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Mirzapur News: प्रसव पीड़ा से कराहती रही महिला, नहीं मिले डॉक्टर
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मिर्जापुर। मेडिकल काॅलेज के अधीन संचालित जिला महिला अस्पताल में व्यवस्था पहले से भी बदतर हो गई हैं। रात में यहां आपरेशन से प्रसव नहीं होता है। बेहोशी के डॉक्टर नहीं होने के कारण मरीजों को चक्कर काटना पड़ता है। सोमवार की रात प्रसव पीड़ा से कराहती एक महिला को भी यहां से निराश लौटना पड़ा।
पड़री थाना क्षेत्र के रामनगर सिकरी निवासी पूनम देवी (20) को सोमवार की देर रात प्रसव पीड़ा हुई। पति आशीष कुमार उसे लेकर रात 12 बजे जिला महिला अस्पताल पहुंचे तो बताया गया कि बेहोशी के डाॅक्टर नहीं हैं। पत्नी को दर्द से कराह रही थी, इसलिए उसे लेकर निजी अस्पताल जाना पड़ा। आशीष ने बताया कि वह रात में अस्पताल पहुंचा तो बताया गया कि बेहोशी के डाक्टर नहीं है।
पत्नी दर्द से कराह रही थी। सरकारी अस्पताल में सुविधा मिल जाती, तो उसका पैसा बच जाता। वह मजदूरी कर परिवार चलाता है। ये हाल है जिला महिला अस्पताल का है। इससे बेहतर व्यवस्था तो पहले थी, जब मेडिकल काॅलेज के अधीन अस्पताल नहीं था। कुछ माह पहले तो स्त्री रोग विशेषज्ञ भी नहीं थी, जिस कारण रात में नार्मल प्रसव भी नहीं होता था। हालांकि बाद में सीएचसी की एक डाॅक्टर को अटैच किया गया।
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महिला अस्पताल के सीएमएस डाॅ. एलएस सिंह ने बताया कि रात में स्त्री रोग विशेषज्ञ मौजूद थीं। प्रसव आपरेशन से होना था लेकिन बेहोशी के डाॅक्टर नहीं थे। उनके आने में समय लगता। तब तक परिजन चल गए।
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पड़री थाना क्षेत्र के रामनगर सिकरी निवासी पूनम देवी (20) को सोमवार की देर रात प्रसव पीड़ा हुई। पति आशीष कुमार उसे लेकर रात 12 बजे जिला महिला अस्पताल पहुंचे तो बताया गया कि बेहोशी के डाॅक्टर नहीं हैं। पत्नी को दर्द से कराह रही थी, इसलिए उसे लेकर निजी अस्पताल जाना पड़ा। आशीष ने बताया कि वह रात में अस्पताल पहुंचा तो बताया गया कि बेहोशी के डाक्टर नहीं है।
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पत्नी दर्द से कराह रही थी। सरकारी अस्पताल में सुविधा मिल जाती, तो उसका पैसा बच जाता। वह मजदूरी कर परिवार चलाता है। ये हाल है जिला महिला अस्पताल का है। इससे बेहतर व्यवस्था तो पहले थी, जब मेडिकल काॅलेज के अधीन अस्पताल नहीं था। कुछ माह पहले तो स्त्री रोग विशेषज्ञ भी नहीं थी, जिस कारण रात में नार्मल प्रसव भी नहीं होता था। हालांकि बाद में सीएचसी की एक डाॅक्टर को अटैच किया गया।
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महिला अस्पताल के सीएमएस डाॅ. एलएस सिंह ने बताया कि रात में स्त्री रोग विशेषज्ञ मौजूद थीं। प्रसव आपरेशन से होना था लेकिन बेहोशी के डाॅक्टर नहीं थे। उनके आने में समय लगता। तब तक परिजन चल गए।