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बिजली का शेड्यूल ध्वस्त
mirzapur
Updated Sat, 20 May 2017 12:06 AM IST
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electricity theft
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योगी सरकार ने गांवों में 18 घंटे और शहरों को 22 घंटे बिजली देने का दावा किया है लेकिन गांवों और कस्बों में यह दावा हवा हवाई साबित हो रहा है। जर्जर तारों और पुराने घिसे पिटे ट्रांसफार्मरों के सहारे बिजली देने की कवायद नाकाफी साबित हो रहा है। इससे ग्रामीणों को भीषण गर्मी में पसीने से तर बतर हो कर रातें गुजारनी पड़ रही हैं। मिर्जापुर शहर और विन्ध्याचल धाम को छोड़ दिया जाय तो आसपास के इलाकों की हालत बेहद दयनीय है।
विकास खंड कोन बिजली की आंख मचिौनी से उपभोक्ता त्रस्त हैं। भीषण गर्मी में बिजली कटौती का समय निर्धारित नहीं होने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। दिन में एक दो घंटे बिजली आने के बाद शेष समय बिजली के इंतजार में कटता है। कभी कभी तो पांच छह घंटे तक ब िजली के दर्शन नहीं होते हैं। इससे लोग अपने आवश्यक कार्य भी नहीं कर पाते हैं। लालगंज क्षेत्र में जर्जर तारों और फुंके ट्रांसफार्मरों के चलते बिजली कटौती के घंटे अनिश्चित हैं।
दिन रात मिला कर कुछ ही घंटे की विद्युत आपूर्ति हो रही है। कनोखर गांव में तो लो बोल्टेज की समस्या से लोग बेहाल हैं। न तो मोबाइल फोन चार्ज हो पा रहे हैं और न ही बिजली संचालित यंत्रों का प्रयोग हो पा रहा है। उधर कछवां विद्युत उपकेंद्र की लापरवाही के चलते नगर पंचायत कछवां एवं मझवां ब्लाक के 28 गांवों के लोग एक सप्ताह से बिजली पानी के संकट से जूझ रहे हैं। मझवां में मात्र पांच से सात घंटे बिजली मिल रही है जबकि लॉग बुक पर 17 घंटे 45 मिनट दर्ज किया् जा रहा है। बरैनी, केवटाबीर, महामलपुर, बजहां, सेमरी, भैसा, सेमरी, मझवां, रामचंदरपुर, कटका, बाड़ापुर आदि गांवों की हजारो की आबादी बिजली पानी से वंचित हो रही है।
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बिना बिजली के उमस भरी गर्मी में लोगो का जीना मुहाल नहो गया है। वहीं कछवां नगर पंचायत के लोग उमस के कारण रात्रि जागरण करने को विवश हैं। पानी के लिए हैंडपंपों पर भीड़ लग रही है। अदलहाट, अहरौरा, नरायनपुर आदि इलाकों में भी इसी तरह की समस्या देखने को मिल रही है। कुछ घंटे मिलने वाली बिजली आपूर्ति से लोगों का काम नहीं चल पा रहा है। आटाचक्की जैसे बिजली संचालित कुटीर उद्योग ठप पड़ते जा रहे हैं।
अधिशासी अभियंता एके सिंह के मुताबिक गांवों में औसतन 15 घंटे बिजली दी जा रही है। बिजली देने की क्षमता में कहीं कोई कमी नहीं है। लोकल फाल्ट के कारण कुछ घंटे की कहीं कहीं कटौती होती है या फिर ग्रिड में लोड बढ़ने के कारण बिजली कटौती होती है। इमरजेंसी रोस्टिंग भी समस्या पैदा करता है। जर्जर तारों को बदलने की अभी कार्ययोजना नहीं है।
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विकास खंड कोन बिजली की आंख मचिौनी से उपभोक्ता त्रस्त हैं। भीषण गर्मी में बिजली कटौती का समय निर्धारित नहीं होने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। दिन में एक दो घंटे बिजली आने के बाद शेष समय बिजली के इंतजार में कटता है। कभी कभी तो पांच छह घंटे तक ब िजली के दर्शन नहीं होते हैं। इससे लोग अपने आवश्यक कार्य भी नहीं कर पाते हैं। लालगंज क्षेत्र में जर्जर तारों और फुंके ट्रांसफार्मरों के चलते बिजली कटौती के घंटे अनिश्चित हैं।
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दिन रात मिला कर कुछ ही घंटे की विद्युत आपूर्ति हो रही है। कनोखर गांव में तो लो बोल्टेज की समस्या से लोग बेहाल हैं। न तो मोबाइल फोन चार्ज हो पा रहे हैं और न ही बिजली संचालित यंत्रों का प्रयोग हो पा रहा है। उधर कछवां विद्युत उपकेंद्र की लापरवाही के चलते नगर पंचायत कछवां एवं मझवां ब्लाक के 28 गांवों के लोग एक सप्ताह से बिजली पानी के संकट से जूझ रहे हैं। मझवां में मात्र पांच से सात घंटे बिजली मिल रही है जबकि लॉग बुक पर 17 घंटे 45 मिनट दर्ज किया् जा रहा है। बरैनी, केवटाबीर, महामलपुर, बजहां, सेमरी, भैसा, सेमरी, मझवां, रामचंदरपुर, कटका, बाड़ापुर आदि गांवों की हजारो की आबादी बिजली पानी से वंचित हो रही है।
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बिना बिजली के उमस भरी गर्मी में लोगो का जीना मुहाल नहो गया है। वहीं कछवां नगर पंचायत के लोग उमस के कारण रात्रि जागरण करने को विवश हैं। पानी के लिए हैंडपंपों पर भीड़ लग रही है। अदलहाट, अहरौरा, नरायनपुर आदि इलाकों में भी इसी तरह की समस्या देखने को मिल रही है। कुछ घंटे मिलने वाली बिजली आपूर्ति से लोगों का काम नहीं चल पा रहा है। आटाचक्की जैसे बिजली संचालित कुटीर उद्योग ठप पड़ते जा रहे हैं।
अधिशासी अभियंता एके सिंह के मुताबिक गांवों में औसतन 15 घंटे बिजली दी जा रही है। बिजली देने की क्षमता में कहीं कोई कमी नहीं है। लोकल फाल्ट के कारण कुछ घंटे की कहीं कहीं कटौती होती है या फिर ग्रिड में लोड बढ़ने के कारण बिजली कटौती होती है। इमरजेंसी रोस्टिंग भी समस्या पैदा करता है। जर्जर तारों को बदलने की अभी कार्ययोजना नहीं है।