फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   mla demands salary hike

नेतागण बोले, इतने वेतन में ईमानदारी मुश्किल

Thu, 07 Mar 2013 10:47 PM IST
लखनऊ/ब्यूरो
लखनऊ/ब्यूरो Updated Thu, 07 Mar 2013 10:47 PM IST
विज्ञापन
mla demands salary hike

विधानसभा में बृहस्पतिवार को विधायकों ने वेतन बढ़ाने की मांग करते हुए कहा कि अगर तनख्वाह नहीं बढ़ती तो ईमानदार रहना मुश्किल हो जाएगा। जो मिल रहा है, उसमें तो लोगों को एक प्याला चाय तक नहीं पिला सकते।

विज्ञापन


सरकार ने भी विधायकों के सुर में सुर मिलाते हुए कहा कि भले ही आलोचना हो और विधायकों पर अपनी तनख्वाहें बढ़ाने की तोहमत लगे, लेकिन सरकार इस पर विचार कर रही है।
विज्ञापन


कितना बढ़ेगा यह अभी तय नहीं है। मामूली वेतन बढ़ने पर भी मीडिया को खिंचाई करने का मौका मिल जाता है। मीडिया को भी देखना चाहिए कि उनकी तनख्वाहें क्या हैं? और विधायकों की क्या? सदन में विधायकों की वेतन वृद्धि को मूल्य सूचकांक से जोड़ने की मांग भी उठी।
विज्ञापन
विज्ञापन


वेतन बढ़ाने के मुद्दे पर विधानसभा में पार्टी लाइन से अलग सभी विधायकों ने एकजुटता दिखाई। शून्य प्रहर में भाजपा के सुरेश खन्ना ने यह मामला औचित्य के प्रश्न के जरिए उठाया।

प्रोटोकॉल में विधायक के मुख्य सचिव से ऊपर होने के बावजूद वेतन कम होने का उल्लेख करते हुए खन्ना ने कहा कि विधायकों का वेतन अफसरों से अधिक कर दिया जाए, सम्मान अपने आप मिलने लगेगा।

उन्होंने सलाह दी कि विधायकों की वेतन वृद्धि को मूल्य सूचकांक से जोड़ देना चाहिए, क्योंकि अपना वेतन स्वयं बढ़ा लेने से विधायकों की आलोचना होती है। महंगाई काफी बढ़ गई है। वेतन नहीं बढ़ेगा तो ईमानदार कैसे रह सकते हैं?

संसदीय कार्य मंत्री आजम खां ने वेतन बढ़ाने के मुद्दे पर पर विधायकों की आलोचना करने पर मीडिया को आडे़ हाथों लेते हुए कहा कि मीडिया भी अपनी सैलरी देखे।

जिनके तीन-चार बच्चे हैं, इस तनख्वाह में बच्चों को अच्छे कॉलेजों में पढ़ा पाना मुश्किल है। कांग्रेस के प्रमोद तिवारी ने कहा कि, वेतन बढ़ाने पर विचार करते समय विधायक निधि व अन्य सहूलियतें बढ़ाने पर भी विचार कर लिया जाए।

सुरेश खन्ना ने जब वेतन का मुद्दा उठाया तो अध्यक्ष माता प्रसाद पांडेय ने कहा कि विधायक होकर वेतन की बात करते हो। जनता को भी देखो। इस पर जवाब देने खड़े हुए आजम ने अध्यक्ष से कहा कि आपका बस चले तो जब पहली बार चुनकर आए थे वही वेतन लागू करा दें।


आजम ने कहा कि जिसका जितना बड़ा परिवार हो उसका उतना ही बड़ा वेतन होना चाहिए। अब साध्वी को वेतन की क्या जरूरत? बताएं खन्ना जी (कुंवारे) को पूरा वेतन क्यों मिले? बाकी वेतन कहां खर्च करते हैं यह भी बताएं?

विधायकों का मौजूदा वेतन-भत्ता (प्रतिमाह)

वेतन---------------------------8,000 रुपये
निर्वाचन क्षेत्र भत्ता--------------22,000 रुपये
चिकित्सा भत्ता------------------10,000 रुपये
सचिव भत्ता---------------------10,000 रुपये
कुल---------------------------50,000 रुपये

- विधानसभा अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, विधान परिषद के सभापति, उप सभापति, नेता प्रतिपक्ष, कै बिनेट व राज्यमंमंत्रियों का वेतन 12,000 रुपये है।
- अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सभापति व उपसभापति केगृह जिले में आवास के रखरखाव के लिए 15,000 रुपये मिलते हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed