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Mirzapur News: उपेक्षा और अतिक्रमण की मार झेल रही पक्की सराय, बदहाल हुआ 175 वर्ष पुराना नक्काशीदार कूप
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पहले कुछ इस तरह रहा 18 वी शताब्दी पूर्व बना पक्का सराय का प्राचीन कूप।-सोशल मीडिया।
175 वर्ष पुराना नक्काशीदार कूप बदहाल, प्रवेश द्वार गायब; जर्जर इमारतें और गंदगी से धूमिल हो रही ऐतिहासिक पहचान
मिर्जापुर। कभी व्यापारियों, यात्रियों और स्थानीय लोगों की चहल-पहल से गुलजार रहने वाली शहर के घंटाघर के बगल में ऐतिहासिक पक्की सराय आज उपेक्षा, अतिक्रमण और बदइंतजामी की मार झेल रही है। शहर के मध्य स्थित यह धरोहर न केवल ऐतिहासिक पहचान खो रही है, बल्कि इसके भीतर मौजूद 175 वर्ष पुराना नक्काशीदार प्राचीन कूप भी बदहाली से अस्तित्व के संकट से गुजर रहा है। संरक्षण के अभाव में सराय की इमारतें जर्जर हो रही हैं, प्रवेश द्वार गायब हो चुके हैं। कभी आकर्षण का केंद्र रहा ऐतिहासिक कूप गंदगी से पटा है।
इतिहासकारों और स्थानीय लोगों ने बताया कि पक्की सराय का निर्माण 18वीं शताब्दी में यात्रियों और व्यापारियों के ठहरने के लिए कराया गया था। उस दौर में यह स्थान व्यापारिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र माना जाता था। सराय परिसर में वर्ष 1851 में स्थानीय व्यवसायी पंडित शीतला प्रसाद उपाध्याय ने भव्य नक्काशीदार कूप बनवाया था। कलात्मक नक्काशी और बेहतरीन स्थापत्य शैली के कारण यह कूप दूर-दराज से आने वाले लोगों के आकर्षण का केंद्र बना रहता था।
समय के साथ बदलते हालात और प्रशासनिक उदासीनता ने धरोहर की चमक फीकी कर दी। कूप के चारों ओर बनी पारंपरिक सीढ़ियां आज जमीन के नीचे दब चुकी हैं। नगर पालिका की ओर से कुछ वर्ष पहले कूप के चारों तरफ स्टील की रॉड लगाकर सुरक्षा घेरा और इंटरलॉकिंग कीी गई थी। लेकिन अब घेराबंदी का एक हिस्सा टूटकर गायब हो चुका है। जगह-जगह इंटरलॉकिंग उखड़ गई है। कूप के अंदर व आसपास गंदगी का अंबार लगा है।
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पक्की सराय परिसर भी अतिक्रमण की जद में है। सराय में प्रवेश के लिए बने दोनों ऐतिहासिक द्वार और उनके दरवाजे अब नजर नहीं आते। जर्जर इमारतों में दरारें पड़ चुकी हैं, किसी भी समय हादसा होने की आशंका बनी रहती है। स्थानीय लोगों ने बताया कि यदि समय रहते संरक्षण और मरम्मत का कार्य नहीं कराया गया तो शहर की एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक धरोहर हमेशा के लिए समाप्त हो सकती है।
नगरवासियों का मानना है कि पक्की सराय और नक्काशीदार कूप को संरक्षित कर पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाए तो इससे न केवल शहर की ऐतिहासिक पहचान मजबूत होगी, बल्कि लोगों को अपने गौरवशाली अतीत से जुड़ने का अवसर भी मिलेगा।
क्या कहते हैं लोग
पूर्वजों से सुना था कि कभी पक्की सराय बाहर से आने वाले व्यापारियों से गुलजार रहती थी। प्राचीन कूप से आसपास के लोग पानी पीते थे। आज देखरेख के अभाव में सराय और कूप बदहाल हैं।
— मुश्ताक अहमद, पक्की सराय
पक्की सराय में प्रवेश के लिए बने दोनों गेट पूरी तरह गायब हो चुके हैं। जर्जर इमारतें किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रही हैं, जिम्मेदारों को इस ओर ध्यान देना चाहिए।
— मो. आजाद, पक्की सराय
नक्काशीदार कूप की ख्याति दूर-दूर तक रही है। इसे देखने के लिए बाहर से लोग आते थे। इस धरोहर के संरक्षण की दिशा में ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।
— सलमान, पक्की सराय
कूप आज गंदगी से पटे हैं। यदि इसकी नियमित साफ-सफाई और संरक्षण की जाए तो यह जरूरत के समय मोहल्ले के लोगों के भी काम आ सकती है।
— कृष्णा ऊमर
वर्जन
नगर में ऐतिहासिक स्थलों का पालिका प्रशासन की ओर से संरक्षण और देखरेख की जा रही है। कुछ वर्ष पहले पक्की सराय में बने कूप का सुंदरीकरण कराया गया था। यदि कुछ कमियां हैं तो उनकी जांच कराकर शीघ्र दुरुस्त कराया जाएगा।
श्याम सुंदर केसरी, अध्यक्ष, नगर पालिका परिषद, मिर्जापुर
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मिर्जापुर। कभी व्यापारियों, यात्रियों और स्थानीय लोगों की चहल-पहल से गुलजार रहने वाली शहर के घंटाघर के बगल में ऐतिहासिक पक्की सराय आज उपेक्षा, अतिक्रमण और बदइंतजामी की मार झेल रही है। शहर के मध्य स्थित यह धरोहर न केवल ऐतिहासिक पहचान खो रही है, बल्कि इसके भीतर मौजूद 175 वर्ष पुराना नक्काशीदार प्राचीन कूप भी बदहाली से अस्तित्व के संकट से गुजर रहा है। संरक्षण के अभाव में सराय की इमारतें जर्जर हो रही हैं, प्रवेश द्वार गायब हो चुके हैं। कभी आकर्षण का केंद्र रहा ऐतिहासिक कूप गंदगी से पटा है।
इतिहासकारों और स्थानीय लोगों ने बताया कि पक्की सराय का निर्माण 18वीं शताब्दी में यात्रियों और व्यापारियों के ठहरने के लिए कराया गया था। उस दौर में यह स्थान व्यापारिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र माना जाता था। सराय परिसर में वर्ष 1851 में स्थानीय व्यवसायी पंडित शीतला प्रसाद उपाध्याय ने भव्य नक्काशीदार कूप बनवाया था। कलात्मक नक्काशी और बेहतरीन स्थापत्य शैली के कारण यह कूप दूर-दराज से आने वाले लोगों के आकर्षण का केंद्र बना रहता था।
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समय के साथ बदलते हालात और प्रशासनिक उदासीनता ने धरोहर की चमक फीकी कर दी। कूप के चारों ओर बनी पारंपरिक सीढ़ियां आज जमीन के नीचे दब चुकी हैं। नगर पालिका की ओर से कुछ वर्ष पहले कूप के चारों तरफ स्टील की रॉड लगाकर सुरक्षा घेरा और इंटरलॉकिंग कीी गई थी। लेकिन अब घेराबंदी का एक हिस्सा टूटकर गायब हो चुका है। जगह-जगह इंटरलॉकिंग उखड़ गई है। कूप के अंदर व आसपास गंदगी का अंबार लगा है।
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पक्की सराय परिसर भी अतिक्रमण की जद में है। सराय में प्रवेश के लिए बने दोनों ऐतिहासिक द्वार और उनके दरवाजे अब नजर नहीं आते। जर्जर इमारतों में दरारें पड़ चुकी हैं, किसी भी समय हादसा होने की आशंका बनी रहती है। स्थानीय लोगों ने बताया कि यदि समय रहते संरक्षण और मरम्मत का कार्य नहीं कराया गया तो शहर की एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक धरोहर हमेशा के लिए समाप्त हो सकती है।
नगरवासियों का मानना है कि पक्की सराय और नक्काशीदार कूप को संरक्षित कर पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाए तो इससे न केवल शहर की ऐतिहासिक पहचान मजबूत होगी, बल्कि लोगों को अपने गौरवशाली अतीत से जुड़ने का अवसर भी मिलेगा।
क्या कहते हैं लोग
पूर्वजों से सुना था कि कभी पक्की सराय बाहर से आने वाले व्यापारियों से गुलजार रहती थी। प्राचीन कूप से आसपास के लोग पानी पीते थे। आज देखरेख के अभाव में सराय और कूप बदहाल हैं।
— मुश्ताक अहमद, पक्की सराय
पक्की सराय में प्रवेश के लिए बने दोनों गेट पूरी तरह गायब हो चुके हैं। जर्जर इमारतें किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रही हैं, जिम्मेदारों को इस ओर ध्यान देना चाहिए।
— मो. आजाद, पक्की सराय
नक्काशीदार कूप की ख्याति दूर-दूर तक रही है। इसे देखने के लिए बाहर से लोग आते थे। इस धरोहर के संरक्षण की दिशा में ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।
— सलमान, पक्की सराय
कूप आज गंदगी से पटे हैं। यदि इसकी नियमित साफ-सफाई और संरक्षण की जाए तो यह जरूरत के समय मोहल्ले के लोगों के भी काम आ सकती है।
— कृष्णा ऊमर
वर्जन
नगर में ऐतिहासिक स्थलों का पालिका प्रशासन की ओर से संरक्षण और देखरेख की जा रही है। कुछ वर्ष पहले पक्की सराय में बने कूप का सुंदरीकरण कराया गया था। यदि कुछ कमियां हैं तो उनकी जांच कराकर शीघ्र दुरुस्त कराया जाएगा।
श्याम सुंदर केसरी, अध्यक्ष, नगर पालिका परिषद, मिर्जापुर

पहले कुछ इस तरह रहा 18 वी शताब्दी पूर्व बना पक्का सराय का प्राचीन कूप।-सोशल मीडिया।