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बारिश से कहीं खुशी तो कहीं किसानों में छाई मायूसी

Wed, 20 Oct 2021 12:33 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 20 Oct 2021 12:33 AM IST
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Somewhere there is happiness due to rain and somewhere there is despair among farmers.
नगर के तुलसी चौक रोड़ से बारिश में छाता लेकर जाते लोग। - फोटो : MIRZAPUR
मिर्जापुर। दो दिनों से रुक-रुक कर हो रही झमाझम बारिश से किसानों में कहीं खुशी तो कहीं मायूसी छाई हुई है। मंगलवार को गरज चमक व तेज हवाओं के बीच हुए बरसात से खेतो में जगह-जगह पानी भर गए। जबकि शहर के निचले इलाकों में पानी भर गया। झमाझम हुई बारिश के चलते सड़को में बने गड्ढो में पानी भर गया। जिससे राहगिरों को चलना मुश्किल हो रहा था। नगर के शबरी-नटवां मार्ग समेत इमामबाड़ा शास्त्री पुल मार्ग बदहाल रहा। कीचड़ भरे राह पर फिसलकर राहगिर गिरते दिखे। इसी तरह जिला मुख्यालय से जुड़ी ग्रामीण सड़को की दशा खराब रही। बीरशाहपुर मिर्जापुर मार्ग, रमईपट्टी कनौराघाट मार्ग पर बने गड्ढो पर पानी भरा रहा। रमईपट्टी से आगे बढ़ने पर पक्का पोखरा, नयेपुरवां, अघौली, अर्जुनपुर के बीच बने गड्ढो में पानी भरा रहा। शेरवां : चमक गरज तेज हवा के साथ झमाझम बारिश होने से धान के कटोरे में रोपी अगैती धान की अगैती फसल जिसमें बालिया निकल आई थी वो जमीदोज हो गई हैं। किसानों का कहना है कि अगर और बारिश हुई तो धान की फसलों से धान चावल की जगह पईया निकलेगा। तो दूसरी और सब्जी के फसलों के खेतों में पानी लग जाने से रोपी गई गोभी पालक टमाटर मेथी मिर्चा सौफ के फसलों को नुकसान होने का किसानों को भय सताने लगा है। क्षेत्र के सेमरां गांव में सब्जियों की खेती करने वाले किसान सोती मौर्या व धान की खेती करने वाले भदावल के किसान रमेश सिंह का कहना है कि अश्विन माह की पूर्णिमा तिथि की भारी बारिश किसानों के लिए लाभकारी नहीं होती है। तों वहीं महा कवि घाघ की कहावतों पर खेती करने वाले भभौरा के किसान देबी प्रसाद सिंह का कहना है कि महा कवि घाघ कहते हैं कि जो बरसे पुनर्बसु स्वाति, चरखा चलै न बोलै तांती। मतलब साफ है कि पुनर्बसु और स्वाति नक्षत्र की वर्षा से किसान सुखी रहते हैं। जिगना, छानबे क्षेत्र में हवा के साथ पानी बरसने से किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें दिखने लगी हैं। तेज हवा के बीच पानी बरसने से अधिकांश खेतों में तैयार धान फसल जमीन गिर लेट गई।
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