{"_id":"6a9b23c97a231232f508a086","slug":"transformed-the-school-into-a-modern-temple-of-learning-through-personal-effort-mirzapur-news-c-192-1-svns1033-160622-2026-09-05","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mirzapur News: अपने प्रयास से स्कूल को बनाया सीखने का आधुनिक मंदिर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mirzapur News: अपने प्रयास से स्कूल को बनाया सीखने का आधुनिक मंदिर
विज्ञापन
शीला सिंह, राज्य शिक्षक पुरस्कार वर्ष 2025
शिक्षक दिवस पर विशेष
मिर्जापुर। जिले में हाल के वर्षों में परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों ने वैज्ञानिक, आधुनिक सोच और नवाचार से स्कूलों को सीखने का आधुनिक मंदिर बना दिया। जो परिषदीय विद्यालय पहले बदहाली के लिए जाने जाते थे, अब व्यवस्था, अनुशासन और गुणवत्तापरक शिक्षा के लिए अंग्रेजी माध्यम के निजी विद्यालयों को टक्कर दे रहे हैं।
मधुरिमा ने बालिका शिक्षा व पर्यावरण संरक्षण की पहल की
पीएमश्री रानी कर्णावती की प्रधानाध्यापिका मधुरिमा तिवारी बालिका शिक्षा व पर्यावरण संरक्षण के कार्यों के लिए जानी जाती हैं। उन्हें वर्ष 2025 में राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार मिला। इससे पहले राज्य शिक्षक पुरस्कार के साथ ही कई अन्य पुरस्कार मिल चुका है। इनकी प्रथम नियुक्ति पटेहरा ब्लॉक के बहरछठ गांव में हुई थी। वहां उन्होंने छात्रों की संख्या 92 से बढ़ाकर 352 की। रानी कर्णावती में छात्र संख्या मात्र 56 थी, आज विद्यालय में 235 बच्चे नामांकित हैं। यह विद्यालय कॉन्वेंट स्कूलों को भी पीछे छोड़ रहा है। हर कक्ष में सुंदर डेस्क, बेंच, पेंटिंग, चहारदीवारी, सुंदर गेट, इंटरलॉकिंग लोगों को आकर्षित करते हैं। टीवी, प्रत्येक कक्षा में पैनल बोर्ड, 20 कंप्यूटर, प्रोजेक्टर, डिजिटल लाइब्रेरी, एआई तकनीक और रोबोटिक सिस्टम ने विद्यालय को आधुनिक शिक्षण केंद्र के रूप में स्थापित किया है। कंप्यूटर, प्रोजेक्टर, स्मार्ट टीवी, लैपटॉप आदि का बच्चे स्वत: संचालन कर रहे हैं।
विज्ञान गुरुजी के नाम से जाने जाते हैं सुशील पांडेय
नगर के आवास विकास कॉलोनी स्थित निजी विद्यालय के भौतिक विज्ञान के प्रवक्ता सुशील कुमार पांडेय भौतिक विज्ञान के सिद्धांतों को प्रयोगों के माध्यम से समझाने के लिए जाने जाते हैं। सुशील को उनकी वैज्ञानिक अभिरुचि, बच्चों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण पैदा करने और वैज्ञानिक विधि से समस्या के समाधान को प्रस्तुत करने के कारण केंद्र सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस का जिला समन्वयक व जिला विज्ञान क्लब का जिला समन्वयक भी बनाया है। राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस के कार्यक्रम में जिले के अभी तक 43 लघु शोध पत्र राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत किए जा चुके हैं। इनमें से करीब नौ बच्चे विभिन्न वैज्ञानिक संस्थानों में वैज्ञानिक के रूप में कार्यरत हैं। जिले के कोने-कोने से ग्रासरूट लेवल के जुगाड़ू वैज्ञानिकों की पहचान कर उनके इनोवेटिव प्रोटोटाइप को पेटेंट कराने में मदद करते हैं। अभी तक आठ प्रोटोटाइप पेटेंट कराए जा चुके हैं। इन कार्यों के लिए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद द्वारा 2013-14 का विज्ञान शिक्षक पुरस्कार व राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी प्रयागराज द्वारा विशिष्ट विज्ञान शिक्षक पुरस्कार 2019 में प्रदान किया गया। इसके अतिरिक्त राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस की राज्य आयोजन समिति द्वारा सर्वश्रेष्ठ समन्वयक का पुरस्कार प्रदान किया जा चुका है।
विज्ञापन
रविकांत द्विवेदी ने नवाचार से बच्चों को दी शिक्षा
पहाड़ी ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय भगेसर के प्रधानाध्यापक रविकांत द्विवेदी नवाचार के लिए जाने जाते हैं। खेल-खेल में शिक्षा व वैज्ञानिक सोच के साथ उन्होंने बच्चों को आगे बढ़ाया। विद्यालय को निपुण बनाया और कायाकल्प के सभी बिंदुओं को पूरा करते हुए विद्यालय को आगे बढ़ाया। आज यह स्थिति है कि इस विद्यालय में प्रवेश के लिए अभिभावक स्वत: आते हैं। उनके इस कार्य को विभाग व शासन ने भी समझा। जिसके फलस्वरूप 2024 में राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार, 2021 में राज्य अध्यापक पुरस्कार, 2019 में राज्य आईसीटी पुरस्कार, 2019 व 2021 में उत्कृष्ट विद्यालय पुरस्कार प्रदान किया गया। इसके साथ ही नेशनल मेंटर्स एनसीटीई नई दिल्ली व राज्य स्तर पर मास्टर ट्रेनर्स के लिए भी चयनित हुए।
बच्चों को खेल-खेल में पढ़ाया स्वच्छता का पाठ
सिटी ब्लॉक के कंपोजिट विद्यालय शाहपुर चौसा में तैनात शिक्षिका शीला सिंह को वर्ष 2025 में राज्य शिक्षक पुरस्कार प्रदान किया गया। उनको यह पुरस्कार खेल-खेल में स्वच्छता का पाठ व शिक्षा देने के लिए दिया गया। इसके साथ ही सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए भी उन्होंने विद्यार्थियों को शिक्षित किया।
विज्ञापन
मिर्जापुर। जिले में हाल के वर्षों में परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों ने वैज्ञानिक, आधुनिक सोच और नवाचार से स्कूलों को सीखने का आधुनिक मंदिर बना दिया। जो परिषदीय विद्यालय पहले बदहाली के लिए जाने जाते थे, अब व्यवस्था, अनुशासन और गुणवत्तापरक शिक्षा के लिए अंग्रेजी माध्यम के निजी विद्यालयों को टक्कर दे रहे हैं।
मधुरिमा ने बालिका शिक्षा व पर्यावरण संरक्षण की पहल की
पीएमश्री रानी कर्णावती की प्रधानाध्यापिका मधुरिमा तिवारी बालिका शिक्षा व पर्यावरण संरक्षण के कार्यों के लिए जानी जाती हैं। उन्हें वर्ष 2025 में राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार मिला। इससे पहले राज्य शिक्षक पुरस्कार के साथ ही कई अन्य पुरस्कार मिल चुका है। इनकी प्रथम नियुक्ति पटेहरा ब्लॉक के बहरछठ गांव में हुई थी। वहां उन्होंने छात्रों की संख्या 92 से बढ़ाकर 352 की। रानी कर्णावती में छात्र संख्या मात्र 56 थी, आज विद्यालय में 235 बच्चे नामांकित हैं। यह विद्यालय कॉन्वेंट स्कूलों को भी पीछे छोड़ रहा है। हर कक्ष में सुंदर डेस्क, बेंच, पेंटिंग, चहारदीवारी, सुंदर गेट, इंटरलॉकिंग लोगों को आकर्षित करते हैं। टीवी, प्रत्येक कक्षा में पैनल बोर्ड, 20 कंप्यूटर, प्रोजेक्टर, डिजिटल लाइब्रेरी, एआई तकनीक और रोबोटिक सिस्टम ने विद्यालय को आधुनिक शिक्षण केंद्र के रूप में स्थापित किया है। कंप्यूटर, प्रोजेक्टर, स्मार्ट टीवी, लैपटॉप आदि का बच्चे स्वत: संचालन कर रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञान गुरुजी के नाम से जाने जाते हैं सुशील पांडेय
नगर के आवास विकास कॉलोनी स्थित निजी विद्यालय के भौतिक विज्ञान के प्रवक्ता सुशील कुमार पांडेय भौतिक विज्ञान के सिद्धांतों को प्रयोगों के माध्यम से समझाने के लिए जाने जाते हैं। सुशील को उनकी वैज्ञानिक अभिरुचि, बच्चों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण पैदा करने और वैज्ञानिक विधि से समस्या के समाधान को प्रस्तुत करने के कारण केंद्र सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस का जिला समन्वयक व जिला विज्ञान क्लब का जिला समन्वयक भी बनाया है। राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस के कार्यक्रम में जिले के अभी तक 43 लघु शोध पत्र राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत किए जा चुके हैं। इनमें से करीब नौ बच्चे विभिन्न वैज्ञानिक संस्थानों में वैज्ञानिक के रूप में कार्यरत हैं। जिले के कोने-कोने से ग्रासरूट लेवल के जुगाड़ू वैज्ञानिकों की पहचान कर उनके इनोवेटिव प्रोटोटाइप को पेटेंट कराने में मदद करते हैं। अभी तक आठ प्रोटोटाइप पेटेंट कराए जा चुके हैं। इन कार्यों के लिए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद द्वारा 2013-14 का विज्ञान शिक्षक पुरस्कार व राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी प्रयागराज द्वारा विशिष्ट विज्ञान शिक्षक पुरस्कार 2019 में प्रदान किया गया। इसके अतिरिक्त राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस की राज्य आयोजन समिति द्वारा सर्वश्रेष्ठ समन्वयक का पुरस्कार प्रदान किया जा चुका है।
विज्ञापन
रविकांत द्विवेदी ने नवाचार से बच्चों को दी शिक्षा
पहाड़ी ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय भगेसर के प्रधानाध्यापक रविकांत द्विवेदी नवाचार के लिए जाने जाते हैं। खेल-खेल में शिक्षा व वैज्ञानिक सोच के साथ उन्होंने बच्चों को आगे बढ़ाया। विद्यालय को निपुण बनाया और कायाकल्प के सभी बिंदुओं को पूरा करते हुए विद्यालय को आगे बढ़ाया। आज यह स्थिति है कि इस विद्यालय में प्रवेश के लिए अभिभावक स्वत: आते हैं। उनके इस कार्य को विभाग व शासन ने भी समझा। जिसके फलस्वरूप 2024 में राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार, 2021 में राज्य अध्यापक पुरस्कार, 2019 में राज्य आईसीटी पुरस्कार, 2019 व 2021 में उत्कृष्ट विद्यालय पुरस्कार प्रदान किया गया। इसके साथ ही नेशनल मेंटर्स एनसीटीई नई दिल्ली व राज्य स्तर पर मास्टर ट्रेनर्स के लिए भी चयनित हुए।
बच्चों को खेल-खेल में पढ़ाया स्वच्छता का पाठ
सिटी ब्लॉक के कंपोजिट विद्यालय शाहपुर चौसा में तैनात शिक्षिका शीला सिंह को वर्ष 2025 में राज्य शिक्षक पुरस्कार प्रदान किया गया। उनको यह पुरस्कार खेल-खेल में स्वच्छता का पाठ व शिक्षा देने के लिए दिया गया। इसके साथ ही सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए भी उन्होंने विद्यार्थियों को शिक्षित किया।

शीला सिंह, राज्य शिक्षक पुरस्कार वर्ष 2025

शीला सिंह, राज्य शिक्षक पुरस्कार वर्ष 2025

शीला सिंह, राज्य शिक्षक पुरस्कार वर्ष 2025