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सिर्फ तीस हजार वसूले, पांच को प्रतिकूल प्रविष्टि
mirzapur news
Updated Sun, 17 Sep 2017 12:32 AM IST
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कर्ज वसूली में ढील बरतने वाले चुनार तहसील के सभी पांच सहायक वासिल बाकी नवीसों (एडब्ल्यूबीएन) को प्रतिकूल प्रविष्टि दी जाएगी। इस बात के निर्देश प्रमुख सचिव दिव्यांगजन महेश प्रसाद गुप्ता ने शनिवार को निरीक्षण के दौरान दिया। उन्होंने कहा कि भूमि विवाद में बयान देने में आनाकानी करने वाले लेखपाल और कानूनगो के खिलाफ सीधे चार्जशीट जारी की जाए। उन्होंने नगर पालिका का भी निरीक्षण किया।
जिले के नोडल अधिकारी और प्रमुख सचिव दिव्यांगजन महेश प्रसाद गुप्ता ने अपने दौरे के दूसरे दिन शनिवार को चुनार तहसील का निरीक्षण किया। उन्होेंने उपजिलाधिकारी में नजारत, संग्रह, अभिलेखागार, न्यायालय नायब तहसीलदार का निरीक्षण किया। सभी पटलों के कागजात देखे। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वादों के निस्तारण के बाद तीन दिन में उसे कंप्यूटर पर अपलोड तकर दिया जाए। नायब तहसीलदार से कहा कि पंजीकृत बैनामा की आपत्तियों का तत्काल निस्तारण किया जाए। भूमि विवाद के मामले में समय से बयान नहीं देने पर लेखपाल व कानूनगो को चार्जशीट दी जाय। वर्ष 2011 के बैनामे के बरेवा, बनकी, रीवा आदि गांवों के 13 मामलों को तत्काल निस्तारित करने को कहा। एसडीएम से कहा कि एक वर्ष से पुराने विवादों को एसडीएम से खुद रुचि लेकर जल्द निस्तारित कराएं। तीन वर्ष से ज्यादा पुराने मामलों को एडीएम स्तर से निस्तारित कराया जाए।
रजिस्टर नंबर चार निर्धारित प्रारूप पर नहीं होने उन्होंने नाराजगी जताई और हिदायत दी कि उसे राजस्व नियमावली के मुताबिक बनाया जाए। तहसील के 47 संग्रह अमीनों व 29 संग्रह चपरासी महज 30 हजार रुपये राजस्व की वसूली की बात सुनकर उन्होंने कहा कि ऐसे नहीं चलेगा। जल्द से जल्द वसूली का लक्ष्य पूरा करें।
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तहसील के बाद प्रमुख सचिव नगर पालिका कार्यालय पहुंचे जहां कर निर्धारण पंजिका वर्षवार नहीं रखने और स्टोर रूम में रखे कबाड़ देखकर उन्होंने कहा कि रवैया बदल दें। उन्होंने जल कर व लेखा विभाग के अभिलेखों को खुद आलमारी से निकाल कर देखा। गृहकर की वसूली व पानी कनेक्शन के में सवाल पूछने पर एकाउंटेंट ने बताया कि अब तक दो लाख 75 हजार की वसूली हुई है। नगर में पांच हजार पांच सौ पानी के कनेक्शन हैं। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी विमल कुमार दूबे, एडीएम विजय बहादुर, सिटी मजिस्ट्रेट देवेंद्र प्रसाद मिश्रा, उपजिलाधिकारी चुनार सुनील कुमार मिश्रा, जिला आबकारी अधिकारी नीरज कुमार दूबे, पुलिस उपाधीक्षक चुनार सुधीर कुमार आदि मौजूद रहे।
मोर्चाघर स्थित निर्माणाधीन सीएमओ कार्यालय के भवन का शनिवार की शाम औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान भवन को मानक के अनुरूप नहीं बनाए जाने पर कड़ी नाराजगी जताते हुए उसकी जांच कर रिपोर्ट शासन को भेजने का निर्देश दिया। साथ ही भवन में खिड़की लगाने को कहा।
प्रमुख सचिव शनिवार की दोपहर बाद मोर्चा घर स्थित मुख्य चिकित्साधिकारी के आवास में बन रहे सीएमओ कार्यालय का औचक निरीक्षण करने पहुंचे। भवन में दाखिल होते ही उसकी गुणवत्ता देख भड़क गए। टाईल्स काफी खराब पाया। बिजली सप्लाई के लिए लगाए गए बोर्ड घटिया किस्म के पाए गए। इसके अलावा अन्य कमिया भी मिली। फर्स को काफी खराब बना पाया। वहां मौजूद यूपीपीसीएल के प्रोजेक्ट मैनेजर आरडी वर्मा ने बताया कि एक करोड़ 71 लाख से जून वर्ष 2013 में भवन बनाने के लिए अनुमति मिली थी। जिसे वर्ष 2015 जून में बनाकर हैंडओवर करना था लेकिन बजट नहीं मिलने के कारण निर्माण कार्य रूक गया। दोबारा 21 लाख रुपये और लागत आने की बात करते हुए प्रस्ताव बनाकर भेजा गया तो शासन ने वर्ष 2016 में 20 लाख रुपये दिए। बजट मिले पर निर्माण पूर्ण कराया गया। इसपर वह कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि भवन को मानक के अनुरूप नहीं बनाया गया है। इसलिए इसकी जांच कर रिपोर्ट दे ताकि संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जा सके। इस दौरान सीएमओ डा.उमेश यादव आदि मौजूद रहे।
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जिले के नोडल अधिकारी और प्रमुख सचिव दिव्यांगजन महेश प्रसाद गुप्ता ने अपने दौरे के दूसरे दिन शनिवार को चुनार तहसील का निरीक्षण किया। उन्होेंने उपजिलाधिकारी में नजारत, संग्रह, अभिलेखागार, न्यायालय नायब तहसीलदार का निरीक्षण किया। सभी पटलों के कागजात देखे। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वादों के निस्तारण के बाद तीन दिन में उसे कंप्यूटर पर अपलोड तकर दिया जाए। नायब तहसीलदार से कहा कि पंजीकृत बैनामा की आपत्तियों का तत्काल निस्तारण किया जाए। भूमि विवाद के मामले में समय से बयान नहीं देने पर लेखपाल व कानूनगो को चार्जशीट दी जाय। वर्ष 2011 के बैनामे के बरेवा, बनकी, रीवा आदि गांवों के 13 मामलों को तत्काल निस्तारित करने को कहा। एसडीएम से कहा कि एक वर्ष से पुराने विवादों को एसडीएम से खुद रुचि लेकर जल्द निस्तारित कराएं। तीन वर्ष से ज्यादा पुराने मामलों को एडीएम स्तर से निस्तारित कराया जाए।
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रजिस्टर नंबर चार निर्धारित प्रारूप पर नहीं होने उन्होंने नाराजगी जताई और हिदायत दी कि उसे राजस्व नियमावली के मुताबिक बनाया जाए। तहसील के 47 संग्रह अमीनों व 29 संग्रह चपरासी महज 30 हजार रुपये राजस्व की वसूली की बात सुनकर उन्होंने कहा कि ऐसे नहीं चलेगा। जल्द से जल्द वसूली का लक्ष्य पूरा करें।
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तहसील के बाद प्रमुख सचिव नगर पालिका कार्यालय पहुंचे जहां कर निर्धारण पंजिका वर्षवार नहीं रखने और स्टोर रूम में रखे कबाड़ देखकर उन्होंने कहा कि रवैया बदल दें। उन्होंने जल कर व लेखा विभाग के अभिलेखों को खुद आलमारी से निकाल कर देखा। गृहकर की वसूली व पानी कनेक्शन के में सवाल पूछने पर एकाउंटेंट ने बताया कि अब तक दो लाख 75 हजार की वसूली हुई है। नगर में पांच हजार पांच सौ पानी के कनेक्शन हैं। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी विमल कुमार दूबे, एडीएम विजय बहादुर, सिटी मजिस्ट्रेट देवेंद्र प्रसाद मिश्रा, उपजिलाधिकारी चुनार सुनील कुमार मिश्रा, जिला आबकारी अधिकारी नीरज कुमार दूबे, पुलिस उपाधीक्षक चुनार सुधीर कुमार आदि मौजूद रहे।
मोर्चाघर स्थित निर्माणाधीन सीएमओ कार्यालय के भवन का शनिवार की शाम औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान भवन को मानक के अनुरूप नहीं बनाए जाने पर कड़ी नाराजगी जताते हुए उसकी जांच कर रिपोर्ट शासन को भेजने का निर्देश दिया। साथ ही भवन में खिड़की लगाने को कहा।
प्रमुख सचिव शनिवार की दोपहर बाद मोर्चा घर स्थित मुख्य चिकित्साधिकारी के आवास में बन रहे सीएमओ कार्यालय का औचक निरीक्षण करने पहुंचे। भवन में दाखिल होते ही उसकी गुणवत्ता देख भड़क गए। टाईल्स काफी खराब पाया। बिजली सप्लाई के लिए लगाए गए बोर्ड घटिया किस्म के पाए गए। इसके अलावा अन्य कमिया भी मिली। फर्स को काफी खराब बना पाया। वहां मौजूद यूपीपीसीएल के प्रोजेक्ट मैनेजर आरडी वर्मा ने बताया कि एक करोड़ 71 लाख से जून वर्ष 2013 में भवन बनाने के लिए अनुमति मिली थी। जिसे वर्ष 2015 जून में बनाकर हैंडओवर करना था लेकिन बजट नहीं मिलने के कारण निर्माण कार्य रूक गया। दोबारा 21 लाख रुपये और लागत आने की बात करते हुए प्रस्ताव बनाकर भेजा गया तो शासन ने वर्ष 2016 में 20 लाख रुपये दिए। बजट मिले पर निर्माण पूर्ण कराया गया। इसपर वह कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि भवन को मानक के अनुरूप नहीं बनाया गया है। इसलिए इसकी जांच कर रिपोर्ट दे ताकि संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जा सके। इस दौरान सीएमओ डा.उमेश यादव आदि मौजूद रहे।