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आखिर कौन है ये पाक से आया मुहम्मद अहमद?
Moradabad
Updated Sun, 13 May 2012 12:00 PM IST
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मुरादाबाद। भारत पाकिस्तान शांति समझौता के तहत करीब तीन महीना पहले 19 भारतीय बंदियों के साथ पाकिस्तान से बाघा बार्डर के रास्ते देश में दाखिल हुआ पैंतीस साल का मुहम्मद इस्लाम अहमद खुफिया एजेंसियों की नजरों में चढ़ गया है। खुद को मुरादाबाद का बेटा बताकर पाकिस्तान से इस पार आए शख्स ने मुरादाबाद का अपना जो पता बताया था वह फरजी निकला। इस खुलासे से केंद्रीय खुफिया एजेंसियों की नींद उड़ गई है। इस बीच मुरादाबाद पुलिस ने गृह मंत्रालय को भेजी रिपोर्ट में साफ कर दिया है कि पाकिस्तान से आया मुहम्मद इस्लाम अहमद मुरादाबाद का रहने वाला नहीं है। उधर, बीएसएफ ने इस व्यक्ति को ब्यूरो ऑफ इमीग्रेशन के हवाले कर दिया है।
सोलह फरवरी को देर शाम शांति समझौता के तहत पाकिस्तान रेंजर्स के अधिकारी हैदर अली ने बाघा बार्डर पर उन्नीस भारतीय बंदियों को सीमा सुरक्षा बल के अफसर हेमराज के हवाले किया था। ये सभी पाकिस्तान की जेल में लंबे वक्त से बंद थे। इन्हीं में एक शख्स मुहम्मद इस्लाम अहमद पुत्र मुहम्मद अजीज अहमद था। उसने एजेंसियों को जो कहानी सुनाई थी उसके मुताबिक वह पुराना गंज, मीरगंज मुरादाबाद का रहने वाला था। सात साल की उम्र में अपनी फूफी से मिलने पाकिस्तान गया था जहां उसे वीजा खत्म होने के बाद जासूसी के शक में पाकिस्तानी एजेंसियों ने गिरफ्तार कर लिया। उसने बताया कि वह सत्ताईस सालों तक पाकिस्तान की जेल में बंद रहा। शांति समझौता के तहत उसकी रिहाई हुई। डीआईजी बीएसएफ बाघा बार्डर के मुताबिक मुहम्मद अहमद को भी रिसीव कर बाकी 19 बंदियों के साथ ही ब्यूरो ऑफ इमीग्रेशन के सुपुर्द कर दिया गया। जहां से एड्रेस वेरीफिकेशन के बाद लोगों को उनके घर भेजा जाता है। पाकिस्तान से इस पार आए बाकी 18 लोगों का तो एड्रेस वेरीफाई हो गया, उनके घर वाले उन्हें लेने बार्डर पहुंचे थे। लेकिन मुहम्मद इस्लाम अहमद का पता तस्दीक नहीं हो सका। जिससे एजेंसियों में खलबली है। गृह मंत्रालय ने एक अर्र्जेंट मेल के जरिए आईबी और मुरादाबाद पुलिस से मुहम्मद इस्लाम अहमद के पते की बाबत रिपोर्ट तलब की है। एसएसपी मुरादाबाद सुनील कुमार गुप्ता का कहना है कि मामला संवेदनशील है। हम मुहम्मद अहमद का एड्रेस वेरीफाई नहीं कर सके हैं। गुरुवार को एमएचए को रिपोर्ट भेज दी गई है कि इस नाम पते का कोई शख्स मुरादाबाद से नहीं है। ऐसे में एजेंसियों की चिंता बढ़ गई है। खुफिया एजेंसियों को शक है कि इस्लाम को पाकिस्तान से इधर प्लांट न किया गया हो। इस्लाम को तीन महीने से खुफिया एजेंसियों ने अमृतसर में ही रोका हुआ है।
आईबी ने पहले ही किया था आगाह
मुरादाबाद। इस मामले में खुफिया एजेंसियों की बड़ी चूक सामने आई है। आईबी ने सात महीना पहले ही गृह मंत्रालय को रिपोर्ट दी थी कि पाक जेल में बंद इस्लाम अहमद खुद को जिस पते का बता रहा है वह फरजी है। लिहाजा उसके माइग्रेशन पर विचार करते वक्त इस तथ्य को ध्यान में रखें। नियम कहता है कि किसी भी विदेशी जेल में बंद भारतीय की वहां से रिहाई की प्रक्रिया शुरू कराने से पहले भारत में उसके पते की तस्दीक की जाती है। ताकि ये पता किया जा सके कि जिस शख्स को विदेश की जेल से रिहा कराकर इधर लाया जा रहा है वह भारतीय है भी या नहीं। पाकिस्तान के मामले में अतिरिक्त सतर्कता बरती जाती है। लेकिन हैरानी है कि इस्लाम अहमद का न तो पता तस्दीक हुआ और न ही अभी तक उसका कोई सही परिवार वाला सामने आया है, किसी परिजन ने उसकी रिहाई की अपील भी भारतीय एजेंसियों से नहीं की थी। फिर कैसे एक अंजान शख्स भारतीय बनकर बार्डर के उस पार से यहां आ गया।
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रामपुर की खैरूनिशां भी बनी पहेली
मुरादाबाद। रामपुर निवासी खैरूनिशां पत्नी अब्दुल जहीर ने 24 फरवरी को अमृतसर जाकर दावा किया था कि मुहम्मद इस्लाम अहमद उसका छोटा भाई है जो सात साल की उम्र में पाकिस्तान गया था। लेकिन वह इस बाबत पूछे गए सवालाें से एजेंसियों को संतुष्ट नहीं कर सकी थीं, लिहाजा इस्लाम को उनके साथ नहीं भेजा गया। अब ये खैरूनिशां भी पहेली बन गई हैं। एजेंसियां रामपुर में इस महिला का भी पता नहीं खोज पा रही हैं। हालांकि अमृतसर जाने से पहले ये महिला एलआईयू रामपुर के संपर्क में आई थी लेकिन एजेंसी का कहना है कि उसने महिला का पता नोट करना जरूरी नहीं समझा।
सोलह फरवरी को देर शाम शांति समझौता के तहत पाकिस्तान रेंजर्स के अधिकारी हैदर अली ने बाघा बार्डर पर उन्नीस भारतीय बंदियों को सीमा सुरक्षा बल के अफसर हेमराज के हवाले किया था। ये सभी पाकिस्तान की जेल में लंबे वक्त से बंद थे। इन्हीं में एक शख्स मुहम्मद इस्लाम अहमद पुत्र मुहम्मद अजीज अहमद था। उसने एजेंसियों को जो कहानी सुनाई थी उसके मुताबिक वह पुराना गंज, मीरगंज मुरादाबाद का रहने वाला था। सात साल की उम्र में अपनी फूफी से मिलने पाकिस्तान गया था जहां उसे वीजा खत्म होने के बाद जासूसी के शक में पाकिस्तानी एजेंसियों ने गिरफ्तार कर लिया। उसने बताया कि वह सत्ताईस सालों तक पाकिस्तान की जेल में बंद रहा। शांति समझौता के तहत उसकी रिहाई हुई। डीआईजी बीएसएफ बाघा बार्डर के मुताबिक मुहम्मद अहमद को भी रिसीव कर बाकी 19 बंदियों के साथ ही ब्यूरो ऑफ इमीग्रेशन के सुपुर्द कर दिया गया। जहां से एड्रेस वेरीफिकेशन के बाद लोगों को उनके घर भेजा जाता है। पाकिस्तान से इस पार आए बाकी 18 लोगों का तो एड्रेस वेरीफाई हो गया, उनके घर वाले उन्हें लेने बार्डर पहुंचे थे। लेकिन मुहम्मद इस्लाम अहमद का पता तस्दीक नहीं हो सका। जिससे एजेंसियों में खलबली है। गृह मंत्रालय ने एक अर्र्जेंट मेल के जरिए आईबी और मुरादाबाद पुलिस से मुहम्मद इस्लाम अहमद के पते की बाबत रिपोर्ट तलब की है। एसएसपी मुरादाबाद सुनील कुमार गुप्ता का कहना है कि मामला संवेदनशील है। हम मुहम्मद अहमद का एड्रेस वेरीफाई नहीं कर सके हैं। गुरुवार को एमएचए को रिपोर्ट भेज दी गई है कि इस नाम पते का कोई शख्स मुरादाबाद से नहीं है। ऐसे में एजेंसियों की चिंता बढ़ गई है। खुफिया एजेंसियों को शक है कि इस्लाम को पाकिस्तान से इधर प्लांट न किया गया हो। इस्लाम को तीन महीने से खुफिया एजेंसियों ने अमृतसर में ही रोका हुआ है।
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आईबी ने पहले ही किया था आगाह
मुरादाबाद। इस मामले में खुफिया एजेंसियों की बड़ी चूक सामने आई है। आईबी ने सात महीना पहले ही गृह मंत्रालय को रिपोर्ट दी थी कि पाक जेल में बंद इस्लाम अहमद खुद को जिस पते का बता रहा है वह फरजी है। लिहाजा उसके माइग्रेशन पर विचार करते वक्त इस तथ्य को ध्यान में रखें। नियम कहता है कि किसी भी विदेशी जेल में बंद भारतीय की वहां से रिहाई की प्रक्रिया शुरू कराने से पहले भारत में उसके पते की तस्दीक की जाती है। ताकि ये पता किया जा सके कि जिस शख्स को विदेश की जेल से रिहा कराकर इधर लाया जा रहा है वह भारतीय है भी या नहीं। पाकिस्तान के मामले में अतिरिक्त सतर्कता बरती जाती है। लेकिन हैरानी है कि इस्लाम अहमद का न तो पता तस्दीक हुआ और न ही अभी तक उसका कोई सही परिवार वाला सामने आया है, किसी परिजन ने उसकी रिहाई की अपील भी भारतीय एजेंसियों से नहीं की थी। फिर कैसे एक अंजान शख्स भारतीय बनकर बार्डर के उस पार से यहां आ गया।
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रामपुर की खैरूनिशां भी बनी पहेली
मुरादाबाद। रामपुर निवासी खैरूनिशां पत्नी अब्दुल जहीर ने 24 फरवरी को अमृतसर जाकर दावा किया था कि मुहम्मद इस्लाम अहमद उसका छोटा भाई है जो सात साल की उम्र में पाकिस्तान गया था। लेकिन वह इस बाबत पूछे गए सवालाें से एजेंसियों को संतुष्ट नहीं कर सकी थीं, लिहाजा इस्लाम को उनके साथ नहीं भेजा गया। अब ये खैरूनिशां भी पहेली बन गई हैं। एजेंसियां रामपुर में इस महिला का भी पता नहीं खोज पा रही हैं। हालांकि अमृतसर जाने से पहले ये महिला एलआईयू रामपुर के संपर्क में आई थी लेकिन एजेंसी का कहना है कि उसने महिला का पता नोट करना जरूरी नहीं समझा।