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ठेकेदार यूनियन ने नहीं खुलने दिया एक्सईएन आफिस
Updated Sat, 28 Apr 2018 01:52 AM IST
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मुरादाबाद।
नगर निगम के ठेकेदारों ने शुक्रवार को निर्माण विभाग के एक्सईएन का आफिस नहीं खुलने दिया। आफिस के गेट पर धरना देकर बैठे ठेकेदारों ने जमकर नारेबाजी की और वार्ता को आए मुख्य अभियंता को वापस लौटा दिया। शाम को महापौर केआग्रह पर धरना समाप्त कर दिया गया।
नगर आयुक्त द्वारा निरस्त की गई निविदाओं को प्रभारी नगर आयुक्त द्वारा दोबारा से जारी करने के विरोध में ठेकेदार यूनियन शुक्रवार को दूसरे दिन भी हड़ताल पर रही। ठेकेदारों ने एक्सईएन आशीष शुक्ला के आफिस के गेट पर धरना दिया। यहां जमकर नारेबाजी की गई। ठेकेदारों ने निगम में निविदाओं का काम न होने देने की घोषणा करते हुए कई अधिकारियों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया। ठेकेदारों से वार्ता करने पहुंचे मुख्य अभियंता सुनील केसरी ने पूरे मामले के लिए एक्सईएन आशीष शुक्ला को दोषी ठहराया। उन्होंने कहा कि एक्सईएन के फाइल प्रस्तुत करने पर ही मेरे द्वारा निविदाओं पर निर्णय लिया गया। ठेकेदार निविदा निरस्त करने की मांग पर अड़े रहे। ठेकेदार यूनियन के अध्यक्ष शाने अली का आरोप था कि नोटिस जारी कर अफसर दमनात्मक नीति अपना रहे हैं। जब काम दो साल से शुरू नहीं किए गए थे तो बृहस्पतिवार को ही नोटिस जारी क्यों जारी किए गए। महापौर केसमझाने पर शाम को धरना समाप्त कर दिया गया। धरने पर सतीश सिंह, लखपत सिंह, अनिल सैनी, प्रदीप कुमार, अजय पाल, एसपी गुप्ता, मुकेश गुप्ता, राकेश गुप्ता, मोहसिन, रियासत हुसैन, महेंद्र कुमार व संजय सेठ आदि शामिल रहे।
मुख्य अभियंता और एक्सईएन आए आमने सामने
ठेकेदारों के मोर्चा खोलने के बाद मुख्य अभियंता और एक्सईएन दोनों आमने-सामने आ गए हैं। निरस्त किए गए टेंडरों को दोबारा से जारी कराने की फाइल एक्सईएन द्वारा अग्रसारित करने का आरोप जहां मुख्य अभियंता सुनील केसरी द्वारा लगाया गया, वहीं एक्सईएन आशीष शुक्ला खुद को निर्दोष बता रहे हैं। उनका कहना है कि फाइल प्रस्तुत करने का काम मेरा है, लेकिन नियमानुसार निर्णय लेना मुख्य अभियंता का काम है। फाइल मांगे जाने पर प्रस्तुत करना मेरा दायित्व है। इन आरोप-प्रत्यारोपों को ठेकेदारों से पीछा छुड़ाने के तौर पर देखा जा रहा है।
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सभी ठेकेदार निगम परिवार के सदस्य हैं। उनको समझाकर धरना समाप्त करा दिया गया है। सभी मिलकर महानगर को स्मार्ट सिटी बनाने में सहयोग करेंगे। जारी निविदाओं को वापस नहीं लिया जाएगा। ऐसा करने से निगम को 50 लाख का नुकसान उठाना पड़ेगा। ठकेदार यूनियन ने मेरे आग्रह पर धरना समाप्त कर दिया है।
- विनोद अग्रवाल, महापौर।
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नगर निगम के ठेकेदारों ने शुक्रवार को निर्माण विभाग के एक्सईएन का आफिस नहीं खुलने दिया। आफिस के गेट पर धरना देकर बैठे ठेकेदारों ने जमकर नारेबाजी की और वार्ता को आए मुख्य अभियंता को वापस लौटा दिया। शाम को महापौर केआग्रह पर धरना समाप्त कर दिया गया।
नगर आयुक्त द्वारा निरस्त की गई निविदाओं को प्रभारी नगर आयुक्त द्वारा दोबारा से जारी करने के विरोध में ठेकेदार यूनियन शुक्रवार को दूसरे दिन भी हड़ताल पर रही। ठेकेदारों ने एक्सईएन आशीष शुक्ला के आफिस के गेट पर धरना दिया। यहां जमकर नारेबाजी की गई। ठेकेदारों ने निगम में निविदाओं का काम न होने देने की घोषणा करते हुए कई अधिकारियों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया। ठेकेदारों से वार्ता करने पहुंचे मुख्य अभियंता सुनील केसरी ने पूरे मामले के लिए एक्सईएन आशीष शुक्ला को दोषी ठहराया। उन्होंने कहा कि एक्सईएन के फाइल प्रस्तुत करने पर ही मेरे द्वारा निविदाओं पर निर्णय लिया गया। ठेकेदार निविदा निरस्त करने की मांग पर अड़े रहे। ठेकेदार यूनियन के अध्यक्ष शाने अली का आरोप था कि नोटिस जारी कर अफसर दमनात्मक नीति अपना रहे हैं। जब काम दो साल से शुरू नहीं किए गए थे तो बृहस्पतिवार को ही नोटिस जारी क्यों जारी किए गए। महापौर केसमझाने पर शाम को धरना समाप्त कर दिया गया। धरने पर सतीश सिंह, लखपत सिंह, अनिल सैनी, प्रदीप कुमार, अजय पाल, एसपी गुप्ता, मुकेश गुप्ता, राकेश गुप्ता, मोहसिन, रियासत हुसैन, महेंद्र कुमार व संजय सेठ आदि शामिल रहे।
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मुख्य अभियंता और एक्सईएन आए आमने सामने
ठेकेदारों के मोर्चा खोलने के बाद मुख्य अभियंता और एक्सईएन दोनों आमने-सामने आ गए हैं। निरस्त किए गए टेंडरों को दोबारा से जारी कराने की फाइल एक्सईएन द्वारा अग्रसारित करने का आरोप जहां मुख्य अभियंता सुनील केसरी द्वारा लगाया गया, वहीं एक्सईएन आशीष शुक्ला खुद को निर्दोष बता रहे हैं। उनका कहना है कि फाइल प्रस्तुत करने का काम मेरा है, लेकिन नियमानुसार निर्णय लेना मुख्य अभियंता का काम है। फाइल मांगे जाने पर प्रस्तुत करना मेरा दायित्व है। इन आरोप-प्रत्यारोपों को ठेकेदारों से पीछा छुड़ाने के तौर पर देखा जा रहा है।
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सभी ठेकेदार निगम परिवार के सदस्य हैं। उनको समझाकर धरना समाप्त करा दिया गया है। सभी मिलकर महानगर को स्मार्ट सिटी बनाने में सहयोग करेंगे। जारी निविदाओं को वापस नहीं लिया जाएगा। ऐसा करने से निगम को 50 लाख का नुकसान उठाना पड़ेगा। ठकेदार यूनियन ने मेरे आग्रह पर धरना समाप्त कर दिया है।
- विनोद अग्रवाल, महापौर।