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Moradabad News: एक साल पहले अलका ने लॉकर में रखा था 18 लाख का कैश, लग गया दीमक
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मुरादाबाद। बैंक ऑफ बड़ौदा की आशियाना स्थित शाखा के लॉकर में अलका पाठक ने एक साल पहले 18 लाख रुपये का कैश रखा था। सोमवार वह लॉकर चेक करने पहुंची तो नोटों के टुकड़े हो चुके थे। महिला ने अब तक पुलिस से कोई लिखित शिकायत नहीं की है। उधर, बैंक की ओर से मामले पर पर्दा डालने का प्रयास किया जा रहा है।
आशियाना स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा शाखा में लॉकर रिनुअल एवं केवाईसी संबंधित काम से बैंक पहुंची उपभोक्ता अलका पाठक के होश तब उड़ गए जब उन्होंने अपना बैंक लॉकर खोला। महिला के अनुसार उनके लॉकर में काली थैली में 18 लाख रुपये और कुछ जेवर रखे थे लेकिन सोमवार दोपहर करीब एक साल बाद लॉकर खोलकर देखा तो उसमें रखे रुपयों में दीमक लग चुकी थी। महिला ने बैंक की लापरवाही के कारण रुपयों में दीमक लगने का आरोप लगाया। महिला के परिजन भी जानकारी मिलने पर बैंक पहुंच गए।
दोनों पक्षों की बहस के बीच थोड़ी देर में रामगंगा विहार चौकी से पुलिस भी पहुंच गई थी। बैंक प्रबंधक विवेक कुमार ने बताया कि बैंक लॉकर में रखे सामान की जानकारी निजी होती है। नियमों के अनुसार नष्ट होने वाला सामना लॉकर में नहीं रखना चाहिए। महिला उपभोक्ता की ओर से लगाए गए आरोपों की जांच चल रही है। इसके बाद ही बैंक की ओर से आधिकारिक बयान दिया जाएगा।
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पुलिस को नहीं मिली कोई लिखित शिकायत
सीओ सिविल लाइंस अर्पित कपूर ने बताया कि महिला के बैंक लॉकर में रखे रुपयों में दीमक लगने का मामला पता चला है लेकिन पुलिस को कोई लिखित शिकायत नहीं मिली है। तहरीर मिलने पर जांच करने के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी।
बैंक में चल रही आंतरिक जांच
एलडीएम विशाल दीक्षित ने कहा कि यह बैंक का निजी मामला है। इस तरह की कभी कोई शिकायत हमारे पास नहीं आई है। बैंक की आंतरिक जांच पूरी होने पर ही मामला साफ हो पाएगा।
बैंक लॉकर में नहीं रख सकते कैश
बीओबी प्रबंधक विवेक कुमार ने बताया कि बैंक के लॉकर में कैश के रूप में धनराशि रखना नियमों के विरुद्ध है। आप लॉकर में नष्ट होने वाली कोई वस्तु भी नहीं रख सकते हैं। उन्होंने बताया कि बैंक लॉकर निजी तौर पर आवंटित किए जाते हैं। उसमें रखे सामान की जानकारी किसी को नहीं होती।
बैंकों में अपना- अपना लॉकर चेक करने पहुंचे उपभोक्ता
18 लाख रुपयों में दीमक लगने की खबर सुनकर कई उपभोक्ता परेशान हो गए। मंगलवार को उपभोक्ता अपने लॉकरों में रखे सामान को चेक करने बैंक में पहुंचे। बैंक ऑफ बड़ौदा के अलावा अन्य बैंकों के शाखाओं में भी उपभोक्ता अपने अपने लॉकर चेक करने पहुंचे।
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आशियाना स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा शाखा में लॉकर रिनुअल एवं केवाईसी संबंधित काम से बैंक पहुंची उपभोक्ता अलका पाठक के होश तब उड़ गए जब उन्होंने अपना बैंक लॉकर खोला। महिला के अनुसार उनके लॉकर में काली थैली में 18 लाख रुपये और कुछ जेवर रखे थे लेकिन सोमवार दोपहर करीब एक साल बाद लॉकर खोलकर देखा तो उसमें रखे रुपयों में दीमक लग चुकी थी। महिला ने बैंक की लापरवाही के कारण रुपयों में दीमक लगने का आरोप लगाया। महिला के परिजन भी जानकारी मिलने पर बैंक पहुंच गए।
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दोनों पक्षों की बहस के बीच थोड़ी देर में रामगंगा विहार चौकी से पुलिस भी पहुंच गई थी। बैंक प्रबंधक विवेक कुमार ने बताया कि बैंक लॉकर में रखे सामान की जानकारी निजी होती है। नियमों के अनुसार नष्ट होने वाला सामना लॉकर में नहीं रखना चाहिए। महिला उपभोक्ता की ओर से लगाए गए आरोपों की जांच चल रही है। इसके बाद ही बैंक की ओर से आधिकारिक बयान दिया जाएगा।
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पुलिस को नहीं मिली कोई लिखित शिकायत
सीओ सिविल लाइंस अर्पित कपूर ने बताया कि महिला के बैंक लॉकर में रखे रुपयों में दीमक लगने का मामला पता चला है लेकिन पुलिस को कोई लिखित शिकायत नहीं मिली है। तहरीर मिलने पर जांच करने के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी।
बैंक में चल रही आंतरिक जांच
एलडीएम विशाल दीक्षित ने कहा कि यह बैंक का निजी मामला है। इस तरह की कभी कोई शिकायत हमारे पास नहीं आई है। बैंक की आंतरिक जांच पूरी होने पर ही मामला साफ हो पाएगा।
बैंक लॉकर में नहीं रख सकते कैश
बीओबी प्रबंधक विवेक कुमार ने बताया कि बैंक के लॉकर में कैश के रूप में धनराशि रखना नियमों के विरुद्ध है। आप लॉकर में नष्ट होने वाली कोई वस्तु भी नहीं रख सकते हैं। उन्होंने बताया कि बैंक लॉकर निजी तौर पर आवंटित किए जाते हैं। उसमें रखे सामान की जानकारी किसी को नहीं होती।
बैंकों में अपना- अपना लॉकर चेक करने पहुंचे उपभोक्ता
18 लाख रुपयों में दीमक लगने की खबर सुनकर कई उपभोक्ता परेशान हो गए। मंगलवार को उपभोक्ता अपने लॉकरों में रखे सामान को चेक करने बैंक में पहुंचे। बैंक ऑफ बड़ौदा के अलावा अन्य बैंकों के शाखाओं में भी उपभोक्ता अपने अपने लॉकर चेक करने पहुंचे।