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योग से जीवन में आया नया सवेरा
ब्यूरो, अमर उजाला, मिर्जापुर।
Updated Tue, 21 Jun 2016 12:48 AM IST
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पुलिस लाइन ग्राउंड में सोमवार को जवानों को योगाभ्यास कराते ज्वाला सिंह। अमर उजाला
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नगर के योग शिक्षक मिशन के रूप में लोगाें को योग के प्रति जागरूक करने के काम में जुटे हुए हैं। योग एवं प्राणायाम के माध्यम से जहां बीमारी से तंग आकर जिंदगी से हार मान बैठे लोगों के जीवन में नया सवेरा आया है, वहीं युवाआें संग बच्चे व बुजुर्ग भी नियमित योगाभ्यास करके अपने जीवन को निरोगी व खुशहाल बना रहे हैं।
नगर में करीब दर्जन भर योग शिविर के जरिए योग व प्राणायाम करा कर लोगाें को नई जिंदगी देने के साथ ही उनका जीवन निरोगी बना रहे हैं। योग के प्रति सभी वर्ग के लोगों में क्रेज बढ़ा है। पहले जहां लोग योग व प्राणायाम से दूर भागते थे, वहीं वर्तमान परिवेश में लोग योग को अपनी दिनचर्या में शामिल कर लिए हैं। योग स्वस्थ जीवन की कला एवं विज्ञान है। योग गुरुओं का मानना है कि व्यक्ति की शारीरिक क्षमता, उसके मन व भावनाएं तथा ऊर्जा के स्तर के अनुरूप योग कार्य करता है, इसे चार वर्गों में विभाजित किया गया है।
पहला कर्मयोग में हम शरीर का प्रयोग करते हैं, ज्ञानयोग में हम मन का प्रयोग करते हैं, भक्तियोग में हम भावना का प्रयोग करते हैं तथा क्रियायोग में हम ऊर्जा का प्रयोग करते हैं। योग की जिस भी प्रणाली का हम अभ्यास करते हैं, वह एक-दूसरे से आपस में कई स्तराें पर मिली-जुली होती है। योग साधनाओं में यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान, समाधि, बंध एवं मुद्रा, षट्कर्म, युक्ताहार, मंत्र-जाप, युक्तकर्म आदि साधनाओं का अभ्यास अधिक किया जाता है। नगर में योग गुरु मिशन के तहत योग-प्राणायाम से लोगों के जीवन को निरोगी बनाने के साथ ही योग के प्रति जागरूक करने का काम कर रहे हैं।
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नगर में करीब दर्जन भर योग शिविर के जरिए योग व प्राणायाम करा कर लोगाें को नई जिंदगी देने के साथ ही उनका जीवन निरोगी बना रहे हैं। योग के प्रति सभी वर्ग के लोगों में क्रेज बढ़ा है। पहले जहां लोग योग व प्राणायाम से दूर भागते थे, वहीं वर्तमान परिवेश में लोग योग को अपनी दिनचर्या में शामिल कर लिए हैं। योग स्वस्थ जीवन की कला एवं विज्ञान है। योग गुरुओं का मानना है कि व्यक्ति की शारीरिक क्षमता, उसके मन व भावनाएं तथा ऊर्जा के स्तर के अनुरूप योग कार्य करता है, इसे चार वर्गों में विभाजित किया गया है।
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पहला कर्मयोग में हम शरीर का प्रयोग करते हैं, ज्ञानयोग में हम मन का प्रयोग करते हैं, भक्तियोग में हम भावना का प्रयोग करते हैं तथा क्रियायोग में हम ऊर्जा का प्रयोग करते हैं। योग की जिस भी प्रणाली का हम अभ्यास करते हैं, वह एक-दूसरे से आपस में कई स्तराें पर मिली-जुली होती है। योग साधनाओं में यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान, समाधि, बंध एवं मुद्रा, षट्कर्म, युक्ताहार, मंत्र-जाप, युक्तकर्म आदि साधनाओं का अभ्यास अधिक किया जाता है। नगर में योग गुरु मिशन के तहत योग-प्राणायाम से लोगों के जीवन को निरोगी बनाने के साथ ही योग के प्रति जागरूक करने का काम कर रहे हैं।
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