क्या आप एक ऐसे मंदिर के बारे में जानते हैं जिसके सामने आधुनिक विज्ञान, बड़े-बड़े सुपर कंप्यूटर और मौसम वैज्ञानिकों की अत्याधुनिक भविष्यवाणियां भी घुटने टेक देती हैं? एक ऐसा मंदिर, जो आसमान में काले बादलों का नामोनिशान छाने से कई दिन पहले ही यह बता देता है कि इस वर्ष देश में मानसून का मिजाज कैसा रहेगा!
उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में भीतरगांव ब्लॉक के बेहटा बुजुर्ग गांव में स्थित अति प्राचीन और चमत्कारी भगवान जगन्नाथ जी का मंदिर इन दिनों फिर से पूरी दुनिया में कौतूहल और आस्था का सबसे बड़ा केंद्र बना हुआ है।
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कानपुर का मानसून मंदिर
- फोटो : वीडिओ ग्रैब
तपती दोपहरी, आसमान से बरसती आग और नौतपा की चिलचिलाती गर्मी के बीच, जहां आम इंसान और पशु-पक्षी बेहाल हैं, वहीं इस रहस्यमयी मंदिर ने देश में मानसूनी बारिश नजदीक होने का सबसे सटीक और पुख्ता संकेत दे दिया है। मंदिर के गर्भगृह के शिखर से बीती 26 मई से पानी की इक्का-दुक्का बूंदें टपकना शुरू हो गई हैं, जिसने ग्रामीणों के चेहरों पर खुशी ला दी है।
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कानपुर का मानसून मंदिर
- फोटो : amar ujala
नौतपा के बीच मिला झमाझम बारिश का संकेत
मंदिर के गर्भगृह के शिखर पर एक बेहद दुर्लभ और रहस्यमयी आयताकार पत्थर लगा है। इस पत्थर की महिमा और बनावट ऐसी है कि जब बाहर भीषण गर्मी अपने चरम पर होती है, तब इस पत्थर पर पानी की छोटी-छोटी बूंदें उभरने लगती हैं। ग्रामीण इस पत्थर को प्रकृति का अनूठा 'मौसम विज्ञान केंद्र' मानते हैं। मानसूनी बारिश आने के तकरीबन बीस दिन पहले इस मंदिर की छत से बूंदें टपकने लगती हैं।
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कानपुर का मानसून मंदिर
- फोटो : amar ujala
इस तारीख से बरसेंगे बदरा
फिलहाल इन मानसूनी बूंदों का आकार और घनत्व अभी छोटा है, लेकिन एक सप्ताह बाद इन बूंदों का आकार बड़ा होने का अनुमान है। मंदिर के इस प्राचीन और अचूक गणित के अनुसार, इलाके में आगामी 20 से 25 जून के बीच झमाझम मानसूनी बारिश शुरू होने का पुख्ता अनुमान है। ग्रामीणों का अटूट विश्वास है कि पत्थर से गिरने वाली बूंदों का घनत्व जितना अधिक होगा, इंद्रदेव उतने ही मेहरबान होंगे और बारिश उतनी ही मस्त होगी।
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मंदिर के गर्भगृह से टपकती पानी की बूंद
- फोटो : amar ujala
पहली बारिश होते ही पूरी तरह सूख जाता है यह रहस्यमयी पत्थर
इस अटूट चमत्कार की सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि मानसून आने के 20 दिन पहले टपकने वाला यह पत्थर, बाहर पहली बारिश की फुहार पड़ते ही अंदर से पूरी तरह सूख जाता है। विज्ञान कहता है कि इस बार मानसून लेट होगा या सूखा पड़ेगा, और कई बार विज्ञान की ये बातें गलत भी साबित हो जाती हैं; लेकिन इस मंदिर की भविष्यवाणी कभी फेल नहीं होती।