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अल नीनो और ग्लोबल वार्मिंग ने गर्म किया नवंबर-Cordination
Updated Wed, 28 Nov 2018 02:27 AM IST
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मुरादाबाद।
‘सर्दी में भी गर्मी का अहसास’, यह किसी गर्म कपड़े के विज्ञापन की टैग लाइन नहीं, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तर भारत के मौसम के बारे में लोग कह रहे हैं। दोपहर की खिली धूप पसीना निकाल रही है। नवंबर की विदाई होनी है और पारा 30 डिग्री सेल्सियस से नीचे नहीं जा रहा है। अधिकतम तापमान सामान्य से पांच डिग्री ज्यादा चल रहा है। लोगबाग हैरान हैं, किसान परेशान। गर्म कपड़ों का कारोबार भी मंदा पड़ा है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि अलनीनो की सक्रियता और ग्लोबल वार्मिंग ज्यादा तापमान की वजह हो सकती है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में नवंबर माह में पारा लुढ़कने लगता है। महीने के आखीर तक जाते-जाते यह 24-25 डिग्री तक हो जाता है, कभी तो इससे भी कम 20 डिग्री तक। लेकिन इस बार तापमान लगातार सामान्य से चार-पांच डिग्री ज्यादा और स्थिर बना हुआ है। आसमान साफ होने से न्यूनतम तापमान में गिरावट आती है लेकिन हैरानी की बात यह है कि इस बार न्यूनतम तापमान भी लगभग 3 डिग्री ज्यादा बना हुआ है। पश्चिमी विक्षोभ या स्थानीय कारकों से भी बारिश नहीं हो रही है। कोहरा भी अपेक्षाकृत अभी कम ही पड़ रहा है। मौसम की बेरुखी का असर रबी की फसलों खासतौर पर गेहूं के उत्पादन पर पड़ने की आशंका है। विशेषज्ञों के अनुसार ज्यादा तापमान में गेहूं को न सिर्फ ज्यादा सिंचाई की जरूरत होती है बल्कि दाने भी पतले होने लगते हैं।
अगले तीन दिन तक मौसम में तब्दीली की संभावना नहीं
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार अगले तीन दिनों तक मौसम के स्थिर रहने के आसार हैं। पश्चिमी विक्षोभ जैसी स्थिति भी नहीं बन रही है। इसलिए ऊंचा तापमान बना रहेगा।
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क्या है अल निनो, कैसे डालता है असर
अल निनो स्पेनिश शब्द है जिसका अर्थ होता है छोटा बच्चा। इसे बाल यीशु के तौर पर रखा गया है क्योंकि यह क्रिसमस के आसपास ही सक्रिय होता है। प्रशांत महासागर में बनने वाले मौसम चक्र के अनुसार पश्चिमी क्षेत्र से पूर्वी क्षेत्र की ओर गर्म धाराएं बहने लगती हैं। इससे मौसम गर्म हो जाता है। मानसूनी बादलों पर भी इसका असर पड़ता है और बारिश कम होती है। भारत में भी यह खासा असर डालता है। यह हर दस साल में दो बार तो कई बार तीन बार तक सक्रिय होता है।
तापमान के सामान्य से ज्यादा होने की कोई एक वजह नहीं बताई जा सकती। दरअसल मौसम विज्ञान गणित की तरह का विज्ञान नहीं है। मौसम की कई घटनाएं अबूझ होती हैं। लेकिन इस वक्त अल निनो की सक्रियता और ग्लोबल वार्मिंग को बढ़े तापमान का कारण कह सकते हैं। फिलहाल दो-तीन दिन तक मौसम में बदलाव की संभावना नहीं है।
डॉ एक श्रीवास्तव,
प्रभारी मौसम मानीटरिंग और विश्लेषण, भारतीय मौसम विज्ञान विभाग
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‘सर्दी में भी गर्मी का अहसास’, यह किसी गर्म कपड़े के विज्ञापन की टैग लाइन नहीं, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तर भारत के मौसम के बारे में लोग कह रहे हैं। दोपहर की खिली धूप पसीना निकाल रही है। नवंबर की विदाई होनी है और पारा 30 डिग्री सेल्सियस से नीचे नहीं जा रहा है। अधिकतम तापमान सामान्य से पांच डिग्री ज्यादा चल रहा है। लोगबाग हैरान हैं, किसान परेशान। गर्म कपड़ों का कारोबार भी मंदा पड़ा है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि अलनीनो की सक्रियता और ग्लोबल वार्मिंग ज्यादा तापमान की वजह हो सकती है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में नवंबर माह में पारा लुढ़कने लगता है। महीने के आखीर तक जाते-जाते यह 24-25 डिग्री तक हो जाता है, कभी तो इससे भी कम 20 डिग्री तक। लेकिन इस बार तापमान लगातार सामान्य से चार-पांच डिग्री ज्यादा और स्थिर बना हुआ है। आसमान साफ होने से न्यूनतम तापमान में गिरावट आती है लेकिन हैरानी की बात यह है कि इस बार न्यूनतम तापमान भी लगभग 3 डिग्री ज्यादा बना हुआ है। पश्चिमी विक्षोभ या स्थानीय कारकों से भी बारिश नहीं हो रही है। कोहरा भी अपेक्षाकृत अभी कम ही पड़ रहा है। मौसम की बेरुखी का असर रबी की फसलों खासतौर पर गेहूं के उत्पादन पर पड़ने की आशंका है। विशेषज्ञों के अनुसार ज्यादा तापमान में गेहूं को न सिर्फ ज्यादा सिंचाई की जरूरत होती है बल्कि दाने भी पतले होने लगते हैं।
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अगले तीन दिन तक मौसम में तब्दीली की संभावना नहीं
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार अगले तीन दिनों तक मौसम के स्थिर रहने के आसार हैं। पश्चिमी विक्षोभ जैसी स्थिति भी नहीं बन रही है। इसलिए ऊंचा तापमान बना रहेगा।
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क्या है अल निनो, कैसे डालता है असर
अल निनो स्पेनिश शब्द है जिसका अर्थ होता है छोटा बच्चा। इसे बाल यीशु के तौर पर रखा गया है क्योंकि यह क्रिसमस के आसपास ही सक्रिय होता है। प्रशांत महासागर में बनने वाले मौसम चक्र के अनुसार पश्चिमी क्षेत्र से पूर्वी क्षेत्र की ओर गर्म धाराएं बहने लगती हैं। इससे मौसम गर्म हो जाता है। मानसूनी बादलों पर भी इसका असर पड़ता है और बारिश कम होती है। भारत में भी यह खासा असर डालता है। यह हर दस साल में दो बार तो कई बार तीन बार तक सक्रिय होता है।
तापमान के सामान्य से ज्यादा होने की कोई एक वजह नहीं बताई जा सकती। दरअसल मौसम विज्ञान गणित की तरह का विज्ञान नहीं है। मौसम की कई घटनाएं अबूझ होती हैं। लेकिन इस वक्त अल निनो की सक्रियता और ग्लोबल वार्मिंग को बढ़े तापमान का कारण कह सकते हैं। फिलहाल दो-तीन दिन तक मौसम में बदलाव की संभावना नहीं है।
डॉ एक श्रीवास्तव,
प्रभारी मौसम मानीटरिंग और विश्लेषण, भारतीय मौसम विज्ञान विभाग