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Mirzapur News: समुद्र मंथन, श्रीकृष्ण जन्मोत्सव प्रसंगों से श्रद्धालुओं की आंखें हुईं नम
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- धैर्य और भक्ति से ही संभव है अमृत रूपी सफलता
संवाद न्यूज एजेंसी
लालगंज। क्षेत्र के मुरघुरा गांव में श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन श्रद्धा, भक्ति और उल्लास का अनुपम संगम देखने को मिला। दिल्ली से पधारे कथा व्यास डॉ अजय पांडेय ने समुद्र मंथन, श्रीकृष्ण जन्मोत्सव और ध्रुव-प्रह्लाद के प्रेरक प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया। श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर रहे। पूरा पंडाल दिनभर हरि बोल और जय श्रीकृष्ण के जयघोषों से गूंजता रहा।
महाराज ने समुद्र मंथन प्रसंग की व्याख्या करते हुए बताया कि देव-दानवों के मंथन से प्राप्त रत्न जीवन में आने वाले संघर्षों और साधना के प्रतीक हैं। धैर्य, संयम और कठोर परिश्रम से ही अमृत रूपी सफलता प्राप्त की जा सकती है। जब-जब धरती पर अधर्म और अत्याचार बढ़ता है, तब-तब प्रभु अवतार लेकर धर्म की स्थापना करते हैं। गोकुल और नंदगांव की लीलाओं के वर्णन के दौरान श्रद्धालु भावविभोर होकर नृत्य करने लगे और पूरा वातावरण आनंदोत्सव में बदल गया।
बालक ध्रुव और भक्त प्रह्लाद की कथा के माध्यम से महाराज ने समाज को अडिग भक्ति और अटल विश्वास का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि विषम परिस्थितियों में भी इन बाल भक्तों की अटूट श्रद्धा यह सिद्ध करती है कि सच्ची निष्ठा के सामने कोई भी बाधा टिक नहीं सकती। इस दौरान आयोजन समिति के आनंद देव दुबे, कमल राज, हर्षित, अंकित, धनंजय, अनंत और पुष्पराज दुबे ने सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
लालगंज। क्षेत्र के मुरघुरा गांव में श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन श्रद्धा, भक्ति और उल्लास का अनुपम संगम देखने को मिला। दिल्ली से पधारे कथा व्यास डॉ अजय पांडेय ने समुद्र मंथन, श्रीकृष्ण जन्मोत्सव और ध्रुव-प्रह्लाद के प्रेरक प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया। श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर रहे। पूरा पंडाल दिनभर हरि बोल और जय श्रीकृष्ण के जयघोषों से गूंजता रहा।
महाराज ने समुद्र मंथन प्रसंग की व्याख्या करते हुए बताया कि देव-दानवों के मंथन से प्राप्त रत्न जीवन में आने वाले संघर्षों और साधना के प्रतीक हैं। धैर्य, संयम और कठोर परिश्रम से ही अमृत रूपी सफलता प्राप्त की जा सकती है। जब-जब धरती पर अधर्म और अत्याचार बढ़ता है, तब-तब प्रभु अवतार लेकर धर्म की स्थापना करते हैं। गोकुल और नंदगांव की लीलाओं के वर्णन के दौरान श्रद्धालु भावविभोर होकर नृत्य करने लगे और पूरा वातावरण आनंदोत्सव में बदल गया।
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बालक ध्रुव और भक्त प्रह्लाद की कथा के माध्यम से महाराज ने समाज को अडिग भक्ति और अटल विश्वास का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि विषम परिस्थितियों में भी इन बाल भक्तों की अटूट श्रद्धा यह सिद्ध करती है कि सच्ची निष्ठा के सामने कोई भी बाधा टिक नहीं सकती। इस दौरान आयोजन समिति के आनंद देव दुबे, कमल राज, हर्षित, अंकित, धनंजय, अनंत और पुष्पराज दुबे ने सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु रहे।
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