राहुल के बहाने मोदी ने मुसलमानों को लुभाया

कुमार भवानंद/झांसी Updated Sat, 26 Oct 2013 12:39 AM IST
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modi attracted to muslims by targeting rahul

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भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री पद के दावेदार नरेंद्र मोदी ने वीरांगना लक्ष्मीबाई की धरा पर जिस अंदाज में अल्पसंख्यकों की दुखती रग पर हाथ रखा है, उससे उन्होंने यह साफ संकेत देने की कोशिश की है कि वह देश की राजनीति में हर वर्ग का भरोसा जीतना चाहते हैं।
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इससे पहले कानपुर रैली में उन्होंने राम मंदिर के मुद्दे से खुद को दूर रखा, वहीं झांसी में भी इससे दूर रहे। राहुल गांधी द्वारा मुजफ्फरनगर दंगे को लेकर दिए बयान के बहाने उन्होंने अल्पसंख्यकों को साधने की कोशिश की।
शुक्रवार को जीआईसी ग्राउंड पर आयोजित रैली में जुटी भीड़ को उम्मीद थी कि मोदी सपा सरकार को कठघरे में खड़ा करने के बहाने चौरासी कोसी परिक्रमा और मंदिर जैसे मसले पर बोल सकते हैं।
लेकिन, गुजरात के मुख्यमंत्री से राष्ट्रीय नेता के रूप में खुद को स्थापित करने में जुटे भाजपा नेता न केवल इससे दूर रहे, बल्कि मुजफ्फरनगर दंगे की चर्चा कर खुद को अल्पसंख्यकों के हितैषी के रूप में प्रोजेक्ट किया। उन्होंने जिस तल्ख अंदाज में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को अल्पसंख्यकों से माफी मांगने की नसीहत दी, वह गौर करने लायक था।

उन्होंने 84 में दिल्ली दंगे की चर्चा कर सिखों की दुखती रग पर भी हाथ रखा। बेशक, यहां भी उन्होंने राहुल गांधी के बयान का ही सहारा लिया। लेकिन, अपने वाक चातुर्य से उन्होंने यह साबित करने की कोशिश की कि कांग्रेस के शासन में अल्पसंख्यक कतई सुरक्षित नहीं हैं।

यूपी में मोदी की अब तक हुई दो रैलियों पर गौर करें तो उन्होंने खुद को विकास पुरुष के रूप में प्रोजेक्ट करने की कोशिश की है। इतना ही नहीं, शोभन सरकार के खिलाफ की गई टिप्पणी के तुरंत बाद उन्हें सम्मान योग्य बताकर विवादित वक्तव्यों से दूरी बनाने में भी उन्होंने देरी नहीं की।

हर वर्ग को जोड़ने का उनका यह प्रयास बताता है कि वह राजनीति की बिसात पर सधे अंदाज से गोटियां फिट कर रहे हैं। यानी, सर्वमान्य नेता बनने के लक्ष्य के और करीब होते जा रहे हैं।

40 मिनट में बहुत कुछ कह गए मोदी
नरेंद्र मोदी निर्धारित समय से करीब दस मिनट विलंब से 03 बजकर 26 मिनट पर सभा स्थल पर पहुंचे। मप्र की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह के संबोधन के बाद मोदी ने 04 बजकर 02 मिनट पर माइक संभाला और 40 मिनट तक भाषण दिया।

आधी से पूरी रोटी तक आने में लग गए साठ साल
पहले कांग्रेसी नारा लगाते थे कि आधी रोटी खाएंगे, लेकिन आजकल शहजादे साहब नारा लगा रहे हैं कि पूरी रोटी खाएंगे। यानी, आधी रोटी से पूरी रोटी पर आने में इस सरकार को साठ साल लग गए। पेट भर रोटी में तो सौ साल से ज्यादा का समय लगा देंगे।

इन्हें गरीबी का पता नहीं, मानसिक रूप से गरीब हैं
योजना आयोग की रिपोर्ट कहती है कि गांव में 26 रुपये और शहर में 32 रुपये रोज पर गुजारा करने वाला परिवार गरीब की श्रेणी में नहीं आता। दरअसल, इन्हें पता ही नहीं कि गरीबी क्या होती है। यह इनकी मानसिक गरीबी है।

साठ महीने में बदल देंगे तकदीर व तस्वीर
दस-बारह साल के अनुभव के आधार पर व रानी लक्ष्मीबाई का स्मरण करके कह सकता हूं कि उत्तर प्रदेश में इतना सामर्थ्य है कि पूरे हिंदुस्तान की गरीबी मिटा सकता है। आपने कांग्रेस को साठ साल दिए, हमें सिर्फ साठ महीने दें। साठ साल की बरबादी साठ महीने में दूर करके देश की तकदीर व तस्वीर बदल देंगे।

शहजादे घूम रहे, लेकिन जनता को जवाब नहीं देते
दिल्ली के पास जनता के बारे में सोचने का समय नहीं है। शहजादे घूम रहे हैं, लेकिन महंगाई और महिलाओं पर हो रहे अत्याचारों पर जवाब नहीं दे रहे हैं। सरकार जनता की सेवक होती है, लेकिन शहजादे खुद को बादशाह मानते हैं इसलिए जवाब देना पसंद नहीं करते।

प्रधानमंत्री नहीं, चौकीदार बनाकर भेजिए
यह मेरे लिए गौरव की बात है कि ट्रेनों में चाय बेचने वाले लड़के  को पार्टी ने प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया है। लेकिन, जनता जनार्दन मुझे प्रधानमंत्री नहीं, सिर्फ चौकीदार बना दे। दिल्ली में चौकीदारी करूंगा तो कोई भी तिजोरी पर पंजा नहीं मार पाएगा।

लोहिया की आत्मा को हो रही होगी पीड़ा
समाजवादी पार्टी लूट में एक्सपर्ट है। डा. राममनोहर लोहिया की आत्मा जहां होगी, सरकार के कारनामों से उन्हें बहुत पीड़ा हो रही होगी। सपा का परिवारवाद, कांग्रेस का अहंकारवाद और बसपा का व्यक्तिवाद जनता से किए गए वादे पूरे नहीं करना चाहता, बल्कि अपना पेट भरना चाहता है। सत्ता का गणित बनाना व भाई-भाई को बांटना ही इनका कार्य है।

शिवराज चौहान ने खर्च की पाई-पाई
बुंदेलखंड पैकेज की जो राशि मध्य प्रदेश वाले बुंदेलखंड को मिली थी, उसे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने पाई-पाई खर्च कर दिया। यह हम नहीं, योजना आयोग की रिपोर्ट कहती है कि मप्र सरकार ने पैकेज की राशि का उत्तम उपयोग किया, जिससे तीन गुना फसल पैदा होने लगी।
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