मोदी की लहर को आगरा में दिया रोक!
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एमएलसी चुनाव के नतीजे को निर्वाचन क्षेत्र में ‘अंडर करंट’ की नब्ज की तरह देखा जा रहा है। सपा की अप्रत्याशित जीत ने कांग्रेस और भाजपा को बराबर वोल्ट का झटका दिया है।
सपा के हौसले बुलंद हैं। भाजपा दूसरे नंबर पर आना भी उपलब्धि मान रही है। कांग्रेस तो सपा-बसपा दोनों के हाथ लुटी। राजनीतिक विश्लेषक भी कह रहे हैं कि चुनाव परिणाम आगरा खंड स्नातक सीट से जुड़े 12 जिलों में लोकसभा की जंग पर असर डाल सकता है।
मोदी की लहर पर सवार भाजपा यह सीट कब्जाने में जी-जान से जुटी हुई थी। इससे जनता के बीच लहर की पुष्टि भी होती। लेकिन हुआ ठीक उलट। जिस पढ़े-लिखे तबके पर वर्चस्व का दावा है उसी ने इस चुनाव में भाजपा को नकार दिया।
पार्टी प्रत्याशी डा. ज्ञान प्रकाश गुप्त को दूसरे स्थान से संतोष करना पड़ा। हालांकि, पार्टी का कहना है कि निश्चित रूप से उसका जनाधार बढ़ा है। पिछले चुनाव की तुलना में पार्टी का प्रदर्शन अच्छा रहा। भाजपा का यह भी आरोप है कि चुनाव में सत्ता का दुरुपयोग भी किया गया। उनका यह भी तर्क है कि एमएलसी में जीत-हार से लोकसभा चुनाव का दमखम नहीं आंका जा सकता।
चुनाव में सपा ने किया सत्ता का दुरूपयोग
कांग्रेस से सीट छीन तथा भाजपा को पटखनी देकर सपा के हौसले बुलंद हैं। सपा नेताओं का मानना है कि निश्चित रूप से इसका लोकसभा चुनाव पर असर पड़ेगा। जीत सबूत है कि जनता को सपा सरकार की नीतियों में विश्वास है। यह संकेत भी है कि नरेंद्र मोदी तथा राहुल गांधी का जादू कम से कम ब्रज क्षेत्र में नहीं चल रहा।
सूबे में अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही कांग्रेस के लिए एमएलसी चुनाव में सीट गंवाना गंभीर चोट है। पिछले दो चुनाव से इस सीट पर काबिज विवेक बंसल न केवल हारे बल्कि तीसरे पायदान पर खिसका दिए गए।
कांग्रेस से जुड़े लोगों का तर्क है कि लोकसभा चुनाव में जनता यूपीए सरकार की उपलब्धियों के आधार पर मत देगी। इस वजह से पार्टी का ब्रज क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन रहेगा।