{"_id":"a2c93220b22ce5c1cb4206ea34f2915e","slug":"pursuant-to-god-the-almighty-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"भगवान के अनुसरण से ही परमात्मा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
भगवान के अनुसरण से ही परमात्मा
ब्यूरो/अमर उजाला/ मिर्जापुर
Updated Sat, 31 Oct 2015 11:25 PM IST
विज्ञापन
मड़िहान स्थित रोडवेज परिसर में सात दिवसीय श्रीमद्भागतव कथा का आयोजन किया जा रहा है। चौथे दिन कथावाचक श्रीमद्भागवत महापुराण कथावाचक जगदीशानंद महाराज ने भगवान और ज्ञान की महिमा का बखान किया। उन्होंने कहा कि अगर भगवान के चरणों का अनुसरण करें तो निश्चय ही परमात्मा को प्राप्त कर लेंगे। श्रीमद्भागवत कथा सुनने के लिए क्षेत्र के ग्रामीण भारी संख्या में उमड़े।
भक्ति कुंज सेवा समिति मड़िहान के तत्वावधान में सरस संगीतबद्ध श्रीमद्भागवत महापुराण कथा प्रवक्ता जगदीशानंद महाराज ने कहा कि ज्ञान की विद्या में भारत विश्व का गुरु रहा है। भगवान कथा स्वयं का ज्ञान भंडार है, लेकिन जैैसा प्राचीन शास्त्रों का मत है भागवत मक्खन है अन्य शास्त्र दूध, दही जैसा भगवान को मक्खन प्रिय है, वासना वृत्तियों का आवरण दूर हो उसे हम कथा कहते हैं। स्वामीजी ने भगवान श्रीराम के चरित्र पर प्रकाश डालते हुए बताया कि श्रीराम का चरित्र अनंत है, श्रीराम की मां कौशल्या निष्काम बुद्घि है। सुमित्रा श्रद्घा और कैकेई कुबुद्घि है। महाराज दशरथ साक्षात धर्म की मूर्ति है, लेकिन कुबुद्घि के कारण धर्म का भी पतन हो जाता है। कथा के दौरान संगीत में संतोष आर्गन पर, वेद प्रकाश ने तबला पर और सूरज ने पैड पर संगत किया। राजेंद्र, पप्पु, राम विलास सिंह, गोपाल सेठ, मानिकचंद्र तिवारी, ओम प्रकाश सिंह, कन्हैया सेठ, गोपाल आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
भक्ति कुंज सेवा समिति मड़िहान के तत्वावधान में सरस संगीतबद्ध श्रीमद्भागवत महापुराण कथा प्रवक्ता जगदीशानंद महाराज ने कहा कि ज्ञान की विद्या में भारत विश्व का गुरु रहा है। भगवान कथा स्वयं का ज्ञान भंडार है, लेकिन जैैसा प्राचीन शास्त्रों का मत है भागवत मक्खन है अन्य शास्त्र दूध, दही जैसा भगवान को मक्खन प्रिय है, वासना वृत्तियों का आवरण दूर हो उसे हम कथा कहते हैं। स्वामीजी ने भगवान श्रीराम के चरित्र पर प्रकाश डालते हुए बताया कि श्रीराम का चरित्र अनंत है, श्रीराम की मां कौशल्या निष्काम बुद्घि है। सुमित्रा श्रद्घा और कैकेई कुबुद्घि है। महाराज दशरथ साक्षात धर्म की मूर्ति है, लेकिन कुबुद्घि के कारण धर्म का भी पतन हो जाता है। कथा के दौरान संगीत में संतोष आर्गन पर, वेद प्रकाश ने तबला पर और सूरज ने पैड पर संगत किया। राजेंद्र, पप्पु, राम विलास सिंह, गोपाल सेठ, मानिकचंद्र तिवारी, ओम प्रकाश सिंह, कन्हैया सेठ, गोपाल आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन