिलाध्यक्ष आकाश पाल, महानगर अध्यक्ष गिरीश भंडूला, सतीश अरोरा, कैप्टन मीनू मेहरोत्रा, डॉ. विशेष गुप्ता, टीएमयू के कुलाधिपति सुरेश जैन, टीएमयू के जीवीसी मनीष जैन आदि मौजूद रहे।