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अफसरों के इंतजार में खंडहर बन गए एमडीए के आवास
Updated Tue, 09 Oct 2018 02:20 AM IST
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मुरादाबाद।
नया मुरादाबाद के सेक्टर छह में करीब 15 वर्ष पहले बनीं प्राधिकरण अफसरों की कोठियां इंतजार करते - करते खंडहर हो चली हैं। इनकी छतें जवाब देने लगी हैं। खिड़की - दरवाजे कब के साथ छोड़ गए। सैकड़ों वर्ग मीटर में फैले इनके परिसर झाड़ियों में छुपकर रह गए हैं। आफिसर्स कालोनी से सटी कर्मचारी कालोनी का हाल इससे भी बुरा है। प्राधिकरण न तो यहां शिफ्ट कर रहा है, न ही कालोनी को बेचने की कोई कवायद शुरू हुई है।
मुरादाबाद विकास प्राधिकरण ने वर्ष 2000 में नया मुरादाबाद योजना विकसित की थी। चौड़ी सड़कों के मामले में यह योजना प्रदेश के बड़े - बड़े शहरों की आवासीय योजनाओं को भी मात देती है। लेकिन विकसित होने के 18 वर्ष बाद भी यह योजना बस नहीं सकी और जंगल की शक्ल में है। नया मुरादाबाद योजना विकसित करते समय अफसरों ने इसे बसाने के लिए कई कवायद की थीं। जंगल को आबाद करने के नजरिये से यहां प्राधिकरण अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए आवासीय कालोनी बनाई गई थी। ताकि अफसरों और कर्मचारियों के यहां शिफ्ट होने से आसपास बाकी लोग भी आ सकें। इसी योजना में दिल्ली रोड पर एमडीए का आफिस भी बनाया गया था। लेकिन बनने के करीब डेढ़ दशक बाद भी यहां न तो एमडीए का कार्यालय शिफ्ट हुआ और न ही आवासों में रहने कोई अधिकारी - कर्मचारी आया। वर्ष 2009 में तत्कालीन उपाध्यक्ष ने आफिस में काम शुरू किया था लेकिन स्टाफ के आंदोलित होने की वजह से नए आफिस में महज एक ही दिन काम हो सका था। कांठ रोड पर एमडीए आफिस और पास में ही आफिसर्स आवास व कर्मचारी कालोनी होने की वजह एमडीए स्टाफ दिल्ली रोड पर नहीं आना चाहता।
अफसरों और कर्मचारियों की इस खींचतान में पब्लिक की मेहनत की कमाई नया मुरादाबाद में खंडहर की शक्ल ले रही है। एमडीए के अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए बनाए गए आवास और दफ्तर दोनों खंडहर हो चले हैं। एमडीए की ओर से आवासीय कालोनी को बेचने के लिए भी अभी कोई कवायद शुरू नहीं की गई है।
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नया मुरादाबाद के सेक्टर छह में करीब 15 वर्ष पहले बनीं प्राधिकरण अफसरों की कोठियां इंतजार करते - करते खंडहर हो चली हैं। इनकी छतें जवाब देने लगी हैं। खिड़की - दरवाजे कब के साथ छोड़ गए। सैकड़ों वर्ग मीटर में फैले इनके परिसर झाड़ियों में छुपकर रह गए हैं। आफिसर्स कालोनी से सटी कर्मचारी कालोनी का हाल इससे भी बुरा है। प्राधिकरण न तो यहां शिफ्ट कर रहा है, न ही कालोनी को बेचने की कोई कवायद शुरू हुई है।
मुरादाबाद विकास प्राधिकरण ने वर्ष 2000 में नया मुरादाबाद योजना विकसित की थी। चौड़ी सड़कों के मामले में यह योजना प्रदेश के बड़े - बड़े शहरों की आवासीय योजनाओं को भी मात देती है। लेकिन विकसित होने के 18 वर्ष बाद भी यह योजना बस नहीं सकी और जंगल की शक्ल में है। नया मुरादाबाद योजना विकसित करते समय अफसरों ने इसे बसाने के लिए कई कवायद की थीं। जंगल को आबाद करने के नजरिये से यहां प्राधिकरण अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए आवासीय कालोनी बनाई गई थी। ताकि अफसरों और कर्मचारियों के यहां शिफ्ट होने से आसपास बाकी लोग भी आ सकें। इसी योजना में दिल्ली रोड पर एमडीए का आफिस भी बनाया गया था। लेकिन बनने के करीब डेढ़ दशक बाद भी यहां न तो एमडीए का कार्यालय शिफ्ट हुआ और न ही आवासों में रहने कोई अधिकारी - कर्मचारी आया। वर्ष 2009 में तत्कालीन उपाध्यक्ष ने आफिस में काम शुरू किया था लेकिन स्टाफ के आंदोलित होने की वजह से नए आफिस में महज एक ही दिन काम हो सका था। कांठ रोड पर एमडीए आफिस और पास में ही आफिसर्स आवास व कर्मचारी कालोनी होने की वजह एमडीए स्टाफ दिल्ली रोड पर नहीं आना चाहता।
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अफसरों और कर्मचारियों की इस खींचतान में पब्लिक की मेहनत की कमाई नया मुरादाबाद में खंडहर की शक्ल ले रही है। एमडीए के अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए बनाए गए आवास और दफ्तर दोनों खंडहर हो चले हैं। एमडीए की ओर से आवासीय कालोनी को बेचने के लिए भी अभी कोई कवायद शुरू नहीं की गई है।
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