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मुरादाबाद में भी असुरक्षित रेल सफर
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मुरादाबाद।
बिहार के बैशाली जनपद में रविवार सुबह हुए रेल हादसे से जर्जर रेल पटरियों की पोल खुल गई। बैशाली के जैसे ही मुरादाबाद रेल मंडल की रेल पटरियां भी बेहद कमजोर हैं। इन पटरियों पर ट्रेनों को दौड़ाना खतरा भरा है। दो माह पहले मुरादाबाद पहुंची सेफ्टी ऑडिट टीम ने भी अपने निरीक्षण के बाद यहां की पटरियों को कमजोर बताया था। इतना ही नहीं मंडल में एक माह में मंडल भर में दस से पंद्रह जगह रेल पटरियां चटकने के मामले सामने आ जाते हैं। जबकि पांच से सात मामले तो ऐसे होते हैं जहां से ट्रेन से गुजर जाती हैं।
मंडल के धमौरा और दुगन के बीच पैसेंजर ट्रेन के आठ डिब्बे पटरी से उतर गए थे। हादसे के समय पैसेंजर ट्रेन के डिब्बे दिल्ली से लखनऊ मरम्मत के लिए भेजे जा रहे थे। गनीमत रही कि ट्रेन खाली थी। वरना बड़ा हादसा हो सकता था। इस हादसे की प्राथमिकी जांच में ही सामने आ गया कि हादसा रेल पटरी टूटी होने की वजह से हुआ था। इस हादसे के एक सप्ताह बाद ही धमौरा और दुगन सेक्शन में रेल पटरी दोबारा रेल पटरी चटकने का मामला सामने आया था। गनीमत रही कि समय रहते टूटी पटरी को देख लिया गया था। इसकी जानकारी से रेल प्रशासन में हड़कंप मच गया था। 28 अगस्त को मंडल में पांच जगह कैलसा, रायसी, चुड़ियाला, काफूरपुर और हबीबवाला में रेल पटरियां चटक गई थीं। इसके अलावा ग्यारह जनवरी 10 जनवरी को रसोइया और पीतांबरपुर के बीच रेल सियालदह एक्सप्रेस टूटी पटरी से गुजर गई थी। गनीमत रही कि ट्रेन बेपटरी नहीं हुई। ग्यारह जनवरी को चुड़ियाला और इकबालपुर के पास नैनी दून जन शताब्दी टूटी पटरी से गुजरी थी। महरोली और नेरी के बीच पैसेंजर ट्रेन टूटी पटरी से गुजरी थी। डीआरएम अजय कुमार सिंघल ने बताया कि मुरादाबाद रेल मंडल में पुरानी हो चुकी रेल पटरियों को हटाकर उनकी वजह नई पटरियां बिछाई जा रही हैं। मंडल में 720 किलोमीटर रेलवे ट्रैक बदला जाना है। इस साल 375 किलोमीटर का लक्ष्य तय किया गया है।
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बिहार के बैशाली जनपद में रविवार सुबह हुए रेल हादसे से जर्जर रेल पटरियों की पोल खुल गई। बैशाली के जैसे ही मुरादाबाद रेल मंडल की रेल पटरियां भी बेहद कमजोर हैं। इन पटरियों पर ट्रेनों को दौड़ाना खतरा भरा है। दो माह पहले मुरादाबाद पहुंची सेफ्टी ऑडिट टीम ने भी अपने निरीक्षण के बाद यहां की पटरियों को कमजोर बताया था। इतना ही नहीं मंडल में एक माह में मंडल भर में दस से पंद्रह जगह रेल पटरियां चटकने के मामले सामने आ जाते हैं। जबकि पांच से सात मामले तो ऐसे होते हैं जहां से ट्रेन से गुजर जाती हैं।
मंडल के धमौरा और दुगन के बीच पैसेंजर ट्रेन के आठ डिब्बे पटरी से उतर गए थे। हादसे के समय पैसेंजर ट्रेन के डिब्बे दिल्ली से लखनऊ मरम्मत के लिए भेजे जा रहे थे। गनीमत रही कि ट्रेन खाली थी। वरना बड़ा हादसा हो सकता था। इस हादसे की प्राथमिकी जांच में ही सामने आ गया कि हादसा रेल पटरी टूटी होने की वजह से हुआ था। इस हादसे के एक सप्ताह बाद ही धमौरा और दुगन सेक्शन में रेल पटरी दोबारा रेल पटरी चटकने का मामला सामने आया था। गनीमत रही कि समय रहते टूटी पटरी को देख लिया गया था। इसकी जानकारी से रेल प्रशासन में हड़कंप मच गया था। 28 अगस्त को मंडल में पांच जगह कैलसा, रायसी, चुड़ियाला, काफूरपुर और हबीबवाला में रेल पटरियां चटक गई थीं। इसके अलावा ग्यारह जनवरी 10 जनवरी को रसोइया और पीतांबरपुर के बीच रेल सियालदह एक्सप्रेस टूटी पटरी से गुजर गई थी। गनीमत रही कि ट्रेन बेपटरी नहीं हुई। ग्यारह जनवरी को चुड़ियाला और इकबालपुर के पास नैनी दून जन शताब्दी टूटी पटरी से गुजरी थी। महरोली और नेरी के बीच पैसेंजर ट्रेन टूटी पटरी से गुजरी थी। डीआरएम अजय कुमार सिंघल ने बताया कि मुरादाबाद रेल मंडल में पुरानी हो चुकी रेल पटरियों को हटाकर उनकी वजह नई पटरियां बिछाई जा रही हैं। मंडल में 720 किलोमीटर रेलवे ट्रैक बदला जाना है। इस साल 375 किलोमीटर का लक्ष्य तय किया गया है।
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