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अनियमित दिनचर्या से समय पूर्व होने लगे प्रसव

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Mon, 11 Feb 2019 01:11 AM IST
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अनियमित दिनचर्या से समय पूर्व होने लगे प्रसव
मुरादाबाद।
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खुद के पैरों पर खड़े होकर करियर संवारने की चिंता में देरी से शादी करने वाली लड़कियां संतान सूख से दूर हो रही हैं। ऐसी महिलाओं में बांझपन की समस्या तेजी से बढ़ रही है। अनियमित दिनचर्या और खानपान से भी महिलाओं में गर्भधारण करने की क्षमता कम हो रही है। इसकी वजह से नौ माह से पहले ही प्रसव का अनुपात भी लगातार बढ़ रहा है।
मुरादाबाद अब्सटेट्रक्स गायनोकोलॉजिकल सोसायटी की वार्षिक सीएमई में स्त्री रोग विशेषज्ञों ने यह बात कही। दिल्ली रोड स्थित एक होटल में रविवार को आयोजित सीएमई में वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञों ने गर्भधारण, प्रसव और बांझपन संबंधी बीमारियों की वजह और इलाज की जानकारी दी। लखनऊ स्थित केजीएमयू की प्रोफेसर डा. उमा सिंह ने कहा कि पूर्व प्रसव को बच्चे एवं महिलाओं के लिए बड़ा खतरा बताया। उन्होंने कहा कि अनियमित दिनचर्या और खानपान से समय पूर्व प्रसव बढ़ रहे हैं। ऐसे मामलों में बेहद सावधानी बरतने की जरूरत होती है।
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एसजीपीजीआई लखनऊ की प्रोफेसर डा. मदाकिनी प्रधान ने एचआर इन्कम्पैटबिलटि के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि एक इंजेक्शन की मदद से गर्भ में शिशु मृत्यु की रोका जा सकता है।
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लखनऊ से पहुंची डा. रेनू मक्कर ने महिलाओं में बांझपन के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि लड़कियां आज खुद के पैरों पर खड़ा होने के लिए शादी देरी से कर रही हैं। उनकी लगन एवं मेहनत से करियर में मुकाम तो मिल रहा है, लेकिन देरी से शादी होने से संतान सूख से दूर हो रही हैं। देरी से शादी होने से ऐसी महिलाओं में अंडाणु बनने की क्षमता कम हो जाती है, जिससे उनमें बांझपन की समस्या बढ़ रही है। बीएचयू बनारस की डा. ऋतु खन्ना ने एंडोमीट्रीओसिस उपचार की जानकारी दी। डा. वंदना चड्ढा ने गर्भवती महिलाओं के डॉपलर जांचों के बारे में बताया। कहा कि इस जांच से गर्भ में बच्चे के स्वस्थ होने की सही जानकारी मिल जाती है। डा. मनोज सक्सेना ने कहा कि कई महिलाओं में बार बार गर्भपात हो जाता है। ऐसे स्थिति में जांचें जरूरी हैं, ताकि वजह का पता लगाया जा सके। उसी अनुसार इलाज हो सके। सीएमई की संचालन डा. निधि ठाकुर और अध्यक्षता डा. रिचा गंगल ने की। इस दौरान डा. अर्चना अग्रवाल, डा. सबा असद, डा. नीना मोहन, डा. सुदीप कौर, डा. लीना चौहान, डा. शाजिया मोनिश, डा. पूनम सिंह समेत दर्जनों महिला चिकित्सक मौजूद रही।
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