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Mirzapur News: महारास में हुआ जीवात्मा-परमात्मा का मिलन, कृष्ण-रुक्मिणी विवाह पर झूमे श्रद्धालु
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बरियाघाट स्थित सामुदायिक भवन सभागार में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन मंगलवार को कथा व्यास मृत्युंजय महाराज ने गोवर्धन पूजा, छप्पन भोग, महारास लीला, रासलीला में भगवान शिव के आगमन और श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह का प्रसंग सुनाया।
उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने बांसुरी बजाकर गोपियों का आह्वान किया। महारास लीला जीवात्मा के परमात्मा से मिलन और पूर्ण समर्पण का प्रतीक है। इसके माध्यम से ईश्वर के प्रति प्रेम और भक्ति का संदेश मिलता है।
श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह की झांकी ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। विवाह उत्सव के दौरान श्रद्धालु भक्ति में झूम उठे। कथा व्यास ने कहा कि श्रद्धा और प्रेम से विवाह उत्सव में शामिल होने से भक्तों की वैवाहिक समस्याएं दूर होती हैं।
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उन्होंने कहा कि जीव परमात्मा का अंश है और उसके भीतर अपार शक्ति विद्यमान है। जीवन में कमी केवल संकल्प की होती है। दृढ़ संकल्प और ईश्वर के प्रति विश्वास से व्यक्ति कठिनाइयों पर विजय प्राप्त कर सकता है। कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
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उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने बांसुरी बजाकर गोपियों का आह्वान किया। महारास लीला जीवात्मा के परमात्मा से मिलन और पूर्ण समर्पण का प्रतीक है। इसके माध्यम से ईश्वर के प्रति प्रेम और भक्ति का संदेश मिलता है।
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श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह की झांकी ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। विवाह उत्सव के दौरान श्रद्धालु भक्ति में झूम उठे। कथा व्यास ने कहा कि श्रद्धा और प्रेम से विवाह उत्सव में शामिल होने से भक्तों की वैवाहिक समस्याएं दूर होती हैं।
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उन्होंने कहा कि जीव परमात्मा का अंश है और उसके भीतर अपार शक्ति विद्यमान है। जीवन में कमी केवल संकल्प की होती है। दृढ़ संकल्प और ईश्वर के प्रति विश्वास से व्यक्ति कठिनाइयों पर विजय प्राप्त कर सकता है। कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।