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कौशल विकास योजना का हाल : रोजगार तो दूर, तीन वर्ष से परीक्षा तक नहीं हुई
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बथुआ स्थित राजकीय आईटीआई संस्थान, संवाद
मिर्जापुर। जिले में कौशल विकास योजना के तहत संचालित पाठ्यक्रमों की तीन वर्षों से परीक्षा नहीं हुई है। इसके कारण प्रमाणपत्र के अभाव में प्रशिक्षित युवाओं को रोजगार पाने में कठिनाई हो रही है।
मिशन के एमआईएस मैनेजर अचल सिंह ने बताया कि प्रशिक्षण का समय बढ़ने के कारण परीक्षाएं अभी नहीं हुई हैं।
बिना डिग्री या प्रमाणपत्र के हुनर पर आजीविका के लिए कौशल विकास योजना थी। इसके तहत लाभार्थियों को प्रशिक्षण देने के बाद परीक्षा कराई जाती है।
संबंधित ट्रेड में ट्रेनिंग का प्रमाणपत्र भी प्रदान किया जाता है। इससे वे किसी भी संस्थान में कुशल श्रमिक के रूप में रोजगार कर सकते हैं। योजना के तहत वायरिंग, प्लंबिंग, नलसाजी, विभिन्न प्रकार के मिस्त्री और दर्जी जैसे व्यवसायों का प्रशिक्षण दिया जाता है।
पिछले तीन वर्षों से न तो परीक्षा आयोजित हुई और न ही प्रशिक्षुओं को प्रमाणपत्र ही मिल सका। वर्ष 2023-24 में 350, वर्ष 2024-25 में 400 और वर्ष 2025-26 में 500 प्रशिक्षुओं का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, परीक्षा नहीं हो सकी।
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मिशन के एमआईएस मैनेजर अचल सिंह ने बताया कि प्रशिक्षण का समय बढ़ने के कारण परीक्षाएं अभी नहीं हुई हैं।
बिना डिग्री या प्रमाणपत्र के हुनर पर आजीविका के लिए कौशल विकास योजना थी। इसके तहत लाभार्थियों को प्रशिक्षण देने के बाद परीक्षा कराई जाती है।
संबंधित ट्रेड में ट्रेनिंग का प्रमाणपत्र भी प्रदान किया जाता है। इससे वे किसी भी संस्थान में कुशल श्रमिक के रूप में रोजगार कर सकते हैं। योजना के तहत वायरिंग, प्लंबिंग, नलसाजी, विभिन्न प्रकार के मिस्त्री और दर्जी जैसे व्यवसायों का प्रशिक्षण दिया जाता है।
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पिछले तीन वर्षों से न तो परीक्षा आयोजित हुई और न ही प्रशिक्षुओं को प्रमाणपत्र ही मिल सका। वर्ष 2023-24 में 350, वर्ष 2024-25 में 400 और वर्ष 2025-26 में 500 प्रशिक्षुओं का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, परीक्षा नहीं हो सकी।
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