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गर्मी आई, बढ़ा जल संकट
ब्यूरो/ अमर उजाला/ मिर्जापुर
Updated Sat, 18 Mar 2017 12:37 AM IST
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गर्मी ने अभी दस्तक दी है लेकिन पेयजल का संकट शुरू हो गया है। भूमिगत जलस्तर तेजी से खिसकने से पहाड़ी इलाकों पंपों ने जवाब देना शुरू कर दिया है। नदी-नाले व तालाब सूखने लगे हैं।
पहाड़ से सटे ग्रामीण अंचलों व पठारी क्षेत्रों की जनता को हर साल गर्मी के मौसम में पेयजल संकट से जूझना पड़ता है। अभी आधा मार्च ही गुजरा है, लेकिन जिले के हलिया, जमालपुर, पहाड़ी, छानबे, मड़िहान, ड्रमंडगंज सहित कई अन्य इलाकाें में शुद्ध पेयजल की समस्या पैदा हो गई है। भूजलस्तर खिसकने के हैंडपंपों ने जवाब दे दिया है, वहीं कहीं-कहीं हैंडपंपों से कीचड़युक्त व दूषित पानी निकल रहे हैं। नदी व तालाबों के सूखने की वजह से जिससे मवेशियों के लिए भी पानी जुटाने में परेशानी होने लगी है। हलिया के लहुरिया दह में टैंकर से पानी सप्लाई अभी शुरू नहीं हो पाई है। पानी की किल्लत से जंगलाी जानवर रिहायशी इलाकों आ रहे हैं।
छानबे के पहाड़ी व गंगा के तराई इलाकों में जलस्तर तेजी से खिसकने लगा है। ब्लॉक में 6062 हैंडपंपाें में से करीब साढ़े चार सौ हैंडपंप ने पानी छोड़ दिया है। उन्हें रीबोर करने की जरूरत है जबकि तीन सौ हैंडपंपाें में मटमैला पानी आ रहा है। विजयपुर, महुआडाढ, दादर, कामापुर कला, चतुरिया, बौड़ई, बघेड़ा खुर्द, बरबटा, पटेहरा देवरी, अरगी सरपत्ती, महुआरी गांवों में पेयजल की किल्लत शुरू हो गई है। प्रभारी खंड विकास अधिकारी बागीश शुक्ला ने बताया कि रिबोर लायक हैंडंपपों की सूची जल निगम को भेजी गई है। ग्राम प्रधान व ग्राम पंचायत अधिकारियों से हैंडपंप बनवाने को कहा गया है।
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विकास खंड पहाड़ी के दक्षिणांचल में पहाड़ व जंगल से सटे करीब एक दर्जन ग्राम पंचायताें में हैंडपंप पानी छोड़ चुके हैं। ब्लॉक में 3560 हैंडपंपों में से आधे खराब हैं। वहीं 137 तालाबों में पानी नदारद है, जिससे मवेशियाें से भी प्यास नहीं बुझ पा रही है। 46 ग्राम पंचायत वाले पहाड़ी ब्लॉक मेें जल निगम द्वारा पानी की टंकियां बनी हैं इसके बावजूद ग्राम पंचायत दूबेपुर बसारी, भोजपुर पहाड़ी, टौंगा, सरैंया कमरघटा, मोहनपुर भौरख गांवों में पेयजल आपूरि्त नहीं हो रही है।
पहाड़ से सटे ग्रामीण अंचलों व पठारी क्षेत्रों की जनता को हर साल गर्मी के मौसम में पेयजल संकट से जूझना पड़ता है। अभी आधा मार्च ही गुजरा है, लेकिन जिले के हलिया, जमालपुर, पहाड़ी, छानबे, मड़िहान, ड्रमंडगंज सहित कई अन्य इलाकाें में शुद्ध पेयजल की समस्या पैदा हो गई है। भूजलस्तर खिसकने के हैंडपंपों ने जवाब दे दिया है, वहीं कहीं-कहीं हैंडपंपों से कीचड़युक्त व दूषित पानी निकल रहे हैं। नदी व तालाबों के सूखने की वजह से जिससे मवेशियों के लिए भी पानी जुटाने में परेशानी होने लगी है। हलिया के लहुरिया दह में टैंकर से पानी सप्लाई अभी शुरू नहीं हो पाई है। पानी की किल्लत से जंगलाी जानवर रिहायशी इलाकों आ रहे हैं।
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छानबे के पहाड़ी व गंगा के तराई इलाकों में जलस्तर तेजी से खिसकने लगा है। ब्लॉक में 6062 हैंडपंपाें में से करीब साढ़े चार सौ हैंडपंप ने पानी छोड़ दिया है। उन्हें रीबोर करने की जरूरत है जबकि तीन सौ हैंडपंपाें में मटमैला पानी आ रहा है। विजयपुर, महुआडाढ, दादर, कामापुर कला, चतुरिया, बौड़ई, बघेड़ा खुर्द, बरबटा, पटेहरा देवरी, अरगी सरपत्ती, महुआरी गांवों में पेयजल की किल्लत शुरू हो गई है। प्रभारी खंड विकास अधिकारी बागीश शुक्ला ने बताया कि रिबोर लायक हैंडंपपों की सूची जल निगम को भेजी गई है। ग्राम प्रधान व ग्राम पंचायत अधिकारियों से हैंडपंप बनवाने को कहा गया है।
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विकास खंड पहाड़ी के दक्षिणांचल में पहाड़ व जंगल से सटे करीब एक दर्जन ग्राम पंचायताें में हैंडपंप पानी छोड़ चुके हैं। ब्लॉक में 3560 हैंडपंपों में से आधे खराब हैं। वहीं 137 तालाबों में पानी नदारद है, जिससे मवेशियाें से भी प्यास नहीं बुझ पा रही है। 46 ग्राम पंचायत वाले पहाड़ी ब्लॉक मेें जल निगम द्वारा पानी की टंकियां बनी हैं इसके बावजूद ग्राम पंचायत दूबेपुर बसारी, भोजपुर पहाड़ी, टौंगा, सरैंया कमरघटा, मोहनपुर भौरख गांवों में पेयजल आपूरि्त नहीं हो रही है।