{"_id":"6a5e74f4cd008f6e26094520","slug":"the-course-of-tb-medication-lasts-six-months-patients-have-not-received-relief-fund-assistance-for-a-year-mirzapur-news-c-192-1-svns1035-157743-2026-07-21","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mirzapur News: छह महीने है टीबी की दवा का कोर्सए मरीजों को एक साल से नहीं मिला है राहत कोष","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mirzapur News: छह महीने है टीबी की दवा का कोर्सए मरीजों को एक साल से नहीं मिला है राहत कोष
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
मिर्जापुर। टीबी से जूझ रहे 3144 मरीजों के सामने अब दवा के साथ पौष्टिक आहार की व्यवस्था करना भी बड़ी चुनौती है। केंद्र सरकार की ओर से टीबी मरीजों को उपचार के दौरान पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने के लिए हर महीने एक हजार रुपये का पोषण भत्ता दिया जाता है, लेकिन पिछले एक वर्ष से यह राशि मरीजों के खातों में नहीं पहुंची है।
सीधा असर आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के इलाज और सेहत पर पड़ रहा है। बड़ी बात ये है कि टीबी का इलाज छह माह के लिए होता है कुछ एमडीआर मरीज का इलाज नौ माह तक चलाते हैं। सरकार की ओर से मिलने वाली सहायता राशि एक वर्ष से अधिक समय से नहीं मिली है।
जिले में अधिकांश टीबी मरीज क्रशर प्लांट और अन्य दिहाड़ी कार्यों से जुड़े श्रमिक हैं। बीमारी से पहले ही उनकी आय प्रभावित हो जाती है। ऐसे में सरकार से मिलने वाला पोषण भत्ता उनके लिए बड़ी राहत साबित होता था। इस राशि से मरीज दूध, अंडा, फल, दाल और अन्य पौष्टिक खाद्य सामग्री खरीदकर डॉक्टरों की सलाह के अनुसार भोजन कर पाते थे।
विज्ञापन
अब भत्ता बंद होने से उनकी थाली से पौष्टिक आहार गायब होने लगा है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार टीबी की दवा का कोर्स सामान्यतः छह माह तक चलता है। डॉक्टरों का कहना है कि केवल दवा से ही बीमारी पर पूरी तरह काबू नहीं पाया जा सकता।
मरीज की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत रखने के लिए संतुलित और पौष्टिक भोजन भी उतना ही जरूरी है। इसी उद्देश्य से केंद्र सरकार प्रत्येक मरीज को हर माह एक हजार रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराती है। पोषण भत्ता अब नए ऐप के माध्यम से सीधे लाभार्थियों के खातों में भेजा जाना है। इसके लिए आधार और फेस ऑथेंटिकेशन की प्रक्रिया अनिवार्य की गई है। तकनीकी कारणों से बड़ी संख्या में मरीजों का सत्यापन पूरा नहीं हो सका, जिससे पिछले एक वर्ष से भुगतान अटका हुआ है। इसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि सत्यापन की प्रक्रिया पूरी कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। प्रक्रिया पूरी होते ही लंबित पोषण भत्ते की राशि मरीजों के खातों में भेजी जाएगी।
विज्ञापन
मिर्जापुर। टीबी से जूझ रहे 3144 मरीजों के सामने अब दवा के साथ पौष्टिक आहार की व्यवस्था करना भी बड़ी चुनौती है। केंद्र सरकार की ओर से टीबी मरीजों को उपचार के दौरान पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने के लिए हर महीने एक हजार रुपये का पोषण भत्ता दिया जाता है, लेकिन पिछले एक वर्ष से यह राशि मरीजों के खातों में नहीं पहुंची है।
सीधा असर आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के इलाज और सेहत पर पड़ रहा है। बड़ी बात ये है कि टीबी का इलाज छह माह के लिए होता है कुछ एमडीआर मरीज का इलाज नौ माह तक चलाते हैं। सरकार की ओर से मिलने वाली सहायता राशि एक वर्ष से अधिक समय से नहीं मिली है।
विज्ञापन
जिले में अधिकांश टीबी मरीज क्रशर प्लांट और अन्य दिहाड़ी कार्यों से जुड़े श्रमिक हैं। बीमारी से पहले ही उनकी आय प्रभावित हो जाती है। ऐसे में सरकार से मिलने वाला पोषण भत्ता उनके लिए बड़ी राहत साबित होता था। इस राशि से मरीज दूध, अंडा, फल, दाल और अन्य पौष्टिक खाद्य सामग्री खरीदकर डॉक्टरों की सलाह के अनुसार भोजन कर पाते थे।
विज्ञापन
अब भत्ता बंद होने से उनकी थाली से पौष्टिक आहार गायब होने लगा है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार टीबी की दवा का कोर्स सामान्यतः छह माह तक चलता है। डॉक्टरों का कहना है कि केवल दवा से ही बीमारी पर पूरी तरह काबू नहीं पाया जा सकता।
मरीज की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत रखने के लिए संतुलित और पौष्टिक भोजन भी उतना ही जरूरी है। इसी उद्देश्य से केंद्र सरकार प्रत्येक मरीज को हर माह एक हजार रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराती है। पोषण भत्ता अब नए ऐप के माध्यम से सीधे लाभार्थियों के खातों में भेजा जाना है। इसके लिए आधार और फेस ऑथेंटिकेशन की प्रक्रिया अनिवार्य की गई है। तकनीकी कारणों से बड़ी संख्या में मरीजों का सत्यापन पूरा नहीं हो सका, जिससे पिछले एक वर्ष से भुगतान अटका हुआ है। इसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि सत्यापन की प्रक्रिया पूरी कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। प्रक्रिया पूरी होते ही लंबित पोषण भत्ते की राशि मरीजों के खातों में भेजी जाएगी।