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मुस्लिम उस्ताद की विरासत को संभाल रहीं भूमिका
Updated Mon, 08 Oct 2018 01:44 AM IST
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मुरादाबाद।
सांस्कृतिक विरासत पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ती हैं। इसी बात को चरितार्थ कर रही हैं कंजरी सराय निवासी भूमिका यादव। अंसार कालेज के शिक्षक अजीमुद्दीन खान ने रामलीला का जो ज्ञान भूमिका के पिता कृष्णगोपाल को दिया था, उसे वह अब नई ऊंचाइयों पर ले जा रही हैं। पिछले पांच वर्ष से वह न सिर्फ रामलीला के प्रबंधन का कार्य देखती हैं, बल्कि महिला पात्रों की भूमिका में महिलाओं से ही अभिनय करवा रही हैं। खुद पीछे बैठकर कमेंट्री करती हैं, ताकि मंचन में किसी प्रकार से कोई असहज न हो सकें।
भूमिका ने बताया कि उनके पिता कृष्ण गोपाल को बचपन से ही संगीत से लगाव था। वर्ष 1982 में वह अजीमुद्दीन के संपर्क में आए और उन्हीं के होकर रह गए। अजीमुद्दीन ने रामलीला की जिम्मेदारी पिता को सौंप दी। मर्यादा कला मंच का गठन कर उन्होंने दिल्ली, देहरादून, मुंबई के अलावा अन्य स्थानों पर रामलीला का मंचन किया है। करीब पांच वर्ष पहले पिता को जब एक व्यक्ति की जरूरत महसूस हुई, जो इस विरासत को आगे बढ़ा सके तो भूमिका ने इसे अपने कंधों पर ले लिया। करीब 45 कलाकारों की कमेटी में 15 महिलाएं हैं, जो विभिन्न पात्रों की अदाकारी करती हैं। सभी कलाकारों का मेकअप करने से लेकर, नृत्य और संवाद का अभ्यास खुद ही कराती हैं। उनकी रामलीला में कैकेयी का किरदार निभाने वाली गुरहट्टी निवासी चांदनी ने बताया कि अभी तक साथी युवती इंदू सीता का किरदार करती थी। इस वर्ष उनकी शादी है। ऐसे में आने वाले दिनों में सीता की भूमिका वह खुद निभाएंगी। उन्होंने बताया कि जब वह किरदार में होती हैं तो वास्तविक अस्तित्व को भी भूल जाती हैं। ऐसा लगता है, जैसे वास्तविकता मैं वह कैकेयी हैं।
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सांस्कृतिक विरासत पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ती हैं। इसी बात को चरितार्थ कर रही हैं कंजरी सराय निवासी भूमिका यादव। अंसार कालेज के शिक्षक अजीमुद्दीन खान ने रामलीला का जो ज्ञान भूमिका के पिता कृष्णगोपाल को दिया था, उसे वह अब नई ऊंचाइयों पर ले जा रही हैं। पिछले पांच वर्ष से वह न सिर्फ रामलीला के प्रबंधन का कार्य देखती हैं, बल्कि महिला पात्रों की भूमिका में महिलाओं से ही अभिनय करवा रही हैं। खुद पीछे बैठकर कमेंट्री करती हैं, ताकि मंचन में किसी प्रकार से कोई असहज न हो सकें।
भूमिका ने बताया कि उनके पिता कृष्ण गोपाल को बचपन से ही संगीत से लगाव था। वर्ष 1982 में वह अजीमुद्दीन के संपर्क में आए और उन्हीं के होकर रह गए। अजीमुद्दीन ने रामलीला की जिम्मेदारी पिता को सौंप दी। मर्यादा कला मंच का गठन कर उन्होंने दिल्ली, देहरादून, मुंबई के अलावा अन्य स्थानों पर रामलीला का मंचन किया है। करीब पांच वर्ष पहले पिता को जब एक व्यक्ति की जरूरत महसूस हुई, जो इस विरासत को आगे बढ़ा सके तो भूमिका ने इसे अपने कंधों पर ले लिया। करीब 45 कलाकारों की कमेटी में 15 महिलाएं हैं, जो विभिन्न पात्रों की अदाकारी करती हैं। सभी कलाकारों का मेकअप करने से लेकर, नृत्य और संवाद का अभ्यास खुद ही कराती हैं। उनकी रामलीला में कैकेयी का किरदार निभाने वाली गुरहट्टी निवासी चांदनी ने बताया कि अभी तक साथी युवती इंदू सीता का किरदार करती थी। इस वर्ष उनकी शादी है। ऐसे में आने वाले दिनों में सीता की भूमिका वह खुद निभाएंगी। उन्होंने बताया कि जब वह किरदार में होती हैं तो वास्तविक अस्तित्व को भी भूल जाती हैं। ऐसा लगता है, जैसे वास्तविकता मैं वह कैकेयी हैं।
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