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मुरादाबाद की तलवार और गदाओं से देश भर में ‘युद्ध’
Updated Mon, 08 Oct 2018 01:44 AM IST
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मुरादाबाद।
पीतल नगरी में तैयार गदा, ढाल, तलवार और फरसा देशभर में पसंद किए जा रहे हैं। यहां से रामलीला के सीजन में इनकी मांग देशभर में बढ़ जाती है। गदा, ढाल और फरसा पीतल के तैयार किए जाते हैं, जबकि लोहे की तलवार पर पीतल का हत्था चढ़ाकर उसको आकर्षक और सुविधाजनक बनाया जाता है। पूरे देश की रामलीलाओं में यहीं के बने उपकरणों से राम-रावण की सेनाओं का युद्ध होता है। महानगर से उत्तराखंड और कुमाऊं को इनकी सीधे आपूर्ति की जा रही है, जबकि देश के अन्य प्रांतों में वाया दिल्ली इनको भेजा जाता है।
रामलीला शुरू होते ही पीतल नगरी का कारोबार नए रूप में आ जाता है। यहां के बाजारों में दिखने लगती है गदा, तलवार और ढाल। इनको खरीदने के लिए रामलीला कमेटी के सदस्य और रामलीला कलाकारों की भीड़ लग जाती है। रामलीला मंचन के सामान की बिक्री वाले बाजार में डेढ़ हजार से लेकर पांच हजार रुपये तक की गदा उपलब्ध है। पांच सौ रुपये से तीन हजार रुपये तक की तलवार मिल रही हैं। पीतल के ढाल, बाजूबंद, मुकुट, कंध कवच, सीने व पीठ के सुरक्षा कवच बाजार में उपलब्ध हैं। उत्तराखंड और कुमाऊं क्षेत्र के बाजार को इनकी सीधे सप्लाई की जा रही है। सूबे के कई जिलों के खरीदार यहां आ रहे हैं।
रामलीला के सामान के मुख्य कारोबारी अभिषेक कुमार ने बताया कि इन सामानों को महीनों पहले से बनाया जाता है। इनकी बिक्री के मुख्य केंद्र ज्यादातर दुकानदारों ने दिल्ली में बनाए हुए हैं। मांग के अनुसार दिल्ली में सामान भेजा जा रहा है। मणिपुर, राजस्थान और चंडीगढ़ का सामान भी बाजार में उपलब्ध है, लेकिन मुरादाबाद के सामान जैसी फिनिसिंग उनमें नहीं है। यही कारण है कि मुरादाबाद का रामलीला का सामान बाजार में छाया हुआ है। यह कलाकारों की पहली पसंद बन रहा है।
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पीतल नगरी में तैयार गदा, ढाल, तलवार और फरसा देशभर में पसंद किए जा रहे हैं। यहां से रामलीला के सीजन में इनकी मांग देशभर में बढ़ जाती है। गदा, ढाल और फरसा पीतल के तैयार किए जाते हैं, जबकि लोहे की तलवार पर पीतल का हत्था चढ़ाकर उसको आकर्षक और सुविधाजनक बनाया जाता है। पूरे देश की रामलीलाओं में यहीं के बने उपकरणों से राम-रावण की सेनाओं का युद्ध होता है। महानगर से उत्तराखंड और कुमाऊं को इनकी सीधे आपूर्ति की जा रही है, जबकि देश के अन्य प्रांतों में वाया दिल्ली इनको भेजा जाता है।
रामलीला शुरू होते ही पीतल नगरी का कारोबार नए रूप में आ जाता है। यहां के बाजारों में दिखने लगती है गदा, तलवार और ढाल। इनको खरीदने के लिए रामलीला कमेटी के सदस्य और रामलीला कलाकारों की भीड़ लग जाती है। रामलीला मंचन के सामान की बिक्री वाले बाजार में डेढ़ हजार से लेकर पांच हजार रुपये तक की गदा उपलब्ध है। पांच सौ रुपये से तीन हजार रुपये तक की तलवार मिल रही हैं। पीतल के ढाल, बाजूबंद, मुकुट, कंध कवच, सीने व पीठ के सुरक्षा कवच बाजार में उपलब्ध हैं। उत्तराखंड और कुमाऊं क्षेत्र के बाजार को इनकी सीधे सप्लाई की जा रही है। सूबे के कई जिलों के खरीदार यहां आ रहे हैं।
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रामलीला के सामान के मुख्य कारोबारी अभिषेक कुमार ने बताया कि इन सामानों को महीनों पहले से बनाया जाता है। इनकी बिक्री के मुख्य केंद्र ज्यादातर दुकानदारों ने दिल्ली में बनाए हुए हैं। मांग के अनुसार दिल्ली में सामान भेजा जा रहा है। मणिपुर, राजस्थान और चंडीगढ़ का सामान भी बाजार में उपलब्ध है, लेकिन मुरादाबाद के सामान जैसी फिनिसिंग उनमें नहीं है। यही कारण है कि मुरादाबाद का रामलीला का सामान बाजार में छाया हुआ है। यह कलाकारों की पहली पसंद बन रहा है।
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