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मासिक आय 4,000 और किश्त भरो 7,000?
वसुंधरा/सौरभ पांडेय
Updated Wed, 26 Dec 2012 09:23 AM IST
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आवास विकास परिषद की सस्ते मकान देने की योजना ने अब गरीबों के सामने बड़ी परेशानी खड़ी कर दी है। दरअसल ईडब्ल्यूएस फ्लैट के लिए परिषद ने किश्तों का जो डिमांड नोटिस भेजा है उसकी राशि आवंटियों की आय से ज्यादा है। अब सवाल है कि आवंटी अपनी आय से अधिक किश्त कैसे जमा कर सकेंगे?
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परिषद ने 2009 में सिद्धार्थ विहार में 1984 फ्लैट लांच किए थे। दुर्बल आय वर्ग के इन फ्लैटों में वही आवेदन कर सकते थे जिनकी वार्षिक आय 50 हजार रुपये से कम हो। आवेदकों से शुरुआत में 25 हजार रुपये जमा कराए थे। अब सभी फ्लैटों का ड्रा होने के बाद लोगों को डिमांड नोटिस जारी किया गया है। इसमें एकमुश्त करीब 75 हजार रुपये और उसके बाद करीब सात हजार रुपये मासिक की किश्त भरने का नियम है।
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परिषद ने फ्लैट उन लोगों को दिए हैं जिनकी मासिक आय चार हजार रुपये या इससे कम है। ऐसे में ये लोग सात हजार रुपये प्रतिमाह की किश्त कैसे भर सकते हैं? उधर आवास विकास के ज्वाइंट कमिश्नर विमल कुमार शर्मा का कहना है कि नियमों के अनुसार डिमांड नोटिस जारी किया गया है। नियमों को बदलना उनके में हाथ नहीं। उन्होंने भी आय कम और किश्त ज्यादा होने की बात को माना है।
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करीब सवा लाख रुपये बढ़ा दिया रेट
गरीबों के फ्लैटों की कीमत में उतार चढ़ाव जारी है। जिन फ्लैटों की अनुमानित लागत करीब साढ़े छह लाख थी। उनकी कीमत पिछले माह ड्रा के बाद करीब सवा लाख रुपये बढ़ा दी गई है। परिषद गरीबों के मकानों पर भी नफा-नुकसान का खेल करने में लगा है।
अपात्रों को दिए गए फ्लैट
सूत्रों का कहना है कि फ्लैट बिना आय प्रमाण पत्रों की वेरिफिकेशन के ही आवंटित कर दिए गए हैं। यही कारण है कि आय से अधिक किश्तें होने के बाद भी कोई इसका विरोध नहीं कर रहा है। योजना में गड़बड़ी की कई शिकायतें भी हो चुकी हैं।