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मिर्जापुर: केंद्रीय विद्यालय भवन के निर्माण पर फिर फंसा पेच
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जिले के विद्यार्थियों के लिए शिक्षा व भविष्य से जुड़े अति महत्वपूर्ण केंद्रीय विद्यालय की सौगात मिर्जापुर के हाथ निकलने की आशंका पैदा हो गई है। सालों बाद केंद्रीय विद्यालय भवन के निर्माण मिली जमीन पर निर्माण की तैयारी चल ही रही थी कि एक बार फिर से पेच फंस गया है। जिस भूमि पर केंद्रीय विद्यालय भवन का निर्माण किया जाना है, दो महीने पहले वहां से 132 केवीए की हाईटेंशन लाइन गुजार दी गई। अब यह कहा जा रहा है कि जिला प्रशासन ने ही यह जमीन केंद्रीय विद्यालय संगठन को उपलब्ध कराई तो फिर वहां से हाई टेंशन तार कैसे गुजार दी गई। इस पर नाराजगी जाहिर करते हुए केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल ने जिलाधिकारी से इस मामले की विस्तृत आख्या मांगी है।
मिर्जापुर की सांसद अनुप्रिया पटेल के प्रयास से केंद्रीय विद्यालय जिले में खुलने की उम्मीद बंधी थी। खुद की भूमि, परिसर न होने की स्थिति में अस्थाई तौर पर इसका संचालन राजकीय इंटर कॉलेज के परिसर में पिछले कई साल से हो रहा है। कई बार पत्राचार व बैठकों के दौर के बाद केंद्रीय विद्यालय भवन के निर्माण के लिए जिला प्रशासन के सहयोग से कंतित में जमीन चिह्नित की गई।
कंतित के देवरी गांव में पांच एकड़ भूमि पर केंद्रीय लोक निर्माण विभाग को केंद्रीय विद्यालय भवन के निर्माण की जिम्मेदारी दी गई। करीब 5.20 करोड़ रुपये अवमुक्त भी कर दी गई। पांच फरवरी को सर्वेक्षण के दौरान पता चला कि भूमि के दक्षिण पूर्व हिस्से से 132 केवीए की हाईटेंशन लाइन गुजर रही है। जो पिछले दो माह के भीतर बनी है। इससे भूमि का .54 एकड़ हिस्सा प्रभावित हो रहा है। जो केंद्रीय विद्यालय संगठन के विद्यालय भवनके लिए अनुपयुक्त भूमि है। हाइटेंशन लाइन को उक्त भूमि से हटवाने के लिए केंद्रीय विद्यालय की प्राचार्य रुपाली परिहार ने केंद्रीय मंत्री को संबोधित पत्र लिखा। पत्र को संज्ञान में लेकर केंद्रीय मंत्री ने जिलाधिकारी से पत्राचार किया है। इसके साथ ही विद्यालय के भविष्य को लेकर भी अनिश्चितता की स्थिति बनी हुई है।
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केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल ने जिलाधिकारी को पत्र लिखा है। उसमें उन्होंने लिखा है कि खेद का विषय है कि जिला प्रशासन के संज्ञान में पूर्व से ही था कि उक्त भूमि पर केंद्रीय विद्यालय भवन का निर्माण किया जाना है। इसलिए जिला प्रशासन को उक्त भूमि से उपरोक्त हाई टेंशन लाइन को गुजरने की अनुमति किसी भी दशा में नहीं देनी चाहिए थी। उक्त प्रकरण की विस्तृत आख्या केंद्रीय मंत्री ने मांगी है। ताकि केंद्रीय विद्यालय भवन के निर्माण में आ रही अड़चनों को दूर किया जा सके।
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मिर्जापुर की सांसद अनुप्रिया पटेल के प्रयास से केंद्रीय विद्यालय जिले में खुलने की उम्मीद बंधी थी। खुद की भूमि, परिसर न होने की स्थिति में अस्थाई तौर पर इसका संचालन राजकीय इंटर कॉलेज के परिसर में पिछले कई साल से हो रहा है। कई बार पत्राचार व बैठकों के दौर के बाद केंद्रीय विद्यालय भवन के निर्माण के लिए जिला प्रशासन के सहयोग से कंतित में जमीन चिह्नित की गई।
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कंतित के देवरी गांव में पांच एकड़ भूमि पर केंद्रीय लोक निर्माण विभाग को केंद्रीय विद्यालय भवन के निर्माण की जिम्मेदारी दी गई। करीब 5.20 करोड़ रुपये अवमुक्त भी कर दी गई। पांच फरवरी को सर्वेक्षण के दौरान पता चला कि भूमि के दक्षिण पूर्व हिस्से से 132 केवीए की हाईटेंशन लाइन गुजर रही है। जो पिछले दो माह के भीतर बनी है। इससे भूमि का .54 एकड़ हिस्सा प्रभावित हो रहा है। जो केंद्रीय विद्यालय संगठन के विद्यालय भवनके लिए अनुपयुक्त भूमि है। हाइटेंशन लाइन को उक्त भूमि से हटवाने के लिए केंद्रीय विद्यालय की प्राचार्य रुपाली परिहार ने केंद्रीय मंत्री को संबोधित पत्र लिखा। पत्र को संज्ञान में लेकर केंद्रीय मंत्री ने जिलाधिकारी से पत्राचार किया है। इसके साथ ही विद्यालय के भविष्य को लेकर भी अनिश्चितता की स्थिति बनी हुई है।
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केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल ने जिलाधिकारी को पत्र लिखा है। उसमें उन्होंने लिखा है कि खेद का विषय है कि जिला प्रशासन के संज्ञान में पूर्व से ही था कि उक्त भूमि पर केंद्रीय विद्यालय भवन का निर्माण किया जाना है। इसलिए जिला प्रशासन को उक्त भूमि से उपरोक्त हाई टेंशन लाइन को गुजरने की अनुमति किसी भी दशा में नहीं देनी चाहिए थी। उक्त प्रकरण की विस्तृत आख्या केंद्रीय मंत्री ने मांगी है। ताकि केंद्रीय विद्यालय भवन के निर्माण में आ रही अड़चनों को दूर किया जा सके।