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Mirzapur News: बच्चा वार्ड के निकास द्वार पर ताला, एनआईसीयू में निकलने का रास्ता नहीं

Sun, 17 Nov 2024 02:19 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 17 Nov 2024 02:19 AM IST
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The exit door of the baby ward is locked, there is no way to exit the NICU
मिर्जापुर। मेडिकल काॅलेज के अधीन मंडलीय अस्पताल में स्थित बच्चों का एसएनसीयू वार्ड हो या हृदय राेगियों के लिए सीसीयू वार्ड, दोनों जगह निकास द्वार नहीं है। बच्चा वार्ड में निकास द्वार है तो वहां ताला लगा हुआ है। एक ही रास्ते से आना-आना होता है। बच्चा वार्ड में ऑक्सीजन सिलिंडर रखे हैं। जहां हादसा हो सकता है। इसके बाद भी लापरवाही बरती जा रही है। झांसी में हुए हादसे के बाद कई स्थानों पर छिपाकर रखे फायर उपकरण बाहर लगाए गए हैं। इसमें भी जो एक्सपायरी हो गए हैं, उन्हें छिपाकर रखा गया है।
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मेडिकल काॅलेज के अधीन मंडलीय और जिला महिला अस्पताल में आग लगने पर बचाव के पर्याप्त उपाय नहीं हैं। कुछ स्थानों पर फायर के उपकरण मिले, परंतु वो भी मानक के अनुरूप नहीं हैं। मंडलीय अस्पताल की इमरजेंसी के पास एनआईसीयू है। 12 बेड के एनआईसीयू में 15 नवजात भर्ती हैं। एनआईसीयू में एक ही रास्ता है। निकास द्वार नहीं है। बाहर दो रास्ते हैं। इसमें एक डेंगू वार्ड से होते हुए जिला महिला अस्पताल की ओर जाता है, परंतु वहां दरवाजा भी बंद रहता है। झांसी में हुई घटना के बाद यहां फायर उपकरण भी नजर आए। बताया गया कि यहां पांच फायर उपकरण है। अस्पताल के 32 बेड के बच्चा वार्ड पर 25 बच्चे भर्ती हैं। एक दिन पहले सभी बेड फुल थे। यहां अक्सर एक बेड पर दो-दो बच्चे भर्ती रहते हैं। बच्चा वार्ड के अंदर ही जंबो ऑक्सीजन सिलिंडर रखने का कमरा है। एक फायर उपकरण सही और एक अंदर उपकरण एक्सपायरी हालत में मिला। बच्चा वार्ड एक गलियारे में दो हाल में बंटा है। दोनों हाल में एक रास्ता है। एक हाल में दो रास्ते हैं भी तो एक पर ताला लगा रहता है। वार्ड के बाहर भी दो रास्ते हैं, परंतु एक पर ताला लगा रहता है। ऐसे में यहां हादसा होने पर निकल पाना मुश्किल हो सकता है। जिला महिला अस्पताल के किसी भी वार्ड में फायर उपकरण नहीं मिले। हृदय रोगियों के लिए बने सीसीयू वार्ड में भी फायर उपकरण टंगे नहीं दिखे। कोने में दो उपकरण दिखे भी तो वे एक्सपायरी रहे।
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उधर, मंडलीय अस्पताल तथा जिला महिला अस्पताल के अलावा 100 बेड के मैटरनिटी विंग समते बिना फायर एनओसी के चल रहे हैं। अग्निशमन अधिकारी अनिल प्रताप सरोह ने बताया कि मंडलीय अस्पताल हो या जिला महिला अस्पताल किसी को भी फायर की एनओसी नहीं मिली है। इसके अलावा 100 बेड के अस्पताल को भी फायर की एनओसी नहीं मिली है। तीनों स्थानों पर आग बुझाने के मानक पूरे नहीं है। आग बुझाने के लिए फायर उपकरण के साथ ही हौज रील, फायर अलार्म, स्मोक डिटेक्टर, अंडर ग्राउंड टैंक, फायर पंप आदि होने चाहिए। तीनों अस्पतालों में मानक पूरे नहीं है। इसके चलते फायर एनओसी नहीं मिल सकी है। कई बार नोटिस जारी किया जा चुका है। अग्निशमन अधिकारी अनिल प्रताप सरोज का कहना है कि मंडलीय अस्पताल, जिला महिला अस्पताल और 100 बेड के मैटरनिटी विंग सभी बिना फायर एनओसी के चल रहे हैं। सभी जगह आग से बचाव के पर्याप्त उपाय नहीं हैं। इसके लिए कई बार नोटिस जारी किया गया है। उधर,मंडलीय अस्पताल के सीएमएस डॉ.एसके श्रीवास्तव का कहना है कि झांसी की घटना को देखते हुए अस्पताल का निरीक्षण किया गया। सभी जगह फायर उपकरण मिले। सभी जगह आग से बचाव के उपाय करने के निर्देश दिए गए हैं। बच्चा वार्ड गेट सुरक्षा के दृष्टि से बंद किया गया है। जिसे दिन में खोलवा दिया जाएगा। रात में बंद रहेगा तो चाभी स्टाफ के पास रहेगी।
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